Health Tips: बच्चे बारिश में भीगकर आएं तो तुरंत करें ये काम, डॉक्टर बोले- छोटी लापरवाही बन सकती है बीमारी की वजह
Rainy Season Child Health Tips: बारिश का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा लेकर आता है, जिसमें सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं. इस मौसम में वायरल इंफेक्शन, डेंगू, चिकनगुनिया और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सिंह ने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं. उन्होंने बारिश में भीगने के बाद गुनगुने पानी से नहलाने, आसपास पानी जमा न होने देने और खान-पान में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है.
गणेश जी और चंद्रमा का श्राप: जानिए क्यों गणेश चतुर्थी पर चांद देखना माना जाता है अशुभ
Lord Ganesha moon curse story: एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने प्रिय मोदक (लड्डू) खाकर अपने वाहन मूषक (चूहा) पर सवार होकर कैलाश की ओर जा रहे थे। रास्ते में एक भारी सांप (सर्प) अचानक सामने आ गया, जिसे देखकर मूषक डर गया और असंतुलित होकर भागने लगा।
मूषक के अचानक हिलने-डुलने के कारण गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर पड़े। उनके गिरते ही उनका पेट फट गया और उन्होंने जो मोदक खाए थे, वे बाहर बिखर गए। गणेश जी ने बड़ी फुर्ती से उन मोदकों को उठाया और वापस अपने पेट में रखकर पेट को उसी सांप से बांध लिया।
चंद्रमा का उपहास और गणेश जी का क्रोध
यह पूरी घटना आकाश से चंद्रमा देवता देख रहे थे। चंद्रमा को अपनी सुंदरता, कुल और कलाओं पर बहुत अधिक अहंकार था। गणेश जी के इस अनोखे रूप (मोटा शरीर, हाथी का मुख और सांप से बंधा पेट) को देखकर चंद्रमा खुद को रोक नहीं पाया और जोर-जोर से हंसने लगा।
चंद्रमा ने उपहास उड़ाते हुए गणेश जी के रूप का मजाक उड़ाया। अपने भोले स्वभाव के बावजूद इस प्रकार का अपमान और उपहास देखकर भगवान गणेश अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने तत्काल चंद्रमा को अपनी सुंदरता पर घमंड करते हुए देखा और श्राप दिया, "तू अपनी इस सुंदरता और कला पर बहुत गर्व करता है, जा! आज से तू काला हो जाएगा और जो कोई भी तुझे देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा।"
चंद्रमा की क्षमायाचना और श्राप का निवारण
गणेश जी के श्राप मिलते ही चंद्रमा का तेज तुरंत समाप्त हो गया और वे पूरी तरह काले और क्षीण हो गए। चंद्रमा के बिना ब्रह्मांड का संतुलन बिगड़ने लगा, तब सभी देवताओं और स्वयं चंद्रमा ने अत्यंत लज्जित होकर गणेश जी की शरण ली और क्षमा की भीख मांगी।
चंद्रमा के विनम्र निवेदन और पश्चाताप को देखकर गणेश जी का गुस्सा शांत हुआ। उन्होंने श्राप को पूरी तरह वापस तो नहीं लिया, लेकिन उसका निवारण अवश्य कर दिया। गणेश जी ने कहा कि चंद्रमा का यह कालापन हमेशा के लिए नहीं रहेगा, बल्कि कृष्ण पक्ष में यह धीरे-धीरे घटेगा और शुक्ल पक्ष में पुनः बढेगा (चंद्र कलाएं)। साथ ही यह भी तय हुआ कि गणेश चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति गलती से चांद को देख लेगा, उसे समाज में झूठे कलंक या आरोपों का सामना करना पड़ेगा, जिसका निवारण गणेश जी की पूजा और कथा सुनने से हो जाएगा।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पुराणों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक पौराणिक कथाओं के माध्यम से अहंकार के त्याग और विनम्रता का संदेश पहुंचाना है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
Haribhoomi









