IND vs NZ: "मैं थक गया हूं बार-बार कहते...", फाइनल मैच से पहले वरुण चक्रवर्ती पर भड़के आर अश्विन
IND vs NZ: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 8 मार्च को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मैच खेला जाएगा. दोनों टीमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खिताबी मुकाबले में भिड़ेंगी. टीम इंडिया इस मैच को जीतकर इतिहास रचना चाहेगी, लेकिन टीम की टेंशन इस वक्त स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की खराब फॉर्म ने बढ़ाई है. सुपर-8 के शुरुआत से सेमीफाइनल मैच तक वरुण चक्रवर्ती के प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखने को मिला. अब फाइनल मैच से पहले पूर्व भारतीय दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन वरुण चक्रवर्ती पर भड़के हैं.
वरुण चक्रवर्ती पर भड़के रविचंद्रन अश्विन
वरुण चक्रवर्ती का इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में बेहद ही खराब प्रदर्शन देखने को मिला. इस सेमीफाइनल मैच में वरुण ने अपने 4 ओवर के स्पेल में 64 रन खर्च कर दिए थे और सिर्फ एक विकेट लेने में कामयाब हुए थे. अब रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपने शो ऐश की बात में चक्रवर्ती के प्रदर्शन को लेकर कहा कि जब उनकी पिटाई होती है तो उनका कॉन्फिडेंस पूरी तरह से गिर जाता है. यह बार-बार कहते हुए मैं थक गया हूं कि पिछले कुछ मैचों से बैटर उनके खिलाफ इसी प्लान से मैदान पर उतरते हैं. वरुण चक्रवर्ती को लेफ्ट-आर्म के साथ बल्लेबाजों को राउंड द विकेट बॉलिंग करनी चाहिए.
वरुण चक्रवर्ती को अपने रणनीति में करना होगा बदलाव- आर अश्विन
अश्विन ने आगे कहा कि वरुण चक्रवर्ती के खिलाफ अब बल्लेबाज आक्रामक खेलने पसंद कर रहे हैं. ऐसे किसी भी गेंदबाज के साथ होना समान्य है, जिसमें बल्लेबाज उनकी गेंदों पर पढ़ रहा है. ऐसे में किसी भी गेंदबाज को बेहतर करना है तो उसे थोड़ा रणनीतिक रूप से खुद को बेहतर करने की जरूरत है. आपको सही लाइन और लेंथ देखनी पड़ेगी, जिससे आप बिल्कुल भी भटक नहीं सकते हैं.
सुपर-8 से ही खराब फॉर्म में नजर आ रहे हैं वरुण चक्रवर्ती
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज मुकाबले में तो वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन अच्छा रहा था, लेकिन सुपर-8 के शुरुआत से वो संघर्ष करते नजर आ रहे हैं. उनके प्रदर्शन का ग्राफ गिरता ही जा रहा है. सुपर-8 के पहले मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ वरुण चक्रवर्ती ने अपने 4 ओवर के स्पेल में 47 रन लुटा दिए थे. इसमें भी उन्होंने एक ही विकेट लिया था. इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे मैच में वरुण ने 4 ओवर में 35 रन खर्च कर सिर्फ एक विकेट लिए थे.
वरुण चक्रवर्ती के फॉर्म ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन
वरुण चक्रवर्ती इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में भी उन्होंने खूब रन लुटाए. इस मैच में चक्रवर्ती ने अपने 4 ओवर के स्पेल में 40 रन लुटाए थे और सिर्फ एक विकेट लिए. इसके बाद सेमीफाइनल मैच में भी उनका बेहद ही प्रदर्शन प्रदर्शन देखने को मिला, जिसके बाद से टीम इंडिया की टेंशन बढ़ी हुई है, क्योंकि वरुण भारत के स्पिन डिपार्टमेंट के अहम खिलाड़ी हैं.
इतिहास रचने से सिर्फ एक कदम दूर टीम इंडिया
टीम इंडिया इतिहास रचने से सिर्फ एक कदम दूर है. बता दें कि टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में कोई टीम लगातार 2 बार ट्रॉफी नहीं जीत सकी है. इतना ही नहीं कोई अब तक 3 बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब नहीं जीता है. इंग्लैंड, भारत और वेस्टइंडीज ने 2-2 बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता है. ऐसे में टीम इंडिया के पास ट्रॉफी डिफेंड करने का साथ 3 बार जीतने का भी मौका है.
Team India have had the upper hand against the Kiwis. ????????????
— Star Sports (@StarSportsIndia) March 7, 2026
Will the momentum continue in the big final? ????
ICC Men’s #T20WorldCup ???? FINAL | #INDvNZ | SUN, 8th MAR, 5:30 PM pic.twitter.com/BSRYwuBG0O
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एक ही कच्चे तेल से कैसे निकलते हैं पेट्रोल और डीजल? जानें रिफाइनरी के अंदर का पूरा खेल
अगर आप गाड़ी चलाते हैं या पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो यह सवाल जरूर मन में आता है कि आखिर ये दोनों ईंधन बनते कैसे हैं. दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही स्रोत यानी कच्चे तेल से निकलते हैं. कच्चे तेल को वैज्ञानिक प्रक्रिया से अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है और इसी से कई तरह के ईंधन तैयार किए जाते हैं. पेट्रोल और डीजल भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
कच्चा तेल क्या होता है
पेट्रोल और डीजल की कहानी कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से शुरू होती है. यह तेल जमीन के नीचे या समुद्र की गहराई में पाया जाता है. लाखों साल पहले धरती पर मौजूद पेड़-पौधे और जीव-जंतु दबकर धीरे-धीरे रासायनिक प्रक्रिया से तेल में बदल गए. जब इस तेल को जमीन से निकाला जाता है तो यह काला, गाढ़ा और चिपचिपा होता है. इसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे रिफाइनरी में भेजा जाता है.
रिफाइनरी में कैसे अलग किए जाते हैं पेट्रोल और डीजल
रिफाइनरी में कच्चे तेल को एक बड़े टावर में गर्म किया जाता है जिसे डिस्टिलेशन कॉलम कहा जाता है. इस प्रक्रिया में कच्चे तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है. गर्म होने पर तेल भाप में बदलने लगता है और अलग-अलग तापमान पर उसके अलग हिस्से अलग हो जाते हैं. हल्के पदार्थ जल्दी भाप बन जाते हैं और ऊपर की तरफ चले जाते हैं, जबकि भारी पदार्थ नीचे रह जाते हैं. इसी प्रक्रिया से अलग-अलग स्तरों पर पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और विमान ईंधन जैसे कई उत्पाद निकलते हैं.
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पेट्रोल और डीजल में क्या फर्क होता है
हालांकि दोनों एक ही तेल से बनते हैं, लेकिन इनकी विशेषताएं अलग होती हैं. पेट्रोल हल्का और जल्दी जलने वाला ईंधन होता है. इसलिए पेट्रोल इंजन तेजी से गति पकड़ते हैं और आमतौर पर कारों और मोटरसाइकिलों में इस्तेमाल होते हैं.
डीजल पेट्रोल की तुलना में भारी होता है और इसे जलने के लिए ज्यादा दबाव और तापमान की जरूरत होती है. यही वजह है कि डीजल इंजन ज्यादा ताकत पैदा करते हैं और भारी वाहनों में उपयोग किए जाते हैं.
माइलेज और खर्च में अंतर
डीजल इंजन आमतौर पर पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा माइलेज देते हैं. इसका कारण यह है कि डीजल में ऊर्जा घनत्व ज्यादा होता है और इंजन ज्यादा कुशल तरीके से ऊर्जा पैदा करता है. हालांकि डीजल इंजन की कीमत और रखरखाव का खर्च थोड़ा ज्यादा हो सकता है. वहीं पेट्रोल इंजन हल्के और सरल होते हैं, इसलिए उनकी सर्विसिंग अपेक्षाकृत सस्ती होती है.
पर्यावरण पर क्या पड़ता है प्रभाव
पेट्रोल और डीजल दोनों के जलने से प्रदूषण होता है, लेकिन इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं. पेट्रोल इंजन आमतौर पर कम धुआं छोड़ते हैं, जबकि पुराने डीजल इंजन से काला धुआं ज्यादा निकलता था. हालांकि नई तकनीक जैसे बीएस-6 मानकों के आने से दोनों तरह के इंजनों को पहले से ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है. पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही कच्चे तेल से बनते हैं, लेकिन उनकी विशेषताएं और उपयोग अलग होते हैं. पेट्रोल हल्का और तेज रफ्तार के लिए उपयुक्त होता है, जबकि डीजल ज्यादा ताकत और माइलेज के लिए जाना जाता है. इसलिए वाहन चुनते समय या ईंधन का चुनाव करते समय अपनी जरूरत और उपयोग को ध्यान में रखना जरूरी होता है.
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