वर्ल्डकप जीतकर घर लौटे क्रिकेटर्स का जोरदार स्वागत:सूर्या बोले- हमारा अगला टारगेट ओलिंपिक गोल्ड, ईशान ने बच्चों के साथ क्रिकेट खेला
टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय प्लेयर्स अपने-अपने घर पहुंच रहे हैं। जहां सभी का जोरदार स्वागत किया जा रहा है। मुंबई में कप्तान सूर्यकुमार यादव, पटना में ईशान किशन और दिल्ली में हेड कोच गौतम गंभीर का ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत हुआ। मुंबई में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा- 'हमारा अगला गोल है - 2028 में भारत के लिए ओलिंपिक गोल्ड जीतना। उसी साल T20 वर्ल्ड कप भी होगा, इसलिए हम T20 हैट्रिक बनाने की पूरी कोशिश करेंगे।' इस स्टोरी में क्रिकेटर्स के स्वागत के फोटो देखिए… भारत ने दो दिन पहले जीता था वर्ल्डकप 2 दिन पहले भारत ने रविवार को टी-20 वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और ट्रॉफी जीती थी। इसके साथ ही टीम इंडिया ने अपना खिताब बरकरार रखा और टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में लगातार दो बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गई। ---------------------------------------------------------- टी-20 वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… BCCI टीम इंडिया को ₹131 करोड़ देगा, यह पैसा खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ मे बंटेगा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने पर टीम इंडिया के लिए 131 करोड़ रुपए के इनाम का ऐलान किया है। यह पैसा खिलाड़ियो और सपोर्ट स्टाफ में बंटेगा। पढ़ें पूरी खबर
बदलाव की बयार, युवा इलाके की फिजा बदलने में जुटे:10 साल में जम्मू-कश्मीर के 150 से ज्यादा उम्मीदवार UPSC में चयनित; कोई दृष्टिबाधित तो कोई मजदूर का बेटा
वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे-से घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। गांव वाले, रिश्तेदार और परिचित बधाई देने आ रहे हैं। ये घर इरफान अहमद लोन का है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा। सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूर बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इरफान की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी जमीन भी बेच दी। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भी आईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है। यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। ये बदलाव कश्मीर में शिक्षा, अवसर और नई आकांक्षाओं के उभरते माहौल की भी कहानी है। हर साल औसतन 10-15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जम्मू-कश्मीर से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं। प्रेरणा - शाह फैसल के टॉपर बनने के बाद कई युवा टॉप 10 में आए दो दशक पहले यूपीएससी की चयन सूची में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 साल के आतंक के दौर में सिर्फ चार आईएएस और आईपीएस ही निकले। 2010 में शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीर के पहले उम्मीदवार बने। उनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संख्या में युवा यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2016 में अतहर आमिर ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद कई युवा टॉप 10 में अपना स्थान बनाने में सफल रहे। विस्तार - पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी कर रहे मदद पिछले कुछ वर्षों में, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी न केवल श्रीनगर बल्कि छोटे कस्बों में भी छात्रों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बन गई है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोचिंग सेंटरों का विस्तार हो रहा है। श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और पुलवामा जैसे शहरों में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बढ़ रहे हैं। कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। पूर्व आईजीपी बसंत रथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के सिविल सेवा उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग दे रहे हैं।
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