मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर भड़के अमेरिकी सीनेटर, बोले- पिता की तरह ही होगा अंजाम
वाशिंगटन, 9 मार्च (आईएएनएस)। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर चुना गया है। अमेरिकी सीनेटरों ने मोजतबा की ईरान के सुप्रीम लीडर के तौर पर नियुक्ति को लेकर जमकर आलोचना की। सीनेटरों का कहना है कि मोजतबा को सुप्रीम लीडर चुना जाना ईरान में वह बदलाव नहीं है, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम का कहना है कि ईरान का मारे गए अली खामेनेई के बेटे को उनकी जगह चुनना वह बदलाव नहीं है जिसकी हम उम्मीद कर रहे हैं। दक्षिण कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मेरा मानना है कि यह बस कुछ ही समय की बात है जब उनका भी वही हश्र होगा जो उनके पिता का हुआ था।
ग्राहम लंबे समय से ईरान पर हमले करने की वकालत करते रहे हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की पिछले हफ्ते आई रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को यह भी सलाह दी थी कि ट्रंप को कार्रवाई के लिए कैसे राजी किया जाए।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। हालांकि, द टाइम्स ऑफ इजरायल के साथ एक छोटे से टेलीफोन इंटरव्यू में उन्होंने ईरान के खिलाफ हमले रोकने को लेकर बड़ा बयान दिया है।
द टाइम्स ऑफ इजरायल ने जब उनसे पूछा कि ईरान के खिलाफ हमले कब खत्म करेंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह इजरायल के साथ मिलकर तय करेंगे कि ईरान के साथ युद्ध कब खत्म करना है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस फैसले का हिस्सा होंगे, लेकिन आखिरी फैसला वाशिंगटन का होगा।
ट्रंप ने इजरायली मीडिया से कहा, “हम बात कर रहे हैं। मैं सही समय पर फैसला लूंगा, लेकिन हर बात का ध्यान रखा जाएगा।” इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका के हमले रोकने के फैसले के बाद इजरायल युद्ध जारी रख सकता है, तो ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इसकी जरूरत होगी।”
सीआईए के पूर्व डायरेक्टर डेविड पेट्रियस ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर के तौर पर मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से कहा, “हम मानते हैं कि वह अपने पिता की तरह ही रहेंगे, जो बहुत कट्टर विचारधारा वाले मौलवी थे। मुझे नहीं लगता कि वह अयातुल्लाह भी हैं, जब तक कि उन्हें हाल ही में प्रमोट न किया गया हो। कई दशक पहले जब उनके पिता को चुना गया था, तब वह भी इतने मशहूर नहीं थे।”
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बुधवार को चेतावनी दी कि ईरान जिस भी नेता को “इजरायल को खत्म करने” के लिए चुनेगा, वह निश्चित ही हत्या का टारगेट होगा, चाहे उसका नाम कुछ भी हो या वह कहीं भी छिपा हो।
नेसेट (इजरायली संसद) के स्पीकर आमिर ओहाना ने भी यही बात दोहराई और कहा कि इंसान बदलने से सरकार की प्रकृति नहीं बदलती और इजरायल “नए नेतृत्व से उसी तरह निपटेगा।
इजरायली अधिकारियों की ओर से जारी इस बयान के बाद एक बात तो साफ है कि मोजतबा खामेनेई का अंजाम वही होगा, जो उनके पिता का हुआ था।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
क्या आप भी योग और मेडिटेशन को एक ही समझते हैं? अभी दूर करें कंफ्यूजन
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। अक्सर जब भी लोग योग की बात करते हैं तो उनके दिमाग में सबसे पहले मेडिटेशन (ध्यान) का ख्याल आता है। कुछ लोग तो यह भी मान लेते हैं कि योग और मेडिटेशन एक ही चीज हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। योग और मेडिटेशन आपस में जुड़े जरूर हैं, लेकिन दोनों बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं। अगर आप भी अब तक इन्हें एक ही समझते रहे हैं, तो आज इस कंफ्यूजन को दूर कर लेते हैं।
दरअसल, योग एक बहुत व्यापक और प्राचीन भारतीय पद्धति है, जिसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाना है। योग केवल कुछ आसनों या ध्यान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई तरह की प्रक्रियाएं और अभ्यास शामिल होते हैं। योग के अंतर्गत नैतिक नियम, योगासन, श्वास को नियंत्रित करने की तकनीक, मन को शांत करने के अभ्यास और मेडिटेशन भी शामिल होता है। आसान शब्दों में कहें तो मेडिटेशन योग का एक हिस्सा है।
जब लोग योग करते हैं तो वे अक्सर सबसे पहले योगासन करते हैं। ये वे शारीरिक मुद्राएं होती हैं जो शरीर को लचीला, मजबूत और स्वस्थ बनाने में मदद करती हैं। इसके बाद प्राणायाम किया जाता है, जिसमें सांस लेने और छोड़ने की विशेष तकनीकों का अभ्यास किया जाता है। इससे शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और मन भी शांत होता है।
वहीं, मेडिटेशन का मतलब होता है अपने मन को एक जगह केंद्रित करना और भीतर की शांति को महसूस करना। इसमें व्यक्ति अपनी सांस, किसी मंत्र, किसी विचार या सिर्फ अपनी चेतना पर ध्यान केंद्रित करता है। मेडिटेशन से मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मन को गहरी शांति मिलती है। यही वजह है कि आजकल कई लोग बिना योग किए भी सिर्फ मेडिटेशन का अभ्यास करते हैं।
हालांकि अगर योग को पूरी तरह से समझा जाए तो यह केवल शरीर को फिट रखने का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली भी है। योग हमें अनुशासन, संतुलन और सकारात्मक सोच सिखाता है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत रहता है और जीवन के प्रति दृष्टिकोण भी सकारात्मक बनता है। वहीं मेडिटेशन इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें अंदर से मजबूत बनाता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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