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मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 640 अंक उछला

मुंबई, 10 मार्च (आईएएनएस)। मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते पिछले दिन की बड़ी गिरावट से उबरते हुए भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 639.82 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,205.98 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 233.55 अंक यानी 0.97 प्रतिशत चढ़कर 24,261.60 के स्तर पर बंद हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत के बाद जोखिम भावना में सुधार होने से घरेलू बाजार ने लगातार दो दिनों की गिरावट को समाप्त कर दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा बाजार में कई दिनों तक चले भारी उतार-चढ़ाव के बाद बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध का समाधान बहुत जल्द हो सकता है। इस खबर से निवेशकों का मनोबल बढ़ा और उनमें जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी।

इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

दिन के कारोबार के दौरान बाजार में और ज्यादा तेजी देखने को मिली। इंट्राडे में सेंसेक्स करीब 960 अंक यानी लगभग 1.2 प्रतिशत उछलकर 78,526.25 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 275.75 अंक यानी करीब 1.1 प्रतिशत बढ़कर 24,303.80 के स्तर तक पहुंचा। हालांकि बाद में दोनों सूचकांकों में थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई।

व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में जहां 1.62 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.12 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो इंडेक्स (3.10 प्रतिशत की तेजी) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बनकर उभरा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (बैंक को छोड़कर) इंडेक्स ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, निफ्टी बैंक में 1.66 प्रतिशत, तो निफ्टी एफएमसीजी में 0.84 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

इस बीच, निफ्टी आईटी इंडेक्स (0.46 प्रतिशत की गिरावट) को क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। वहीं, निफ्टी ऑयल एंड गैस का प्रदर्शन भी खराब रहा।

इससे पहले सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में बिकवाली के कारण घरेलू बाजार दबाव में आ गया था।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इस बीच वैश्विक बाजार स्थिर होने के साथ तेल की कीमतों में भी कुछ गिरावट आई। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 7.56 डॉलर गिरकर 87.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 7.54 डॉलर गिरकर 91.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में ऊर्जा ढांचे पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Parivahan Yojana: यूपी के हर गांव में पहुंच रही बस सेवा, सीएम ग्राम परिवहन योजना का लाभ उठा रहे लोग

Parivahan Yojana: ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई पहल की दिशा में कदम बढ़ाया है. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026 के तहत राज्य के हजारों गांवों को बस सेवा से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को जिला मुख्यालय, अस्पताल, बाजार और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुरक्षित और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी और विकास की गति तेज होगी.

हर गांव तक बस सेवा पहुंचाने की तैयारी

राज्य में वर्तमान समय में करीब 59 हजार से अधिक ग्राम सभाएं हैं. सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में इन सभी गांवों तक बस सेवा की पहुंच सुनिश्चित की जाए.

ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोगों को शहर या जिला मुख्यालय तक जाने के लिए निजी वाहनों या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ता है. कई गांव ऐसे भी हैं जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बिल्कुल नहीं है. नई योजना लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी सुधार आने की उम्मीद है.

गांव से जिला मुख्यालय तक सीधी कनेक्टिविटी

इस योजना के तहत बसों के संचालन की व्यवस्था इस तरह बनाई जा रही है कि ग्रामीण यात्रियों को ज्यादा सुविधा मिल सके. योजना के अनुसार बसें रात के समय गांवों में ही रुकेंगी और सुबह निर्धारित समय पर जिला मुख्यालय के लिए रवाना होंगी.

सुबह करीब 10 बजे तक बसें जिला मुख्यालय पहुंच जाएंगी, जिससे गांवों के लोग आसानी से अपने जरूरी काम निपटा सकेंगे. सरकारी दफ्तरों में काम करवाना, अस्पताल में इलाज कराना या बाजार से सामान खरीदना ग्रामीणों के लिए अब पहले से आसान हो सकता है.

जिला स्तर पर बनेगी निगरानी समिति

योजना के बेहतर संचालन के लिए हर जिले में एक विशेष समिति बनाई जाएगी. इस समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे और इसमें क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सहित परिवहन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल होंगे.

यह समिति बसों के रूट तय करने, किराया निर्धारित करने, संचालन की निगरानी करने और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने का काम करेगी. इससे योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और व्यवस्था बनी रहेगी.

निजी बस मालिकों को मिलेगा मौका

इस योजना की एक खास बात यह है कि सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी बस मालिकों को इसमें शामिल करेगी. इसके तहत निजी बस मालिक अपने वाहनों को पंजीकृत कराकर अनुबंध के आधार पर इस योजना के अंतर्गत चला सकेंगे. इस मॉडल से सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की संख्या बढ़ाने में भी आसानी होगी.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

योजना के तहत बस मालिक अपने स्तर पर ड्राइवर और कंडक्टर नियुक्त कर सकेंगे. सरकार की प्राथमिकता होगी कि इन पदों पर स्थानीय युवाओं को ही मौका दिया जाए.

इससे दो बड़े फायदे होंगे. पहला, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. दूसरा, स्थानीय लोगों के होने से बसों का संचालन और गांवों में ठहराव बेहतर तरीके से हो सकेगा.

टैक्स में छूट से बढ़ेगी भागीदारी

सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. योजना के तहत चलने वाली बसों पर परिवहन विभाग किसी प्रकार का टैक्स नहीं लेगा.

इस निर्णय का उद्देश्य बस मालिकों को योजना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि अधिक से अधिक निजी बसें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे सकें.

ग्रामीण विकास को मिलेगा नया सहारा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो इससे ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल सकती है. अक्सर परिवहन सुविधा की कमी के कारण गांवों के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े अवसरों से दूर रह जाते हैं.

यदि हर गांव तक नियमित बस सेवा पहुंचती है, तो इससे ग्रामीणों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आ सकता है और शहर तथा गांव के बीच की दूरी भी काफी हद तक कम हो सकती है.

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