ट्रंप का बड़ा ऐलान, इजरायल को हर साल मिलने वाली 4 अरब डॉलर की आर्थिक मदद होगी बंद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि इस साल के अंत तक अमेरिका इजरायल को हर साल दी जाने वाली आर्थिक सहायता बंद कर देगा. ट्रंप के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ करीब 4 अरब डॉलर की सालाना मदद रोकने पर सहमति बनी है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इजरायल को हथियारों की बिक्री जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद भी करेगा. ट्रंप का यह फैसला दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सैन्य और आर्थिक संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है. खास बात यह है कि उन्होंने यह घोषणा अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी के बीच की है.
ट्रंप बोले- इजरायल को अब आर्थिक मदद की जरूरत नहीं
डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' में बातचीत के दौरान कहा कि इस साल के आखिर तक अमेरिका इजरायल को आर्थिक सहायता देना बंद कर देगा. उनका मानना है कि इजरायल अब आर्थिक रूप से इतना मजबूत हो चुका है कि उसे अमेरिकी वित्तीय मदद की जरूरत नहीं है. ट्रंप ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस मुद्दे पर सहमति बनी है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत दिसंबर तक इस सहायता को किस तरह समाप्त किया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि आर्थिक सहायता बंद होने का मतलब इजरायल से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं है. अमेरिका उसे हथियारों की बिक्री जारी रखेगा और किसी जरूरत या संकट के समय उसका साथ भी देगा.
सितंबर 2028 तक लागू है अमेरिका-इजरायल का समझौता
अमेरिका और इजरायल के बीच मौजूदा सैन्य सहायता समझौता सितंबर 2028 तक लागू है. इसके तहत अमेरिका हर साल इजरायल को करीब 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता देता है. यह मदद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का अहम हिस्सा रही है. ट्रंप के ताजा बयान ने इस समझौते के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर इसलिए क्योंकि मौजूदा समझौते की अवधि पूरी होने से पहले ही सहायता बंद करने की बात कही गई है. हालांकि, इस संबंध में आगे की प्रक्रिया और आधिकारिक व्यवस्था को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
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इजरायल को अमेरिकी मदद पर बढ़ रही नाराजगी
अमेरिका में इजरायल को दी जाने वाली सहायता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हुई है. गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेता लगातार सवाल उठाते रहे हैं. वहीं, अमेरिकी नागरिकों के बीच भी इजरायल को समर्थन देने की नीति को लेकर असहमति बढ़ी है. जून में क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए एक सर्वे में 48 प्रतिशत अमेरिकी मतदाताओं और 66 प्रतिशत डेमोक्रेट्स ने माना था कि अमेरिका इजरायल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि इजरायल को अमेरिकी मदद देने का मुद्दा अब घरेलू राजनीति में भी अहम बन गया है.
मध्यावधि चुनाव के बीच ट्रंप के फैसले के क्या हैं मायने?
ट्रंप का यह ऐलान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है. उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है. इजरायल को दी जाने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी राजनीतिक बहस का विषय रही है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि सहायता बंद करने के फैसले से उन डेमोक्रेट नेताओं की आलोचना कमजोर पड़ सकती है, जो इजरायल को अमेरिकी मदद देने का विरोध करते हैं.
इस तरह ट्रंप का फैसला सिर्फ अमेरिका-इजरायल संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है. अब देखना होगा कि इस घोषणा को लागू करने के लिए अमेरिकी प्रशासन क्या कदम उठाता है और इससे दोनों देशों के रिश्तों पर कितना असर पड़ता है.
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