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सिर्फ तोहफा नहीं, यादें दें! भाई-बहन के लिए बजट-फ्रेंडली और ट्रेंडी गिफ्ट्स रक्षा बंधन पर

रक्षा बंधन पर गिफ्ट चुनते समय कीमत नहीं, भावनाएं मायने रखती है। भाई-बहन की पसंद और जरूरत के हिसाब से दिया गया गिफ्ट, गैजेट, फैशन आइटम इस त्योहार को खास बना सकता है। इस त्यौहार पर अपने भाई-बहन को सही गिफ्ट देकर अपने रिश्ते की मिठास और प्यार को और गहरा कर सकते हैं।

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सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

कोलकाता में जन्मीं एक्ट्रेस सुष्मिता मुखर्जी ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें मजबूरी में सी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा था। फिलहाल 'जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती अनोखी' सीरियल में नजर आ रहीं सुष्मिता ने एक इमोशनल वीडियो में अपने संघर्षों पर खुलकर बात की है। मजबूरी में लिए थे गलत फैसले सुष्मिता ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा कि उन फिल्मों में काम करना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था, जो महिलाओं का अपमान करती थीं। उन्होंने कहा, 'भगवान का शुक्र है कि मैंने सिर्फ खराब फिल्में चुनी थीं, पोर्नोग्राफी नहीं की। क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? हां, मैंने अपनी आत्मा बेच दी। मुझे तब भी अच्छा नहीं लगा था और अब भी नहीं लगता, लेकिन यह मेरी मजबूरी थी।' 2002 में दिवालिया हो गई थी प्रोडक्शन कंपनी एक्ट्रेस ने बताया कि 1983 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पासआउट होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें ये फैसले लेने पड़े। साल 2002 में सुष्मिता और उनके पति की मीडिया कंपनी 'प्रयास प्रोडक्शन' पर एक करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। उस समय टेक्नोलॉजी के नए दौर और एंजेल इन्वेस्टमेंट की जानकारी न होने के कारण उनकी कंपनी के साथ-साथ ट्रैक सिनेमा और अनिल चौधरी प्रोडक्शन भी दिवालिया हो गए थे। रिकवरी वाले घर आकर देते थे गालियां सुष्मिता ने बताया कि वह समय बहुत बुरा था। कर्ज देने वाले और रिकवरी एजेंट उनके घर आते थे और गालियां देते थे। उस वक्त उनके बच्चे बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें कर्ज चुकाने के लिए हर तरह का काम करना पड़ा। उन्होंने और उनके पति ने तीन-चार साल तक कड़ी मेहनत की ताकि वे एक करोड़ का कर्ज चुका सकें। बेटी की पढ़ाई के लिए भी थी पैसों की जरूरत आर्थिक दबाव का एक बड़ा कारण उनकी बेटी की पढ़ाई भी थी। सुष्मिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए उन्होंने उसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजने का फैसला किया। हालांकि उनके पति इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को विदेश भेजा। उसकी पढ़ाई काफी महंगी थी, जिसके लिए उन्हें लगातार पैसे कमाने थे। फैसलों पर नहीं है कोई पछतावा सुष्मिता ने 1978 में फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा से शादी की थी, जिससे बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 1993 में उन्होंने एक्टर और राजनेता राजा बुंदेला से दूसरी शादी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और वे आज अपने पैरों पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब वह वही काम करती हैं जो उनके दिल को छूता है। उन्हें अब सम्मान भी मिलता है और वह अपनी कमाई से खुश हैं।

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  Sports

ये गोल्ड मेडल हमारा है, हमें इसे जीतना है... मैट के बाहर से कोच की ललकार, अस्मिता डे ने बताई इतिहास रचने की इनसाइड स्टोरी

Asmita Dey Exclusive: कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाकर अस्मिता डे ने नया इतिहास रच दिया. अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उन्होंने अपने कोच यशवंत सोलंकी के प्रेरणादायक शब्दों को दिया. एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अस्मिता ने बताया कि जब वह फाइनल मुकाबले में खेल रही थीं, तब मैट के बाहर से उनके कोच यशपाल सोलंकी ने कहा, 'ये गोल्ड मेडल हमारा है और इसे जीतना है.' कोच की इसी ललकार ने उनमें नया जोश भर दिया और उन्होंने इतिहास रच दिया. Thu, 6 Aug 2026 23:05:47 +0530

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