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Mini Mathur ने जीता 'Alliance' का पहला सीज़न! Aly Goni और Ruhee Dosani को दी मात, 50 लाख का कैश प्राइज किया अपने नाम

अमेज़न प्राइम वीडियो के हाई-वोल्टेज रियलिटी शो 'अलायंस' (Alliance) को अपना पहला विजेता मिल गया है। छह हफ्तों तक चली रणनीति, कूटनीति, बदलते रिश्तों और कड़े मुकाबलों के बाद लोकप्रिय टीवी होस्ट और अभिनेत्री मिनी माथुर ने 'अलायंस' के पहले सीज़न की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। बॉलीवुड अभिनेता कुणाल खेमू द्वारा होस्ट किए गए इस शो के ग्रैंड फिनाले में मिनी माथुर ने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों एली गोनी और डिजिटल इन्फ्लुएंसर रूही दोसानी को पछाड़कर यह खिताब और 50 लाख रुपये की इनामी राशि जीती।
 
मिनी माथुर ने 'अलायंस' जीता
मिनी माथुर शुरू से ही 'अलायंस' की सबसे मजबूत कंटेस्टेंट्स में से एक थीं। फिनाले में उन्होंने एक्टर एली गोनी और इन्फ्लुएंसर रूही दोसानी को हराकर ट्रॉफी जीती और 50 लाख रुपये का कैश प्राइज अपने नाम किया।

अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए मिनी माथुर ने कहा, "'अलायंस' जीतना बिल्कुल सपने जैसा लग रहा है। इस सफर ने मुझे हर तरह से - भावनात्मक, मानसिक और रणनीतिक रूप से - चुनौती दी और हेडक्वार्टर के अंदर हर दिन मुझे और मजबूत बनने के लिए प्रेरित किया। शक के पल थे, खुशी के पल थे, ऐसी दोस्ती जिसे मैं हमेशा याद रखूँगी और ऐसे सबक जो जीवन भर मेरे साथ रहेंगे। जिन साथियों (एलीज़) के साथ मैंने यह अनुभव साझा किया, उन सभी ने मेरे सफर को आकार देने में भूमिका निभाई, चाहे हम साथ खड़े हों या गेम में एक-दूसरे के खिलाफ। यह ट्रॉफी उठाना एक अद्भुत एहसास है, लेकिन मैं सबसे ज्यादा उन यादों, रिश्तों और उस सब कुछ को संजोकर रखूँगी जो इस अनुभव ने मुझे सिखाया है। मैं उन सभी की बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और इस यादगार सफर में मेरा साथ दिया।"
 

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'अलायंस' के कंटेस्टेंट्स कौन थे?
'अलायंस' का पहला सीज़न 16 कंटेस्टेंट्स के साथ शुरू हुआ, जो जोड़ियों के रूप में हेडक्वार्टर में आए थे। हफ़्तों के दौरान, उन्हें दोस्ती, दुश्मनी और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के बीच शारीरिक और ज्ञान-आधारित टास्क का सामना करना पड़ा। सरप्राइज़ एंट्री, चौंकाने वाले एलिमिनेशन और लगातार बदलते गठजोड़ ने कंटेस्टेंट्स और दर्शकों दोनों को आखिर तक उत्सुक बनाए रखा।
 

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विजेता की घोषणा से पहले फिनाले में पुराने कंटेस्टेंट्स को एक आखिरी बार साथ लाया गया। मिनी माथुर, एली गोनी और रूही दोसानी टॉप तीन में पहुँचे, और आखिरकार मिनी ने खिताब अपने नाम किया। पहले सीज़न में टेलीविज़न, फ़िल्मों और डिजिटल स्पेस से कई कंटेस्टेंट शामिल हुए, जिनमें रवि किशन, वंशज सिंह, पायल गेमिंग, अरमान खेरा, डॉली जावेद, देल्बर आर्या, सब्बी सूरी, रिव्वा किशन, कुशल टंडन, डेज़ी शाह, रूही दोसानी, निखिल चिनप्पा, नीति टेलर, मिनी माथुर, अर्सलान गोनी और ज़ैद दरबार शामिल थे। पूरे सीज़न के दौरान, सोहेल खान, सीमा सजदेह, अली गोनी, कशिश कपूर और बाली जैसे वाइल्डकार्ड एंट्रीज़ ने नए ट्विस्ट लाए और हेडक्वार्टर के माहौल को बदल दिया।
 
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भारतीय आईटी सेक्टर में भर्ती सालाना 10 प्रतिशत बढ़ी, एआई से जुड़े पदों की मांग में तेज उछाल: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के तकनीकी रोजगार बाजार में इस समय दो अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। एक ओर टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्यों की मांग में सालाना 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर एंट्री-लेवल आईटी नौकरियों में कमी देखने को मिली है। यह जानकारी जॉब पोर्टल फाउंडइट की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित भूमिकाएं तेजी से भर्ती का हिस्सा बन रही हैं। एक साल पहले जहां एंट्री-लेवल भर्तियों में एआई से जुड़े पदों की हिस्सेदारी लगभग 1 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां अब केवल एआई मॉडल विकसित करने के लिए ही नए उम्मीदवारों की भर्ती नहीं कर रही हैं। इसके बजाय वे ऐसे प्रतिभाशाली कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं, जो एआई सिस्टम का संचालन, सत्यापन और अनुकूलन कर सकें।

आईटी उद्योग में फ्रेशर भर्ती की हिस्सेदारी भी घटी है। पिछले वर्ष जहां कुल फ्रेशर हायरिंग में आईटी सेक्टर का योगदान 32 प्रतिशत था, वहीं अब यह घटकर 24 प्रतिशत रह गया है। इससे संकेत मिलता है कि तकनीक-आधारित नौकरियां अब केवल पारंपरिक आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंकिंग, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), हेल्थकेयर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आईटी ऑक्युपेशन इंडेक्स में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि आईटी इंडस्ट्री इंडेक्स में 6 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे साफ है कि तकनीकी कौशल की मांग बढ़ रही है, लेकिन यह मांग अब विभिन्न उद्योगों में फैल रही है।

कुल फ्रेशर भर्ती की बात करें तो इसमें महीने-दर-महीने 2 प्रतिशत और साल-दर-साल 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि 7 से 10 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है। यह एकमात्र अनुभव वर्ग रहा, जिसमें मासिक आधार पर 2 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले एक वर्ष में एंट्री-लेवल आईटी नौकरियों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद तकनीकी कार्यों की कुल मांग लगातार बढ़ती रही है।

फाउंडइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तरुण सिन्हा ने कहा, जो कंपनियां आर्थिक सुस्ती के दौरान भी नए स्नातकों की भर्ती जारी रखती हैं, वे भविष्य की क्षमताओं में निवेश कर रही हैं। वे आने वाले वर्षों के नेतृत्व को तैयार कर रही हैं, बजाय इसके कि भविष्य में महंगे अनुभवी कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़े।

रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेशर भर्ती में सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई है। वहीं इंजीनियरिंग एवं उत्पादन क्षेत्र की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई।

सबसे बड़ी बढ़ोतरी मेडिकल और हेल्थकेयर क्षेत्र में देखी गई, जहां फ्रेशर भर्ती की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई। यह सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक वृद्धि है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) पृष्ठभूमि वाले स्नातक अभी भी भर्ती बाजार में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। कुल फ्रेशर भर्ती में उनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जो तकनीकी कौशल की लगातार बढ़ती मांग को दर्शाती है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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