Jharkhand: झारखंड विधानसभा में बजट पर हुई चर्चा, पर्यटन-पर्यावरण और सड़क विकास पर सरकार का जोर
Jharkhand: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई. सरकार की ओर से बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है. कार्यक्रम के तहत अब तक 2.4 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 50 लाख पौधे लगाए गए हैं. इस वर्ष 3 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है.
पर्यटन और आधारभूत ढांचे को मिल रहा बढ़ावा
सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है. रजरप्पा मंदिर, पतरातू, नेतरहाट और चतरा के कोलेश्वरी पहाड़ जैसे पर्यटन स्थलों पर स्काई वॉक, रोप-वे और स्काई ब्रिज बनाने की योजना है. हुंडरू फॉल, जोनहा फॉल और अन्य जलप्रपातों पर भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. सरकार ने झारखंड के प्राचीन भूगर्भीय और ऐतिहासिक महत्व को भी उजागर किया. साहिबगंज के राजमहल फॉसिल पार्क में 10 से 14 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को दर्शाते हैं.
इसके अलावा राज्य में सड़क और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है. राज्य बनने के समय जहां सड़कों की कुल लंबाई 5400 किलोमीटर थी, वहीं अब यह बढ़कर 15,000 किलोमीटर हो गई है. सरकार ने इस बजट को शिक्षा, पर्यटन, पर्यावरण और युवाओं के रोजगार को बढ़ावा देने वाला बजट बताया और विपक्ष से इसे समर्थन देने की अपील की.
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फिटनेस ट्रेंड या सेहत के लिए खतरा 'इंटरमिटेंट फास्टिंग', महिलाओं के लिए हो सकता है जोखिम भरा
नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग वजन घटाने और फिट रहने के लिए नए-नए डाइट ट्रेंड्स को फॉलो करते हैं। इन्हीं में से एक है इंटरमिटेंट फास्टिंग, जिसे कई लोग चमत्कारी उपाय मानते हैं। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और जिम कल्चर ने इसे इतना लोकप्रिय बना दिया है कि लोग बिना पूरी जानकारी और डॉक्टर की सलाह के इसे अपनाने लगे हैं।
देखने में यह तरीका आसान लगता है, जिसमें कुछ घंटों तक खाना बंद कर दिया जाता है और बाकी समय मनचाहा भोजन किया जाता है। लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि हर शरीर एक जैसा नहीं होता और हर डाइट सभी के लिए सही नहीं हो सकती।
इंटरमिटेंट फास्टिंग पूरे शरीर को प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारा पाचन तंत्र, यानी अग्नि, एक तय समय पर भोजन मांगता है। लंबे समय तक भूखा रहना इस अग्नि को कमजोर कर सकता है, जिससे शरीर में वात दोष बढ़ता है। यही वजह है कि कई लोगों को इस डाइट के दौरान गैस, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। विज्ञान भी मानता है कि जब शरीर को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो वह तनाव की स्थिति में चला जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर सबसे पहले दिखाई देता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के कारण शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकता है। इससे व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट, और नींद न आने की शिकायत होने लगती है। कई लोग यह समझ ही नहीं पाते कि उनकी चिड़चिड़ाहट और मूड स्विंग्स की वजह उनकी डाइट है।
महिलाओं के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग और भी ज्यादा संवेदनशील विषय है। महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम पुरुषों की तुलना में ज्यादा नाजुक होता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि अनियमित भोजन से शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं रिसर्च भी बताती है कि लंबे समय तक फास्टिंग करने से महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, थायरॉयड की समस्या बढ़ सकती है और फर्टिलिटी पर भी असर पड़ सकता है। शुगर लेवल में बार-बार उतार-चढ़ाव हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक बड़ा नुकसान मांसपेशियों पर पड़ता है। अगर शरीर को समय पर पोषण न मिले, तो वह ऊर्जा मांसपेशियों को कमजोर करने लगती है। इससे शरीर बाहर से पतला तो दिखता है, लेकिन अंदर से काफी कमजोर हो जाता है। प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स जैसे जरूरी पोषक तत्व सीमित समय में पूरी मात्रा में लेना हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता।
डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, बुजुर्गों और ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के लिए यह डाइट खतरनाक साबित हो सकती है। इंटरमिटेंट फास्टिंग से ब्लड शुगर नीचे गिर सकता है, जिससे बेहोशी आ सकती है। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि किसी भी डाइट को फॉलो करने से पहले अपने शरीर को समझना बेहद जरूरी है।
--आईएएनएस
पीके/एएस
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