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Breakout और Breakdown क्या हैं, जानें ट्रेडिंग में इनका क्या है मतलब?

Share Market में ट्रेडिंग करते समय आपने शायद शेयर की कीमतों का अंदाजा लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग टेक्निकल एनालिसिस कॉन्सेप्ट्स के बारे में सुना होगा. अगर आप स्टॉक मार्केट में नए हैं, तो आपको इस आर्टिकल में Breakout और Breakdown के बारे में जानकारी मिल रही है. ये ऐसे कॉन्सेप्ट्स हैं, जो आपकी ट्रेडिंग गतिविधियों के लिए बहुत काम के साबित हो सकते हैं. ट्रेडर्स अक्सर किसी स्टॉक की कीमत की संभावित दिशा और ट्रेंड को समझने के लिए ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, सिर्फ ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के आधार पर ट्रेडिंग का फैसला लेना सही नहीं है. इसलिए, इन कॉन्सेप्ट्स की पूरी समझ होना जरूरी है, जैसा कि यहां बताया गया है.

Breakout क्या होता है?

जब किसी स्टॉक की कीमत एक अहम रेजिस्टेंस लेवल से ऊपर जाती है, तो इसे ब्रेकआउट कहा जाता है. रेजिस्टेंस वह लेवल है जहां स्टॉक की कीमत बार-बार ऊपर जाने में मुश्किल का सामना करती है. इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं. मान लीजिए कि किसी स्टॉक की कीमत बार-बार ₹500 तक पहुंचती है लेकिन हर बार किसी वजह से नीचे गिर जाती है तो ऐसे में, ₹500 उसका रेजिस्टेंस लेवल होगा. हालांकि, अगर जबरदस्त खरीदारी की वजह से स्टॉक ₹500 के लेवल को तोड़कर ऊपर चला जाता है, तो इसे ब्रेकआउट माना जा सकता है. ऐसी स्थिति को बुलिश सिग्नल माना जाता है.

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Breakdown क्या होता है?

आसान शब्दों में कहें तो, ब्रेकडाउन, ब्रेकआउट का उल्टा होता है. ब्रेकडाउन तब होता है जब किसी स्टॉक की कीमत एक अहम सपोर्ट लेवल से नीचे गिर जाती है. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए कि कोई स्टॉक बार-बार ₹400 के आसपास तक गिरता है और फिर वापस ऊपर आ जाता है तो ऐसे में, ₹400 उसका सपोर्ट लेवल बन जाता है. अगर इसके बाद स्टॉक ₹400 से नीचे गिर जाता है और वहीं बना रहता है, तो इसे ब्रेकडाउन माना जाता है. ब्रेकडाउन को गिरावट का संकेत माना जाता है.

Breakout की पहचान कैसे करें?

ब्रेकआउट की पहचान करने के कई संकेत होते हैं. उदाहरण के लिए जाने तो आपको ट्रेडिंग वॉल्यूम पर ध्यान देना चाहिए. जब ​​कोई स्टॉक ऊपर जाता है और रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ता है, तो इसे बाजार में खरीदारी के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है. कई ट्रेडर्स सिर्फ इंट्राडे प्राइस के रेजिस्टेंस लेवल को पार करने से आगे बढ़कर यह भी देखते हैं कि क्या स्टॉक असल में उस स्तर के ऊपर बंद होता है. आपको भी क्लोजिंग प्राइस पर विचार करना चाहिए. कभी-कभी स्टॉक वापस उस पिछले रेजिस्टेंस लेवल के आस-पास आ जाता है इसलिए ऐसी स्थितियों में आपको रीटेस्ट पर भी नजर रखनी चाहिए.

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False Breakout क्या होता है?

अक्सर कोई स्टॉक रेजिस्टेंस लेवल से ऊपर तो जाता है लेकिन कुछ समय बाद वापस उसके नीचे आ जाता है इसे False Breakout या Fakeout कहा जाता है. इसी तरह कोई स्टॉक सपोर्ट लेवल से नीचे गिर सकता है और तुरंत वापस ऊपर आ सकता है, जिससे ब्रेकडाउन फ़ॉल्स साबित होता है. इसी वजह से कुछ ट्रेडर्स किसी प्राइस लेवल के टूटने पर तुरंत ट्रेड करने के बजाय कन्फर्मेशन का इंतजार करना पसंद करते हैं.

क्या केवल Breakout देखकर ट्रेड करना चाहिए?

नहीं, एक समझदार निवेशक कभी भी सिर्फ ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के आधार पर ट्रेडिंग का जोखिम नहीं उठाता है. वे पुष्टि के लिए अन्य टेक्निकल इंडिकेटर्स जैसे वॉल्यूम, RSI, MACD, मूविंग एवरेज, कैंडलस्टिक पैटर्न और प्राइस एक्शन का भी इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा, वे स्टॉप-लॉस रणनीतियों और रिस्क मैनेजमेंट पर भी पूरा ध्यान देते हैं.

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डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.

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