नीलम-झेलम का 'श्राप' या विकास का संकट? PoK में चीन के 42 हजार करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट से क्यों मचा बवाल
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Strait of Hormuz Control: होर्मुज पर होगा ईरान का कब्जा? कमर्शियल जहाजों से वसूलेगा 7% तक टोल!
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को लेकर एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच एक ऐसी डील को लेकर चर्चा चल रही है, जिसके तहत खाड़ी क्षेत्र में आने-जाने वाले जहाजों पर ईरान का नियंत्रण काफी हद तक बढ़ जाएगा। इस प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर करीब 7 प्रतिशत तक का शिपिंग चार्ज या टोल टैक्स लगाया जा सकता है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि दोनों दिशाओं में आवाजाही करने वाले जहाज ईरानी क्षेत्रीय जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे, जिससे ईरान को विधिवत शुल्क वसूलने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।
हर साल 100 अरब डॉलर से अधिक की कमाई का अनुमान, स्वेज नहर का रिकॉर्ड भी पीछे छूटेगा
आर्थिक विश्लेषकों और अनुमानों के अनुसार, यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कमर्शियल यातायात पर 7% टोल लगाने में सफल हो जाता है, तो वह हर दिन लगभग 385 मिलियन डॉलर यानी सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक की भारी-भरकम राशि अर्जित कर सकता है।
खास बात यह है कि यह आय दुनिया की कई दिग्गज टेक और ऊर्जा कंपनियों की शुद्ध आय के बराबर होगी और यह स्वेज नहर के अब तक के सबसे ज्यादा वार्षिक टोल राजस्व को भी पीछे छोड़ देगी। चूंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस प्रकार के किसी भी बदलाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों, बीमा कंपनियों और शिपिंग सेक्टर पर पड़ना तय है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भू-राजनीतिक तनाव पर असर
विभिन्न रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि जहां ईरान इस डील के तहत 5% से 7% तक शुल्क लगाने पर जोर दे रहा है, वहीं ओमान की तरफ से कथित तौर पर 3% का कम शुल्क प्रस्तावित किया गया है। हालांकि अभी तक इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में होर्मुज की रणनीतिक भूमिका ने इस प्रस्ताव पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकारी हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि यह डील अमलीजामा पहनती है, तो इससे अमेरिका और ईरान के रिश्तों के साथ-साथ क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव में और अधिक इजाफा हो सकता है।
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