Justice Yashwant Varma महाभियोग: कार्रवाई से पहले राजनीतिक दलों से चर्चा करेंगे Om Birla
तिरुवनंतपुरम, चार नवंबर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पर आगे बढ़ने से पहले वह राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श करेंगे और संबंधित नियमों की समीक्षा करेंगे। जांच समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके आधिकारिक आवास पर नकदी मिलने के मामले में दोषी पाया है। बिरला ने यहां एक सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम नियमों को देखेंगे और उनकी जांच करेंगे।
आगे की कार्रवाई का फैसला करने से पहले हम राजनीतिक दलों के नेताओं से भी परामर्श करेंगे।’’ न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने अगस्त में संसद के दोनों सदनों में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। समिति ने कहा था कि न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ अघोषित नकदी, परेशान करने वाले साक्ष्य और टालमटोल भरे स्पष्टीकरण से जुड़े आरोप साबित हुए हैं। न्यायमूर्ति वर्मा ने इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कानून मंत्रालय ने अभी तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं की है।
उनका नाम अब भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सूची में है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के करीब 200 सांसदों ने संसद के माध्यम से उन्हें पद से हटाने की मांग की थी, जिसके बाद जांच समिति गठित की गई। न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर 14 मार्च 2025 की रात आग लग गई थी।
आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को कथित तौर पर एक भंडार कक्ष में जली हुई नकदी की बड़ी मात्रा मिली थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मार्च 2025 में मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।
समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा देने या महाभियोग की कार्रवाई का सामना करने को कहा था।
2 साल के विस्तार के बाद 75% Agniveer का क्या होगा, Pawan Khera ने पूछे सवाल
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने बुधवार को केंद्र सरकार के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें अग्निवीरों के कार्यकाल को दो साल और बढ़ाने की बात कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सरकार का यह कदम एक "यू-टर्न" है। साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यकाल पूरा होने के बाद इन अग्निवीरों का क्या होगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही अग्निपथ योजना का विरोध किया है। उनका तर्क है कि इससे सशस्त्र बलों के साथ-साथ युवाओं के भविष्य पर भी बुरा असर पड़ेगा। खेड़ा ने ANI से कहा, "हमने शुरू से ही अग्निवीर योजना का विरोध किया है। राहुल गांधी जी ने भी इसका विरोध किया था। यह योजना न केवल हमारे सशस्त्र बलों को, बल्कि देश के युवाओं को भी नुकसान पहुंचा रही है - दो साल और बीत जाने के बाद आप उन्हें बेरोजगार करके सड़कों पर छोड़ देंगे। हमने इसी बात को लेकर इसका विरोध किया है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार ने अपना रुख बदल लिया है, क्योंकि इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में चुनाव आ रहे हैं। इन राज्यों के बहुत सारे युवा सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहते हैं। इसलिए, डर के मारे सरकार ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया है। केंद्र की नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए - जिसके तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाएगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा - खेरा ने पूछा कि उन लोगों का क्या होगा जिन्हें इस विस्तार के बाद भी सेना में जगह नहीं मिलेगी? उन्होंने कहा, "वे कहते हैं कि वे 25 प्रतिशत को सेना में शामिल करेंगे और बाकी लोगों को दो साल का विस्तार देंगे। आप 25 प्रतिशत को तो शामिल कर लेंगे, लेकिन बाकी 75 प्रतिशत का क्या होगा? दो साल बाद, क्या वे फिर से सड़कों पर आ जाएंगे, या आप फिर से अपना रुख बदल लेंगे? जब आप बिना सोचे-समझे कोई योजना लाते हैं, तो उसका यही हश्र होता है।
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प्रस्तावित योजना के लिए कुल 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय तय किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इस योजना के तहत, चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र (critical mineral processing plants) स्थापित करने के लिए पात्र निवेश का 30% पूंजीगत सब्सिडी (capital subsidy) के रूप में दिया जाएगा। इनमें दो लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र (प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 kt) और दो निकेल प्रसंस्करण संयंत्र (प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 kt) शामिल होंगे। इसके तहत मिलने वाली अधिकतम पूंजीगत सहायता, लिथियम के लिए प्रति लाभार्थी 500 करोड़ रुपये और निकेल के लिए प्रति लाभार्थी 900 करोड़ रुपये तक सीमित होगी।
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