हाल ही में एक अमेरिकी अधिकारी ने बयान दिया कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी है। इस बात पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक्टर और नेता कमल हासन ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत एक आजाद देश है और हम किसी दूसरे देश के आदेश पर नहीं चलते। उन्होंने साफ किया कि सॉवरेन देशों के बीच बराबरी का सम्मान ही शांति का रास्ता है।
रूसी तेल की अमेरिका की राजनीति
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया में तेल की कमी को देखते हुए उन्होंने भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दी है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेल की सप्लाई को लेकर भरोसा जताया कि उनके पास काफी संसाधन हैं और स्थिति जल्द ही ठीक हो जाएगी। हालांकि, अमेरिकी पक्ष की इस परमिशन वाली भाषा को भारतीय हलकों में पसंद नहीं किया जा रहा है।
भारत का स्टैंड
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमारी एनर्जी सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने अपने तेल के स्रोतों को बढ़ाकर 40 देशों तक फैला दिया है ताकि किसी एक रूट पर निर्भर न रहना पड़े। भारत हमेशा वहीं से तेल खरीदता है जहां से उसे सबसे सस्ता और सही पड़ता है, और इसके लिए उसे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।
विपक्ष का मोदी सरकार पर वार
इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमारे इतिहास और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति समझौते वाली नीति का नतीजा है, जो देश के स्वाभिमान के लिए ठीक नहीं है।
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अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को साफ किया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का असली मकसद ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव कम करना है। ट्रंप के मुताबिक, वेस्ट एशिया और गल्फ के सप्लाई रूट में तनाव की वजह से रुकावटें आ रही हैं, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया। एयर फोर्स वन में रिपोर्टर्स से बात करते हुए ट्रंप ने स्कॉट बेसेंट की उस घोषणा का समर्थन किया, जिसमें भारतीय रिफाइनर्स को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी क्रूड के शिपमेंट खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी गई है।
मार्केट को स्थिर रखने की कोशिश
होर्मुज स्ट्रेट के पास सुरक्षा तनाव की वजह से ग्लोबल तेल सप्लाई रुकने की चिंता बढ़ गई है। इस स्थिति पर कमेंट करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर मार्केट को स्थिर करने के लिए और भी कदम उठाने पड़े, तो वे थोड़ा दबाव कम करने के लिए ऐसा जरूर करेंगे। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि दुनिया भर में और खुद अमेरिका के पास तेल का काफी स्टॉक है और यह स्थिति बहुत जल्दी ठीक हो जाएगी। यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट की इस छूट से भारत उन रूसी तेल शिपमेंट को इंपोर्ट कर सकेगा, जो नए अमेरिकी बैन के बाद बीच रास्ते में फंस गए थे।
वॉशिंगटन-नई दिल्ली की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
अमेरिकी अधिकारियों, स्कॉट बेसेंट और क्रिस राइट ने जोर देकर कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म उपाय है और इसका मतलब रूस के प्रति उनकी बड़ी पॉलिसी में बदलाव नहीं है। बेसेंट ने बताया कि पहले भारत से रूसी तेल न खरीदने को कहा गया था और भारत ने उसका पालन भी किया, लेकिन मौजूदा सुरक्षा हालातों को देखते हुए यह ढील दी गई है।
उन्होंने भारत को एक जरूरी स्ट्रैटेजिक पार्टनर बताया और कहा कि यह कदम ईरान की उस कोशिश का मुकाबला करने के लिए है, जिसमें वह ग्लोबल एनर्जी को 'बंधक' बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि देश कच्चा तेल खरीदने के लिए किसी बाहरी मंजूरी पर निर्भर नहीं है।
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