'मैं 62 साल का हूं, थोड़ी नरमी बरतें' रेप मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद तरुण ने खुद को बताया पीड़ित
Tarun Tejpal: बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने एक अहम फैसले में तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के एक बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया है. यह मामला उनकी एक पूर्व कनिष्ठ (जूनियर) महिला सहयोगी द्वारा दर्ज कराया गया था.
खुद को पीड़ित बता रहे हैं तेजपाल
दोषी ठहराए जाने के बाद 62 वर्षीय तरुण तेजपाल ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है. अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह 62 साल के हैं और उन्हें लगता है कि वह खुद एक पीड़ित हैं. उन्होंने अपने परिवार और पत्नी का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास कहने को ज्यादा कुछ नहीं है और वे इस फैसले के खिलाफ सिर्फ अपील करेंगे. तेजपाल ने अदालत से अपने प्रति नरमी बरतने की गुहार लगाते हुए कहा कि बाकी सारे तथ्य पहले ही रिकॉर्ड में मौजूद हैं. इस मामले में तेजपाल के बयानों में लगातार बदलाव देखने को मिला है. आरोप लगने के तुरंत बाद तेजपाल ने इसे परिस्थितियों को गलत समझने का नतीजा बताते हुए खेद जताया था. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया और खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताने लगे. कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब जज ने उनके पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में पूछा, तो तेजपाल के वकील ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई अन्य एफआईआर या दुर्व्यवहार का मामला दर्ज नहीं है.
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2013 का है, जब तरुण तेजपाल और उनकी पूर्व महिला सहयोगी गोवा में एक इवेंट में शामिल होने गए थे. पीड़िता का आरोप है कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान, तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उसका यौन उत्पीड़न किया था. इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई 2017 में गोवा के मापुसा स्थित ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई थी. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, साल 2021 में ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल को आरोपों से बरी कर दिया था. राज्य सरकार ने निचली अदालत के इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और इसे बॉम्बे हाई कोर्ट (गोवा बेंच) में चुनौती दी. इसी अपील पर लंबी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अब तेजपाल को दोषी पाया है.
"ना का मतलब सिर्फ 'ना' होता है"
इस मामले में सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से तेजपाल के लिए अधिकतम सजा की मांग की है. उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़िता लगभग तेजपाल की बेटी की उम्र की है. मेहता ने दलील दी कि पीड़िता के बार-बार विरोध करने और मना करने के बावजूद, तेजपाल ने लगातार दो दिनों तक इस अपराध को अंजाम दिया. सॉलिसिटर जनरल ने जोर देकर कहा कि अदालत को समाज में यह बेहद स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि जब कोई महिला किसी कृत्य के लिए 'ना' (No) कहती है, तो उसका सीधा और एकमात्र अर्थ सिर्फ 'ना' ही होता है.
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