हिमाचल के मंत्री का विदेश नीति-कूटनीति पर कटाक्ष:विक्रमादित्य बोले- तेल खरीदने की भी अनुमति लेनी पड़ रही, ‘छूट भी वही दें, नियम भी वही बनाएं’
हिमाचल प्रदेश के PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने विदेश नीति और कूटनीति पर सवाल खड़े किए। विक्रमादित्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ द ट्रेजरी ‘स्कॉट बसेंट’ के ट्वीट को पोस्ट करते हुए लिखा- ‘बड़े-बड़े मंचों से विश्वगुरु का दम भरते हैं’ और अब रूस से तेल खरीदने की अनुमति लेनी पड़ रही है। स्कॉट बसेंट के ट्वीट में भारत की रिफाइनरी को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट का जिक्र है। इस पर हिमाचल के PWD मंत्री नाराज़ हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- 'अमेरिका से मिली छूट को वरदान माना जा रहा है और खूब तालियां बज रही हैं। उन्होंने केंद्र पर तंज कसते हुए लिखा- छूट भी वही (अमेरिका) दें, नियम भी वही (अमेरिका) बनाए। विक्रमादित्य ने आगे लिखा- फिर हम मंच से गर्व से बोलें - ‘हम तो बिल्कुल आत्मनिर्भर हैं साहब।’ ऊर्जा हमारी, ज़रूरत हमारी, पर टाइमटेबल किसी और का, ये कैसा स्वाभिमान है, जो हर बार मुहर बाहर से ढूंढता है? उन्होंने लिखा- उधर, तेल खरीदने की छूट मिली और इधर हम मुस्कुरा कर चुप हो जाते हैं, क्योंकि ज़्यादा बोलेंगे तो, कहीं अगली बार छूट पर स्थायी रोक न लग जाए। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव पर चिंता जाहिर विक्रमादित्य सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए लिखा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, तेल बाज़ार में अस्थिरता और वैश्विक शक्तियों की खींचतान का असर सीधे-सीधे हमारे देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार, महंगाई व सुरक्षा पर डाल रहा है। विदेश नीति-कूटनीति को कसौटी पर परखे जाने की जरूरत: मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आगे लिखा- इस समय हमारी (इंडिया) विदेश नीति और कूटनीति को केवल बड़े-बड़े मंचों पर भाषणबाज़ी नहीं, बल्कि इसे कसौटी पर परखे जाने की जरूरत है। वह आगे लिखते हैं कि हमें ईमानदारी से यह विचार करना होगा कि आज जो निर्णय लिए जा रहे हैं, वे सच में देश और प्रदेश के हित में हैं या आने वाले समय में हमें और बड़े संकट की ओर धकेल सकते हैं। विक्रमादित्य ने 2 दिन पहले भी 56 इंच पर सवाल खड़े किए विक्रमादित्य सिंह ने 2 दिन पहले भी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खाड़ी देशों की लड़ाई में लाशों पर भी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को लेकर तंज कसा। इस पर हिमाचल भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने विक्रमादित्य के सोशल मीडिया पोस्ट को विवादित बताते हुए निंदा की थी। उन्होंने कहा कि दुखद घटनाओं पर राजनीति करना आसान है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा बढ़ाना बेहद कठिन कार्य है। राजनीति नहीं देश-प्रदेश हित में टिप्पणी: विक्रमादित्य मंत्री ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी राजनीति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश और हिमाचल प्रदेश के हित में है। उन्होंने कहा कि अपनी राजनीतिक यात्रा में उन्होंने हमेशा सत्य का समर्थन और गलत का विरोध किया है, और यह प्रवचन उसी दिशा का हिस्सा है।
एनिमेशन का स्वर्णिम साल, फिल्मों की कमाई 1800 करोड़ तक:सिल्वर स्क्रीन पर गढ़े गए किरदारों का राज, इनकी कहानियां हर उम्र को जोड़ रहीं, भाषा-सरहदें भी छोटी पड़ीं
एनिमेशन फिल्मों के लिए 2026 बेहद खास माना जा रहा है। इस साल कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं जिनमें जानवरों, खिलौनों और वीडियो गेम के किरदारों की कहानियां होंगी। इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह साल एनिमेशन के इतिहास का सबसे सफल साल साबित हो सकता है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को आई एनिमेटेड फिल्म हॉपर्स ने कर दी है। कहानी अमेरिकी शहर बीवर्टन में रहने वाले बीवरों (ऊदबिलाव प्रजाति के जानवर) पर आधारित है। शहर का मेयर जंगल हटाकर फ्रीवे बनाना चाहता है। इससे नाराज किशोरी पर्यावरण कार्यकर्ता मेबल प्रयोग के जरिए अपनी चेतना को रोबोटिक बीवर में डाल देती है। वह बीवरों से दोस्ती कर उन्हें अपने जंगल को बचाने के लिए प्रेरित करती है। असल कहानी एनिमेशन फिल्मों के बूम की है। इस गर्मी में ‘डेस्पिकेबल मी’ और ‘पॉ पेट्रोल’ जैसी मशहूर फ्रेंचाइजी की नई फिल्में आ रही हैं। वहीं ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ और ‘टॉय स्टोरी 5’ अरबों डॉलर कमा सकती हैं। फरवरी में रिलीज हुई ‘गोट’ फिल्म, जिसमें खुर वाले जानवर खेलों में उतरते हैं, अब तक लगभग 1200 करोड़ कमा चुकी है। यह साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई वाली एनिमेशन फिल्म बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि एनिमेशन फिल्में अब सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। 1995 में अमेरिका और कनाडा के फिल्म बाजार में इनका हिस्सा केवल 2.8% था, जो 2024 तक 23.9% हो गया। उसी साल ‘इनसाइड आउट 2’ ने 15,616 करोड़ रुपए कमाकर रिकॉर्ड बनाया। पर 2025 की शुरुआत में चीनी फैंटेसी फिल्म ‘ने झा 2’ ने इसे पीछे छोड़ते हुए 18,372 करोड़ से ज्यादा कमा लिए। नवंबर में आई ‘जूटोपिया 2’ भी 17,450 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। जीवन के सामान्य अनुभव मन को स्पर्श कर जाते हैं: एक्सपर्ट मीडिया विश्लेषण कंपनी एम्पेयर की ओलिविया डीन कहती हैं, ‘कहानियों की सार्वभौमिकता एनिमेशन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण है। इनमें जीवन के सामान्य अनुभव दिखाया जाता है। यह भाषा व संस्कृति की सीमाओं से परे समझा जा सकता है। किरदारों के भाव व सरल कथानक दर्शकों को कहानी से जोड़ लेते हैं। इसके अलावा, बड़े स्टूडियो प्रमुख फिल्मों को छुट्टियों या त्योहारों पर लाते हैं। माता-पिता के लिए भी सिनेमा बच्चों को व्यस्त रखने का सबसे आसान तरीका है।’ भारत में भी बढ़ रही रुचि भारतीय एनिमेशन उद्योग सिर्फ आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मौलिक कहानियों का पावरहाउस बन चुका है। 2025 के अंत में रिलीज हुई फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने देश में ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच दिया। भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार और भक्त प्रहलाद की यह कहानी दिखाती है कि पौराणिक कथाओं व आधुनिक 3 डी एनिमेशन का संगम दर्शकों को लुभा सकता है। इधर होम्बले फिल्म्स ने महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स के तहत छह और फिल्मों की घोषणा की है। छोटा भीम का बड़े पर्दे पर विस्तार व रामायण के नए एनिमेटेड रुपांतरण ने भी उत्साह पैदा कर दिया है।
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