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Closing Bell: डे-लो से सेंसेक्स ने लगाई 1200 अंकों की छलांग, निफ्टी दोबारा 24 हजार के पार; क्यों बाजार में रिकवरी आई?

Closing Bell: शेयर बाजार में सोमवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत में बड़ी गिरावट के बाद बाजार ने आखिरी घंटों में जोरदार वापसी की। कारोबार के दौरान सेंसेक्स अपने निचले स्तर से करीब 1200 अंक उछल गया जबकि निफ्टी ने फिर से मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 24000 का स्तर हासिल कर लिया।

दोपहर करीब 3:04 बजे सेंसेक्स 1267.58 अंक यानी 1.61% गिरकर 77651.32 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 399.50 अंक यानी 1.63% टूटकर 24050.95 पर था। बाजार में कुल 781 शेयरों में तेजी आई जबकि 3248 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। 123 शेयरों में कोई बदलाव नहीं दिखा। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर 76424.55 और निफ्टी का 23697.8 रहा। लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से दोनों सूचकांकों में रिकवरी देखने को मिली।

इन शेयरों ने दी बाजार को ताकत
निफ्टी-50 में सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल, मैक्स हेल्थकेयर, इंफोसिस, सिप्ला और विप्रो जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन शेयरों ने बाजार को गिरावट से उबरने में सहारा दिया। हालांकि दूसरी तरफ बैंकिंग सेक्टर में भारी दबाव बना रहा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया निफ्टी का सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा और इसमें 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा श्रीराम फाइनेंस, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व जैसे शेयर 2% से 4% तक टूटे।

ऑटो सेक्टर में भी दबाव
ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, आयशर मोटर्स और बजाज ऑटो के शेयरों में 4% से 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं व्यापक बाजार भी लाल निशान में बंद होता दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 3% गिरा, जिसमें भारत फोर्ज के शेयर 5% तक टूट गए। निफ्टी मिडकैप 150 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर 6% से ज्यादा गिरने से दबाव बना।

PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी इंडेक्स लाल निशान में रहे। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 5% गिर गया। इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक के शेयर 5% से 6% तक टूटे।

बाजार की वापसी के पीछे ये बड़े कारण
कच्चे तेल की कीमतों में राहत:
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट आई। अमेरिकी तेल की कीमतें कुछ ही घंटों में 15 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गईं और यह 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। खबरें हैं कि जी-7 देश करीब 300 से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल रणनीतिक भंडार से जारी करने पर विचार कर रहे हैं। इससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

हाल के दिनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। ब्रेंट क्रूड एक समय 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

आईटी और फार्मा सेक्टर ने संभाला मोर्चा: तेल की कीमतों के दबाव के बीच आईटी और फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स हरे निशान में रहा और एलटीआईमाइंडट्री, विप्रो और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में करीब 1% की तेजी आई। इसके अलावा कमजोर रुपये ने भी आईटी कंपनियों को सहारा दिया, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा डॉलर में होता है।

इस बीच भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.76% हो गई।
(प्रियंका कुमारी)

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Home Loan Tips: लोन लेते समय 'को-एप्लिकेंट' और 'को-बॉरोअर' में क्या फर्क है? जानिए पूरी सच्चाई

Home Loan Tips: अगर आपने कभी होम लोन या बड़ा पर्सनल लोन लेने की कोशिश की है, तो बैंक ने शायद आपको किसी और व्यक्ति को भी आवेदन में जोड़ने की सलाह दी होगी। कई बार यह जीवनसाथी होता है, कभी माता-पिता और कभी कमाने वाला बेटा या बेटी।

इसकी वजह सीधी है। बैंक तब ज्यादा सहज महसूस करते हैं जब लोन के पीछे एक से ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी हो। दो लोगों की आय होने से लोन चुकाने की क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही अगर दूसरे व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी हो, तो बैंक को लोन देना और सुरक्षित लगता है।

यहीं से दो शब्द अक्सर सामने आते हैं- को-एप्लिकेंट (Co-applicant) और को-बॉरोअर (Co-borrower)। बहुत से लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनके बीच एक अहम फर्क होता है।

को-बॉरोअर: लोन की पूरी जिम्मेदारी
को-बॉरोअर वह शख्स होता है जो आपके साथ मिलकर लोन लेता है। इसका मतलब है कि लोन चुकाने की जिम्मेदारी दोनों की बराबर होती है। अगर किसी वजह से ईएमआई नहीं चुकाई जाती, तो बैंक दोनों में से किसी से भी पैसा वसूल सकता है। बैंक के लिए 'मुख्य उधारकर्ता' और 'को-बॉरोअर' के बीच ज्यादा फर्क नहीं होता।

होम लोन में यह व्यवस्था सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। उदाहरण के तौर पर पति-पत्नी मिलकर होम लोन लेते हैं। दोनों की आय जोड़कर बैंक लोन की पात्रता तय करता है और दोनों ही ईएमआई के लिए जिम्मेदार होते हैं। कई मामलों में दोनों ही घर के सह-मालिक भी बनते हैं। इसलिए अगर आप किसी के को-बॉरोअर बनते हैं, तो सिर्फ उसकी मदद नहीं कर रहे होते, बल्कि लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी भी ले रहे होते हैं।

को-एप्लिकेंट: आवेदन में साथ, जिम्मेदारी अलग हो सकती
को-एप्लिकेंट का मतलब थोड़ा अलग हो सकता है। अलग-अलग बैंक इसे अलग तरीके से इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में को-एप्लिकेंट वह व्यक्ति होता है जिसकी आय या वित्तीय स्थिति को लोन मंजूरी के समय ध्यान में रखा जाता है। उदाहरण के लिए, कोई युवा अपना पहला घर खरीद रहा है तो वह अपने माता-पिता को को-एप्लिकेंट बना सकता है, ताकि बैंक ज्यादा भरोसे के साथ लोन दे सके। हालांकि व्यवहार में कई बार लोन मंजूर होने के बाद को-एप्लिकेंट भी ईएमआई की जिम्मेदारी साझा करने लगता है। असली स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि लोन एग्रीमेंट में क्या लिखा है।

लोग को-एप्लिकेंट क्यों जोड़ते हैं?
लोन में दूसरे व्यक्ति को जोड़ने का सबसे बड़ा कारण लोन की पात्रता बढ़ाना होता है। जब दो लोगों की आय गिनी जाती है, तो बैंक ज्यादा रकम का लोन मंजूर कर सकता है। दूसरा कारण मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल है। अगर एक व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री बेहतर है, तो बैंक का भरोसा बढ़ता है। होम लोन के मामले में एक और फायदा मिलता है कि अगर दोनों व्यक्ति घर के सह-मालिक हैं, तो वे टैक्स में भी अलग-अलग लाभ ले सकते हैं।

किसी का को-एप्लिकेंट या को-बॉरोअर बनने से पहले एक सवाल जरूर पूछना चाहिए कि अगर ईएमआई बंद हो जाए तो क्या होगा? अगर एग्रीमेंट में संयुक्त जिम्मेदारी लिखी है, तो बैंक आपसे भी पूरी रकम वसूल सकता है, चाहे लोन आपने इस्तेमाल किया हो या नहीं। इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि बैंक के दिए गए नामों पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें और समझें कि आपकी जिम्मेदारी क्या है।

(प्रियंका कुमारी)

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