Rahul Gandhi संसद से भाग रहे हैं, BJP नेता Tarun Chugh बोले- कांग्रेस के पास तर्क नहीं
नयी दिल्ली, छह अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि वे ‘संकीर्ण राजनीति’ कर रहे हैं और सदन में चर्चा से भाग रहे हैं। यह टिप्पणी तब आई जब कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने प्रयागराज के केपी मैदान में आठ अगस्त को प्रस्तावित राहुल के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी। ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश और कार्यक्रम स्थल पर जलभराव का हवाला दिया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता को इस कार्यक्रम में छात्रों से प्रश्नपत्र लीक और उनसे जुड़े अन्य मुद्दों पर बातचीत करनी थी। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि राहुल गांधी संसद से बच रहे हैं। उन्होंने सदन में चर्चा के लिए तैयार न होने पर राहुल को ‘मानसिक रूप से दिवालिया’ बताया।
चुघ ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘‘जब संसद का सत्र चल रहा है, तो आप संकीर्ण राजनीति के लिए देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। आप सदन में आकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर चर्चा में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे पता चलता है कि आप मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं।’’ भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चर्चा से भाग रही है क्योंकि उसके पास ‘‘न तो मुद्दे हैं और न ही तर्क’’।
उन्होंने दावा किया कि अगर चर्चा होती है तो कांग्रेस के ‘‘झूठ और गुमराह करने वाले विमर्श’’ का पर्दाफाश हो जाएगा। चुघ ने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को ‘‘हाईजैक’’ करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के पास झारखंड के छात्रों के लिए भी समय नहीं है।
चुघ ने कहा, ‘‘छात्र संघर्ष कर रहे हैं और मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के तथाकथित बुद्धिजीवी नेता और कम समझदारी वाले राहुल गांधी के पास उनकी पीड़ा और तकलीफ को सुनने या समझने के लिए एक मिनट भी नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश देख रहा है कि कांग्रेस छात्रों के नाम पर राजनीतिक फायदा उठाने के लिए हरसंभव हथकंडा अपनाती है। वह बसों में भरकर आकर विरोध प्रदर्शन को हाईजैक करने की भी कोशिश करती है।
फिर भी उसके पास झारखंड के छात्रों के लिए समय नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी के दोहरे चरित्र और दोहरे मापदंडों को दिखाता है।
इंदौर ‘पॉकेट गवाह’ मामले में सख्त कार्रवाई, खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमोशन, तीन साल के लिए बने सब-इंस्पेक्टर
इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में चर्चित ‘पॉकेट गवाह’ मामले में गुरुवार को एक बड़ी विभागीय कार्रवाई हुई है। खजराना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। जिसके बाद इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बड़ा फैसला लिया है। पॉकेट गवाह मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमोशन कर उन्हें सब-इंस्पेक्टर (एसआई) बना दिया गया है। यह डिमोशन अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
बता दें कि दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में थाना प्रभारी पद पर पदस्थ रहे। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि खजराना थाने में दर्ज अनेक मामलों की कार्रवाई के दौरान बार-बार दो व्यक्तियों को पंच और गवाह बनाया गया। जांच में पता चला कि इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को 742 मामलों में गवाह बनाया गया जबकि नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को 504 मामलों में गवाह के रूप में शामिल किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि हत्या, लूट और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में भी लगातार इन्हीं तथाकथित ‘पॉकेट गवाहों’ का उपयोग किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
दिनेश वर्मा से मांगा गया था स्पष्टीकरण, नहीं दिया कोई जवाब
जानकारी अनुसार, मामले में पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया था लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया था। जिस कारण दिनेश वर्मा को तीन साल के लिए थाना प्रभारी पद से डिमोट कर उनको सब इंस्पेक्टर बनाया गया है।
इससे पहले भी हो चुकी है ऐसी कई कार्रवाई
खास बात यह है कि पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में विभागीय अनुशासन को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विजय नगर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी रवींद्र सिंह गुर्जर और अजय वर्मा को भी डिमोशन कर एसआई बनाया जा चुका है। हाल ही में खजराना थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) कमल सिंह गुर्जवार को करीब 400 दिन तक एक शिकायत लंबित रखने के मामले में डिमोशन कर आरक्षक बना दिया गया।
किसने की मामले की जांच?
इस मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी। जांच पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को सौंपी थी। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई। जिसके बाद अब उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें इंस्पेक्टर पद से डिमोट कर सब-इंस्पेक्टर बनाया गया है।
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