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मलेशिया के पीएम ने ईरान के विदेश मंत्री से की बात, हमले को बताया निंदनीय

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले को लेकर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एक बार फिर से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ईरान के प्रति मलेशिया के लोगों की सहानुभूति और एकजुटता दिखाई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने कहा, मैंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से इस बहुत मुश्किल समय में ईरान के लोगों के साथ मलेशिया की सहानुभूति और एकजुटता जाहिर करने के लिए बातचीत की। फोन पर बातचीत के दौरान मैंने तेहरान में हाल ही में इजरायली सरकार और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों में मारे गए लोगों के लिए मलेशिया की तरफ से अपनी संवेदना भी जाहिर की, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और 165 स्कूली छात्र भी शामिल थे।

इजरायल और अमेरिका की तरफ से किए गए हमलों की निंदा करते हुए अनवर इब्राहिम ने कहा, मलेशिया ने किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अपना कड़ा रुख दोहराया। साथ ही लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष के वैश्विक शांति, स्थिरता और भलाई पर पड़ने वाले असर पर गहरी चिंता भी जताई।

मलेशियाई पीएम ने दोनों पक्षों के बीच इस मामले को डिप्लोमैटिक तरीके से हल करने की अपील की। दोनों की चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि तनाव कम करने, डिप्लोमैटिक कोशिशों को मजबूत करने और इस इलाके में चल रहे झगड़े को खत्म करने के लिए शांतिपूर्ण हल ढूंढने की तुरंत जरूरत है। इसमें फिलिस्तीनी मुद्दा भी शामिल है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान लगातार बना हुआ है।

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से टेलीग्राम पर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी गई।

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई, उनके परिवार के सदस्यों और देश की सेना और नेताओं की मौत पर अपनी गहरी संवेदना जताई। साथ ही, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हथियारों से हमले की वजह से हुई कई आम लोगों की मौत पर भी दुख जताया है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि व्लादिमीर पुतिन ने तनाव को तुरंत खत्म करने, ईरान से जुड़े या मिडिल ईस्ट में उठने वाले किसी भी मुद्दे को हल करने के तरीके के तौर पर ताकत के इस्तेमाल को नकारने और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर तेजी से लौटने के पक्ष में रूस के उसूलों पर फिर से जोर दिया।

--आईएएनएस

केके/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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नेपाल से श्रीलंका तक पुराने ड्रग तस्करी मार्ग के फिर सक्रिय होने पर एजेंसियों की नजर

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल से श्रीलंका तक भारत के रास्ते ड्रग्स की तस्करी करने वाला मार्ग सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया है। यह मार्ग, जो पिछले कुछ समय से अपेक्षाकृत शांत था, अब फिर से सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसका इस्तेमाल हशीश ऑयल और चरस की तस्करी के लिए किया जा रहा है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चेन्नई और हैदराबाद जोनल इकाइयों द्वारा चलाए गए बहु-राज्यीय अभियान में करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की हशीश ऑयल और चरस बरामद की गई है।

यह अभियान केंद्र सरकार की पहल नशामुक्त भारत अभियान के तहत चलाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका में हशीश और चरस की काफी ज्यादा मांग है। श्रीलंका में हाल के वर्षों में ड्रग्स के दुरुपयोग के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके कारण नशीले पदार्थों की मांग बढ़ी है और ड्रग कार्टेल ने आपूर्ति भी बढ़ा दी है।

अधिकारियों के अनुसार हिंद महासागर में स्थित होने के कारण श्रीलंका ड्रग तस्करी के लिए एक रणनीतिक ट्रांजिट पॉइंट बन गया है। ड्रग्स केवल नेपास से ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान से भी लाई जाती है, जिन्हें पाकिस्तान व ईरान के रास्ते भेजा जाता है।

तस्करों ने दक्षिण भारत को इन ड्रग्स का ट्रांजिट पॉइंट बना लिया है। तस्करी की खेप आमतौर पर थूथुकुडी या कोडिक्कराई के तट तक पहुंचती है। इसके बाद एक नेटवर्क के जरिए समुद्र में बीच रास्ते पर श्रीलंकाई सहयोगियों को यह खेप सौंप दी जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि ये लैंडिंग पॉइंट नए नहीं हैं बल्कि लंबे समय से उपयोग में हैं। पहले यहां अफीम जैसी ड्रग्स लाई जाती थीं और श्रीलंका के तस्कर इसके बदले बीड़ी का लेन-देन करते थे।

एनसीबी अधिकारियों के अनुसार त्रिंकोमाली और गाले और कोलंबो श्रीलंका में ड्रग्स के प्रवेश और निकासी के प्रमुख बिंदु हैं।

ड्रग तस्करी का कारोबार कई गुना बढ़ गया है। पहले दो-तीन महीनों में एक-दो मामले सामने आते थे लेकिन अब स्थिति यह है कि केवल 2024 में श्रीलंका में 35,000 ड्रग्स जब्ती के मामले दर्ज किए गए।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका में केवल मारिजुआना, हशीश या चरस ही नहीं बल्कि मेथामफेटामिन की मांग भी 2019 के बाद से तेजी से बढ़ी है।

जब ड्रग्स श्रीलंका पहुंचते हैं, तो तस्कर वहां के कुछ स्थानीय लोगों जिनमें अपराधी, मछुआरे और संगठित गिरोह के साथ मिलकर इन्हें पैक करते हैं और देश के अन्य हिस्सों में वितरित करते हैं।

इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में नेपाल से श्रीलंका तक का मार्ग ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका एक कारण जम्मू-कश्मीर और पंजाब में पाकिस्तान सीमा पर कड़ी सुरक्षा भी है।

यह मार्ग नया नहीं है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अब इसका उपयोग पहले से ज्यादा किया जा रहा है। भारतीय एजेंसियां इस तस्करी को रोकने के लिए नेपाल और श्रीलंका की एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रही हैं।

इस बीच इंडियन कोस्ट गार्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और दक्षिण भारत से निकलने वाली मछली पकड़ने वाली नौकाओं (फिशिंग ट्रॉलर) को रोककर जांच कर रही है।

एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल से संचालित यह रैकेट एक श्रीलंकाई नागरिक द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ समन्वय कर ड्रग्स को दक्षिण भारत तक पहुंचाता है।

उसने तमिलनाडु में भी एक नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिससे ड्रग्स को आसानी से श्रीलंकाई जलक्षेत्र तक पहुंचाया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, यह लगातार चल रहा अभियान है और एजेंसियां उन सभी संभावित खामियों की पहचान कर रही हैं, जिनका फायदा उठाकर तस्कर अपने नेटवर्क को आगे बढ़ा रहे हैं।

--आईएएनएस

वीएन/आरएडी/पीयूष

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