बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग अमेरिका का 'एक सपना', मरते दम तक नहीं होगा पूरा : ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान
तेहरान, 7 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया कि अमेरिका की ये इच्छा कि वो तेहरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर देगा, उसका एक सपना है जो उसके मरते दम तक पूरा नहीं होगा। सरकारी टेलीविजन पर उनका ये बयान प्रसारित किया गया।
ईरान के राष्ट्रपति ने शनिवार को कहा कि अमेरिका का बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग एक ऐसा सपना है जिसे उन्हें अपने साथ कब्र में ले जाना चाहिए।
दरअसल, ट्रंप ने ईरान से शुक्रवार को बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण करने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि आत्मसमर्पण के बाद ही कोई समझौता हो पाएगा।
इसके साथ ही पेजेशकियान ने खाड़ी देशों पर हमले को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि अब पड़ोसी देशों पर हमले नहीं किए जाएंगे, जब तक कि उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला न किया जाए। ईरानी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति ने बताया कि देश के अंतरिम नेतृत्व परिषद ने इस फैसले को मंजूरी दी है।
उन्होंने कहा कि ईरान इन देशों के साथ तनाव बढ़ाना नहीं चाहता और भविष्य में ऐसे हमलों से बचने का प्रयास करेगा।
अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के आठवें दिन पेजेशकियान का ये बयान सामने आया। 28 फरवरी को संघर्ष की शुरुआत से अब तक ईरान इजरायल समेत मध्य पूर्व के 10 से ज्यादा देशों को निशाना बना चुका है।
इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने फारस की खाड़ी में एक तेल टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया है।
समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा कि प्राइमा नाम के टैंकर को उस समय निशाना बनाया गया जब उसने उनकी नौसेना की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया। इन चेतावनियों में कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर रोक है और यह क्षेत्र असुरक्षित है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रायसीना में बोले एस जयशंकर- भारत में सभी देशों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की काबिलियत है
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का आज आखिरी दिन है। इस मौके पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कार्यक्रम को संबोधित किया और हिंद महासागर में भारत की कूटनीति की सराहना की। ईएएम जयशंकर ने बताया कि भारत के पास सभी देशों को एक प्लेटफॉर्म पर साथ लाने की काबिलियत है, क्योंकि वे हम पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, जब हिंद महासागर की बात आती है तो भारत की एक खास अहमियत है और इसलिए एक खास जिम्मेदारी और एक खास योगदान है। यह सिर्फ इसलिए नहीं है कि हम बड़े और सेंट्रल हैं, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि हमारे पास सच में बहुत सारे देशों को टेबल पर या प्लेटफॉर्म पर साथ लाने की क्षमता है क्योंकि हमारे उनके साथ अच्छे संबंध हैं। शायद वे हम पर ज्यादा भरोसा करते हैं या वे हमारे साथ ज्यादा कम्फर्टेबल हैं, इसे आप जो चाहें कह सकते हैं।
ईएएम जयशंकर ने आगे कहा, मेरे लिए इसका मतलब यह है कि गुरुग्राम के फ्यूजन सेंटर में इतने सारे लोग, इतने सारे देश, इतने सारे प्रतिनिधि हैं जो इस समय यहां एक साथ काम करने को तैयार हैं, साझा करने को तैयार हैं, एक समग्र तस्वीर बनाने को तैयार हैं। यह न केवल हिंद महासागर की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी रेखांकित करता है। हम निरंतर ऐसे संस्थानों का निर्माण कर रहे हैं, जिनमें आईओआर, कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन और बिम्सटेक जैसे मंच शामिल हैं। यद्यपि हम जीसीसी जैसे कुछ समूहों का हिस्सा नहीं हैं, फिर भी ये सभी प्रयास एक वृहद हिंद महासागर की आधारशिला हैं। दूसरी ओर, प्रशांत क्षेत्र के देश भी इस व्यापक संरचना का आधार बन रहे हैं। ये एक बड़े प्रकार की समग्र तस्वीर की नींव हैं। अब इसके अलावा, यह द्विपक्षीय भी है।
भारत और इसके सहयोगियों के बारे में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, जब मैं वहां अपने तीन सहयोगियों, सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका को उनकी नौसेनाओं और उनके तट रक्षकों के साथ देखता हूं, तो हमारा साथ मिलकर काम करने का एक लंबा इतिहास रहा है। उनमें से कई के पास भारतीय मूल के जहाज या शिल्प हैं। हमने एक साथ प्रशिक्षण किया है, हमने एक साथ अभ्यास किया है और सिर्फ उनके साथ ही नहीं, अगर आप वास्तव में हिंद महासागर या भारत-प्रशांत में बड़े अभ्यासों को देखें, तो ऑस्ट्रेलिया फिर से एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभ्यास भागीदार है।
उन्होंने कहा कि आप भारतीय नौसेना या भारतीय तट रक्षक को देखें, वास्तव में उनमें से प्रत्येक में यह एक सामान्य तत्व है। मेरा मतलब है कि यदि आप समुद्री गतिविधियों की समग्रता को लेते हैं और कहते हैं कि किस देश में सबसे अधिक विशेषताएं हैं, तो हम वहां हैं। हम सिंगापुर में समुद्री डकैती का मुकाबला करने के लिए आधारित संगठन के सदस्य हैं, लेकिन इसका एक हिस्सा उपस्थिति है, एक साथ काम करना है। लेकिन हम वास्तव में व्यावहारिक रूप से मदद करते हैं; हम ड्रग्स नेटवर्क का मुकाबला करने के मामले में मदद करते हैं, हम आईयूयू मछली पकड़ने से निपटते हैं। हम एचएडीआर की स्थिति से निपटते हैं, हम ऑयल स्पिल से डील करते हैं। श्रीलंका में एक बड़ा ऑयल स्पिल हुआ था, मॉरीशस में एक बड़ा ऑयल स्पिल हुआ था। असल में इंडियन वेसल ही थे जो सबसे पहले वहां गए और सफाई में मदद की। मेरे कहने का मतलब यह है कि जब आपने नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर शब्द का इस्तेमाल किया, तो हां, हम एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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