Power Sector में 35 से बढ़कर 65 प्रतिशत हो जाएगा AI का उपयोग, संचालन क्षमता का बनेगा मुख्य आधार
देश के बिजली उत्पादन क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) का उपयोग वर्ष 2030 तक 35 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है और यह संचालन क्षमता का मुख्य आधार भी बन जाएगा। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। ‘द एनर्जी एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव सोसायटी’ (ईएनसीआईएस) के अध्ययन के मुताबिक, फिलहाल करीब 35 प्रतिशत बिजली उत्पादक कंपनियों ने अपने मुख्य परिचालन में एआई को अपनाया हुआ है और यह संख्या तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
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यह अध्ययन दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई में उपयोगिता और प्रौद्योगिकी कंपनियों के 250 पेशेवरों के बीच किया गया। इसमें शामिल करीब 70 प्रतिशत पेशेवरों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में दक्षता बढ़ाने के लिए बिजली उत्पादन क्षेत्र एआई के उपयोग का सबसे बड़ा अवसर प्रदान करेगा। रिपोर्ट कहती है कि देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ यह रुझान और मजबूत हो रहा है।
डेटा सेंटर की क्षमता 2025 के 1.5 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक सात गीगावाट होने का अनुमान है, जबकि केवल डेटा सेंटर से बिजली की मांग 2031-32 तक 13.56 गीगावाट तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अदाणी और रिलायंस जैसे बड़े समूह वर्ष 2035 तक एआई आधारित बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा में 210 अरब डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता जता चुके हैं, जो स्मार्ट और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। अध्ययन से पता चलता है कि एआई के उपयोग में भविष्यवाणी-आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन और सक्रिय रखरखाव सबसे अहम क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं।
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आधे से अधिक लोगों ने कहा कि इससे खराबी का पहले पता लगाने, बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं कम करने और उपकरणों की उम्र बढ़ाने में मदद मिलेगी। ईएनसीआईएस की ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल’ के मानद चेयरमैन भूपिंदर सिंह भल्ला ने कहा, “वर्ष 2030 तक निर्णायक फासला पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच नहीं, बल्कि सीखने वाली और केवल संचालन करने वाली परिसंपत्तियों के बीच होगा।” ईएनसीआईएस एक से तीन सितंबर तक राष्ट्रीय राजधानी में ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी, पावरजेन इंडिया और इंडियन यूटिलिटी वीक’ का आयोजन कर रहा है। इसमें 15,000 से अधिक पेशेवरों, 30 से ज्यादा देशों के करीब 250 प्रदर्शकों और 150 उद्योग विशेषज्ञों एवं नीति-निर्माताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
Tamil Nadu का 58,374 करोड़ का Agriculture Budget पेश, Super El Nino से निपटने की तैयारी
तमिलनाडु सरकार ने बृहस्पतिवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 58,374 करोड़ रुपये का कृषि बजट पेश किया। बजट में किसानों के लिए 17,000 करोड़ रुपये के फसली ऋण, मिट्टी की उर्वरता, दाल-तिलहन एवं कपास उत्पादन बढ़ाने के मिशन समेत कई नई योजनाओं की घोषणा की गई। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सुपर अल नीनो के कारण राज्य के 12 जिलों पर अधिक असर पड़ने की आशंका है, जिससे निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार का पहला कृषि बजट पेश करते हुए राज्य के कृषि मंत्री आर विनोद ने कहा कि यह बजट विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसे किसानों की आजीविका और कल्याण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वहीं, विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने बजट को किसानों के लिए निराशाजनक बताते हुए इसकी आलोचना की।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने भी बजट पर सवाल उठाए। मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में फसल उत्पादन के लिए किसानों की अल्पकालिक ऋण जरूरतों को पूरा करने के लिए 17,000 करोड़ रुपये का फसली ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि से जुड़े अन्य कार्यों, जैसे मधुमक्खी पालन, के लिए 3,000 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी ऋण सुविधा भी दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि पात्र किसानों के फसल ऋण माफी के लिए सरकार अब तक कुल 5,267 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। इसमें पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये, दूसरी किस्त में 3,000 करोड़ रुपये, तीसरी किस्त में 1,820 करोड़ रुपये और चौथी किस्त में 347 करोड़ रुपये शामिल हैं। सुपर अल नीनो का उल्लेख करते हुए विनोद ने कहा कि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की कार्ययोजना के आधार पर राज्य में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस मौसमी घटना के कारण पूरे देश में, विशेषकर कुरुवई फसल मौसम (जून-जुलाई और अगस्त की शुरुआत) के दौरान गंभीर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि राज्य के 12 जिलों के अधिक प्रभावित होने का अनुमान है। इसके मद्देनजर सभी जिलों के लिए तैयार कृषि आकस्मिक योजना जिलाधिकारियों को भेज दी गई है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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मंत्री ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पांच वर्षीय तमिलनाडु मृदा उर्वरता मिशन शुरू किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में इस मिशन के 10 घटकों पर 122.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए पांच वर्षों में 203.64 करोड़ रुपये की लागत से मिशन लागू किया जाएगा।
इसमें दालों के लिए 65.28 करोड़ रुपये और तिलहनों के लिए 138.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में तमिलनाडु मोटा अनाज (मिलेट) मिशन पर 63.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए 2026-27 से पांच वर्षीय कॉटन रेनेसां मिशन शुरू किया जाएगा।
पहले वर्ष में 27.21 करोड़ रुपये की लागत से 73,360 एकड़ क्षेत्र में इसे लागू किया जाएगा, जिससे 40,000 कपास किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की सभी योजनाएं और तकनीकी सलाह एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए आठ एकीकृत कृषि विस्तार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के निर्माण पर केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त निधि से 27.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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कटाई के बाद फसल को बारिश और धूप से बचाने के लिए वर्ष 2026-27 में 43,500 किसानों को तिरपाल वितरित किए जाएंगे, जिसके लिए राज्य सरकार 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बजट पेश किए जाने के दौरान मंत्री ने मुख्यमंत्री की प्रशंसा की, जिस पर द्रमुक सदस्यों ने आपत्ति जताई। विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने हस्तक्षेप कर मंत्री से कृषि बजट तक ही सीमित रहने को कहा।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन ने इसे पूरी तरह निराशाजनक बताया और आरोप लगाया कि सरकार किसानों से किए गए चुनावी वादे पूरे करने में विफल रही है। उन्होंने कावेरी और मेकेदातु मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाए जाने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
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