रिश्वतखोरी के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व शाखा प्रबंधक को 4 साल की कैद, 30 हजार रुपये का जुर्माना
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत, लखनऊ ने बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व शाखा प्रबंधक सुबोध कुमार रस्तोगी को चार साल की कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने 2 नवंबर 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया.
सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 26 अक्टूबर 2015 को दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे सोलर लाइट का कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की बलरामपुर शाखा से 5 लाख रुपये का ऋण मंजूर हुआ था. उस समय शाखा प्रबंधक सुबोध कुमार रस्तोगी ने 1.25 लाख रुपये का टर्म लोन जारी करते हुए सीए चार्ज, स्टांप पेपर और फाइल चार्ज के नाम पर शिकायतकर्ता से करीब 25 हजार रुपये ले लिए थे.
इसके बाद शिकायतकर्ता के खाते में 3.75 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट भी जारी की गई. आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने शिकायतकर्ता से इसके एवज में 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी. उसने रिश्वत नहीं देने पर बैंक खाता बंद करने की धमकी भी दी थी.
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुबोध कुमार रस्तोगी को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया.
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 18 दिसंबर 2015 को आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए चार साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
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