Tarun Tejpal को Mumbai High Court ने दुष्कर्म मामले में IPC की 3 धाराओं में दोषी ठहराया
नयी दिल्ली, छह अगस्त मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में अपनी एक सहयोगी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की तीन धाराओं के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने गोवा की सत्र अदालत के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें उन्हें पांच साल पहले बरी कर दिया गया था। उन्हें भादंसं की धारा 376 (2)(एफ) (किसी महिला का दुष्कर्म करना, जब आरोपी उसका संरक्षक हो या भरोसे या अधिकार की स्थिति में हो), 354 (ए) (यौन उत्पीड़न) और 354 (बी) (महिला के कपड़े उतारने के इरादे से उस पर आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) के तहत दोषी ठहराया गया है।
- भादंसं की धारा 376 (2)(एफ) तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति, जो भरोसे या अधिकार के पद पर हो या अभिभावक/रिश्तेदार हो, बलात्कार करता है। - भादंसं की धारा 354-ए के तहत किसी पुरुष द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के लिए सजा का प्रावधान है। इसमें बिना मर्जी के शारीरिक संपर्क, यौन संबंध की मांग, बिना सहमति के पोर्नोग्राफी सामग्री दिखाना और यौन प्रकृति की टिप्पणियां करना शामिल है।
- भादंसं की धारा 354-बी के तहत, किसी भी ऐसे पुरुष को सजा दी जाती है जो किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे निर्वस्त्र होने के लिए मजबूर करने के इरादे से उस पर हमला करता है, आपराधिक बल का इस्तेमाल करता है या ऐसी हरकत के लिए उकसाता है। दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 के कुख्यात निर्भया कांड के बाद भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जे.एस. वर्मा की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने धारा 376 का दायरा बढ़ाया था। न्यायमूर्ति वर्मा समिति की 23 जनवरी, 2013 को जारी 630 पन्नों की रिपोर्ट में आपराधिक कानूनों में संशोधन का सुझाव दिया गया था, ताकि बलात्कारियों—जिनमें पुलिस और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं—को कड़ी सजा दी जा सके।
समिति की सिफारिशों को ‘आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013’ में शामिल किया गया। यह अधिनियम तीन अप्रैल 2013 से लागू हुआ और इसने यौन अपराधों से जुड़े कानूनों में कई बदलाव किए, जिसमें भादंसं में नयी धारा 376ए को जोड़ना भी शामिल था। धारा 376ए के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति यौन हमला करते समय ऐसी चोट पहुंचाता है जिससे पीड़ित की मौत हो जाती है या पीड़ित ‘लगातार कोमा जैसी स्थिति’ में चला जाता है, तो उस व्यक्ति को कम से कम 20 साल की कठोर कैद की सजा दी जाएगी।
यह सजा उम्रकैद (यानी उस व्यक्ति के बाकी बचे पूरे जीवनकाल के लिए कैद) या मौत तक भी हो सकती है।
हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही अपराह्न दो बजकर 45 मिनट तक स्थगित
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