पीएम मोदी एशियन पैरा गेम्स मेडलिस्ट से कल मिलेंगे:नई दिल्ली में शाम 4:30 बजे मुलाकात; भारत ने पहली बार 30 गोल्ड जीते
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय प्लेयर्स से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल मुलाकात करेंगे। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शाम करीब 4:30 बजे यह कार्यक्रम होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। जापान के आईची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक हुए इन खेलों में भारत ने कुल 114 मेडल जीते। इनमें 30 गोल्ड, 35 सिल्वर और 49 ब्रॉन्ज शामिल हैं। भारत पहली बार इस प्रतियोगिता में 30 गोल्ड तक पहुंचा। टीम पॉइंट्स टेबल में चौथे स्थान पर रही। 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियन पैरा गेम्स में भारत ने 108 मेडल हासिल किए थे। पीएम मोदी दिल्ली में एशियन गेम्स मेडलिस्ट से मिले:कहा- महिला हॉकी में 44 साल का इंतजार खत्म हुआ; इनकी सफलता, देश की सफलता 114 मेडल कैसे आए, किस खेल ने सबसे ज्यादा योगदान दिया? भारत के मेडल सिर्फ एक-दो खेलों तक सीमित नहीं रहे। पैरा एथलेटिक्स और पैरा बैडमिंटन ने सबसे ज्यादा योगदान दिया। इनके अलावा तैराकी, तीरंदाजी, शूटिंग, टेबल टेनिस, जूडो और पावरलिफ्टिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। पैरा एथलेटिक्स ने अकेले दिलाए 65 मेडल भारत की कुल पदक संख्या में सबसे बड़ा हिस्सा पैरा एथलेटिक्स का रहा। इस खेल में खिलाड़ियों ने 22 गोल्ड, 19 सिल्वर और 24 ब्रॉन्ज जीते। इसका कारण यह है कि एथलेटिक्स में कई तरह के इवेंट होते हैं। इसमें 100 और 200 मीटर की दौड़ से लेकर लंबी दूरी, ऊंची कूद, लंबी कूद, भाला फेंक और क्लब थ्रो जैसे इवेंट शामिल हैं। इस बार सुमित अंतिल ने भाला फेंक में अपना गोल्ड बरकरार रखा। निशाद कुमार और मोना अग्रवाल भी दो-दो गोल्ड जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों में शामिल रहे। बैडमिंटन में 16 और स्विमिंग में 11 मेडल पैरा बैडमिंटन भारत का दूसरा सबसे सफल खेल रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इसमें 3 गोल्ड, 5 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज समेत 16 मेडल जीते। नितेश कुमार ने पुरुष सिंगल्स SL3 फाइनल में हमवतन प्रमोद भगत को हराकर गोल्ड जीता। दोनों खिलाड़ी पैरालिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं नवीन शिवकुमार ने पुरुष सिंगल्स SL4 में गोल्ड हासिल किया। थुलासिमथी मुरुगेसन ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने महिला डबल्स में मानसी जोशी के साथ गोल्ड जीता। महिला सिंगल्स में उन्हें सिल्वर मिला, जबकि मिक्स्ड डबल्स में भी उन्होंने सिल्वर अपने नाम किया। इस तरह उन्होंने एक ही प्रतियोगिता में तीन मेडल जीते। पैरा स्विमिंग में भारत को 11 मेडल मिले। इनमें 3 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज शामिल थे। हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल S11 में ब्रॉन्ज जीता। उन्होंने प्रतियोगिता में कुल तीन ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए। एशियन पैरा गेम्स क्या हैं और इनका महत्व क्यों है? एशियन पैरा गेम्स एशिया के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए होने वाली खेल प्रतियोगिता है। इसमें अलग-अलग देशों के खिलाड़ी अपनी शारीरिक स्थिति और खेल की क्षमता के अनुसार मुकाबला करते हैं। हर खेल में वर्गीकरण का अपना तरीका होता है। उदाहरण के लिए, एथलेटिक्स में दौड़ने, कूदने या थ्रो करने की क्षमता के आधार पर अलग श्रेणियां होती हैं। बैडमिंटन में भी खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति के अनुसार SL, SU जैसी कैटेगरी बनाई जाती हैं। मोदी टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम से भी मिल चुके
अग्निवीरों की नौकरी अब 4 नहीं 6 साल! कितनी मिलेगी सैलरी, पेंशन और सेवा निधि? 8 सवालों में समझें पूरा गणित
अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. अब चार साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सेना में जगह नहीं पाने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा. यानी अब उन्हें कुल छह साल तक सेना में सेवा करने का अवसर मिल सकेगा. इसके बाद नियमित सेना में शामिल होने का एक और मौका मिलेगा.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि चार साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया है. इसके आधार पर यह फैसला लिया गया है. नई व्यवस्था में अतिरिक्त दो साल के दौरान वेतन भी बढ़ाया जाएगा.
इस फैसले के बाद अग्निवीरों के मन में कई सवाल हैं. क्या छह साल बाद पेंशन मिलेगी? क्या सभी को स्थायी नौकरी मिलेगी? सेवा निधि कितनी होगी? आइए सवाल-जवाब में समझते हैं अग्निवीरों के लिए सरकार के नए फैसले का पूरा गणित.
Q&A से समझें अग्निवीरों को क्या मिलेगा
Q1. अग्निवीरों की नौकरी अब चार साल की होगी या छह साल की?
जवाब: अग्निपथ योजना के तहत शुरुआती सेवा अवधि चार साल ही रहेगी. पहले नियम था कि चार साल पूरे होने के बाद 25 फीसदी अग्निवीरों को मेरिट और जरूरत के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाएगा, जबकि बाकी 75 फीसदी को सेवा से बाहर होना पड़ता था.
अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है. चार साल बाद नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा. इसे 'सेकेंड टूर ऑफ ड्यूटी' कहा जा रहा है. इस तरह वे छह साल तक सेना में सेवा कर सकेंगे.
Q2. क्या छह साल बाद सभी अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिल जाएगी?
जवाब: छह साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सेना में शामिल होने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन यह स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है.
नई व्यवस्था के मुताबिक, अतिरिक्त दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेना में बने रहने के इच्छुक अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल होने का मौका दिया जाएगा. इसके लिए उन्हें निर्धारित वस्तुनिष्ठ चयन मानदंडों को पूरा करना होगा. इसमें प्रदर्शन, योग्यता और सेना की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा.
यानी अब पहले चार साल के बाद बाहर होने वाले युवाओं को नियमित सैनिक बनने के लिए एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा.
Q3. क्या छह साल की नौकरी के बाद अग्निवीरों को पेंशन और ग्रेच्युटी मिलेगी?
जवाब: अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को अस्थायी सेवा के दौरान पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलता. दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल मिलने से भी उन्हें अपने आप पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा.
हालांकि, अगर कोई अग्निवीर छह साल की सेवा के बाद नियमित सेना में चयनित हो जाता है, तो उसके बाद उसकी सेवा शर्तें नियमित सैनिकों पर लागू नियमों के अनुसार होंगी. पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ संबंधित सेवा नियमों और पात्रता पर निर्भर करेंगे.
Q4. पांचवें और छठे साल में कितनी मिलेगी सैलरी?
जवाब: सरकार ने अतिरिक्त दो साल के कार्यकाल के दौरान अग्निवीरों के वेतन में बढ़ोतरी की है.
सेवा अवधि अनुमानित मासिक वेतन
पांचवां साल - ₹43,500
छठा साल - ₹47,500
ये अतिरिक्त कार्यकाल के लिए घोषित अनुमानित मासिक वेतन पैकेज हैं. इसके अलावा पात्रता के अनुसार संबंधित भत्ते भी लागू हो सकते हैं.
Q5. छह साल बाद सेवा निधि (Seva Nidhi) कितनी मिलेगी?
जवाब: अग्निवीरों को सेवा अवधि पूरी होने पर एकमुश्त सेवा निधि दी जाती है. मूल योजना में अग्निवीर की सैलरी का 30 फीसदी हिस्सा हर महीने उसके कॉर्पस फंड में जमा होता है. इतनी ही राशि सरकार भी अपनी तरफ से जमा करती है. चार साल की सेवा पूरी होने पर ब्याज सहित करीब 11.71 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलता है.
नई व्यवस्था में अतिरिक्त दो साल के लिए सेवा निधि के नियमों में भी बदलाव किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, इस दूसरे कार्यकाल में अग्निवीर के योगदान के मुकाबले सरकार 70 फीसदी राशि का योगदान करेगी. दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा करने पर करीब 10.92 लाख रुपये की अतिरिक्त सेवा निधि मिलने का अनुमान बताया गया है. हालांकि, अंतिम भुगतान लागू नियमों और ब्याज के हिसाब से होगा.
Q6. क्या अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा मिलता है?
जवाब: हां, अग्निवीरों को सेना में सेवा के दौरान 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर दिया जाता है. गैर-अंशदायी का मतलब है कि इसके लिए उनकी सैलरी से अलग से बीमा प्रीमियम नहीं काटा जाता.
यह बीमा कवर उनकी अग्निवीर के रूप में सेवा अवधि के दौरान लागू रहता है. नई व्यवस्था में अतिरिक्त कार्यकाल के दौरान बीमा कवर की निरंतरता और लागू शर्तों की जानकारी संबंधित सेना के नियमों के अनुसार देखनी होगी.
Q7. सेना से बाहर होने के बाद दूसरी नौकरी कैसे मिलेगी?
जवाब: अग्निवीरों को सेना में सेवा के दौरान सैन्य प्रशिक्षण के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी सिखाए जाते हैं. सेवा पूरी होने पर उन्हें स्किल सर्टिफिकेट दिया जाता है, जिससे नागरिक क्षेत्र में नौकरी पाने में मदद मिल सकती है.
केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है. इसके अलावा निर्धारित नियमों के तहत आयु सीमा में छूट और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट जैसे लाभ भी दिए जाते हैं.
राज्य सरकारों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं. हालांकि, नौकरी मिलना संबंधित पद की पात्रता और चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
Q8. क्या अग्निवीर नौकरी के साथ पढ़ाई भी कर सकते हैं?
जवाब: हां, अग्निवीरों के लिए पढ़ाई जारी रखने और शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने की व्यवस्था भी की गई है.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से पात्र अग्निवीर 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) के जरिए ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने का अवसर भी उपलब्ध है.
इसका फायदा उन युवाओं को मिल सकता है, जो सेना से सेवा पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र या उच्च शिक्षा में अपना करियर बनाना चाहते हैं.
अग्निपथ योजना में बदलाव से क्या बदलेगा?
सरकार का यह फैसला अग्निवीरों को सेना में ज्यादा समय तक सेवा करने और नियमित सैनिक बनने का एक अतिरिक्त अवसर देता है. पहले चार साल बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर अनिश्चितता रहती थी. अब उन्हें दो साल का अतिरिक्त अनुभव, बढ़ा हुआ वेतन और नियमित कैडर में चयन का एक और मौका मिलेगा.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि छह साल की सेवा का मतलब पेंशन या स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है. नियमित सेना में शामिल होने के लिए चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. जो युवा इसके बाद भी नियमित कैडर में जगह नहीं बना पाएंगे, उनके लिए सेवा निधि, कौशल प्रमाणपत्र और अन्य रोजगार संबंधी सुविधाएं महत्वपूर्ण रहेंगी.
कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना में यह बदलाव युवाओं के सैन्य करियर को पहले से अधिक समय और अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है. इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है और अग्निवीरों को नियमित सेवा के साथ-साथ सेना से बाहर रोजगार के कितने प्रभावी अवसर मिलते हैं.
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