RTI ने खोल दी बिहार के पंचायत की पोल, बिना कोई काम कराए खर्च हो गए 50 लाख!
बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड स्थित दिघौरा पंतायत में सरकारी विकास परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है. सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय जांच में लगभग 45 से 50 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आई. जांच में पता चला कि जिन योजनाओं के नाम पर सरकारी राशि निकाली गई. उनमें से कई का तो धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं था.
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
मामला पंचायत समिति सदस्य के पुत्र मिलन यादव द्वारा दायर RTI आवेदन के बाद सामने आया था. उन्होंने पंचायत में संचालित विकास परियोजनाओं में अनियमितताओं की आशंका जताते हुए खर्चे का पूरा ब्योरा मांगा था. प्रक्रिया लंबी थी लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिले दस्तावेज के आधार पर उन्होंने 10 योजनाओं की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
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सिर्फ कागजों पर संचालित दिखीं योजनाएं
स्थानीय स्तर पर जब शिकायतों पर ढंग से कार्रवाई नहीं हुई तो मिलन यादव ने पंचायती राज विभाग के पटना मुख्यालय का दरवाजा खटखटाया. शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम गठित की और दिघौरा पंचायत भेजी. जांच के दौरान, सामने आया कि 10 में से 9 योजनाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं. रिपोर्ट की मानें तो विभिन्न योजनाएं सिर्फ कागजों पर संचालित दिखाई गईं. हालांकि, मौके पर कोई भी काम नहीं मिला. कुछ मामलों में तो एक ही काम के लिए अलग-अलग मदों से बार-बार स्वीकृति दिखाकर सरकारी राशि निकालने की बात भी सामने आई. शुरुआती जांच में लगभग 45 से 50 लाख रुपये के कथित गबन की आशंका जताई गई.
मिलन का दावा है कि जांच रिपोर्ट में साफ मिला कि कई योजनाओं पर वास्तविक कार्य नहीं हुआ था लेकिन भुगतान कर दिया गया था. मामले में सात लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. विभाग ने सबसे स्पष्टीकरण मांगा है.
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पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई जरूरी
पंचायती राज विभाग के मुख्यालय को जांच रिपोर्ट सौंपी गई है. लेकिन अब तक संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ किसी कठोर कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. ग्रामीण लोगों और मिलन की मांग है कि गबन के दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और उनसे वसूली की जाए, जिससे पंचायत स्तर की विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. प्रभावी रूप से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके.
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