अमेरिका ने रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों के मामले में भारत की अच्छी तरह से भूमिका निभाने के लिए प्रशंसा की, साथ ही संकेत दिया कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए वह अतिरिक्त रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। वित्तीय मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस के कुडलो कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि वाशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है और अब वह और अधिक बैरल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए आगे के कदमों पर विचार कर रहा है। बेसेन्ट ने बताया कि भारतीयों ने बहुत अच्छा सहयोग दिया। हमने उनसे इस शरद ऋतु में प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद करने को कहा था। उन्होंने ऐसा किया।” उन्होंने यह भी बताया कि अस्थायी छूट मिलने से पहले नई दिल्ली ने अमेरिका के पिछले अनुरोधों का पालन किया था।
बेसेंट ने बताया कि भारत ने रूसी तेल की जगह अमेरिकी तेल का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी, लेकिन वाशिंगटन ने वैश्विक आपूर्ति में अल्पकालिक व्यवधान से बचने के लिए जहाजों पर मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद की अनुमति देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वे इसकी जगह अमेरिकी तेल का इस्तेमाल करने वाले थे, लेकिन दुनिया भर में तेल की अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए हमने उन्हें रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान से जुड़े तनावों ने वैश्विक तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और मध्य पूर्व में संभावित आपूर्ति व्यवधानों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वाशिंगटन बाजार में और तेल लाने के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकता है। उन्होंने मेजबान लैरी कुडलो से कहा, "हम अन्य रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकते हैं," जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका अतिरिक्त शिपमेंट पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है।
ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी खाड़ी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
इस बीच, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और खरीदारों का रुझान अमेरिकी कच्चे तेल की ओर बढ़ने से शुक्रवार को अमेरिकी खाड़ी तट पर भारी कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। अमेरिकी मैक्सिको की खाड़ी में उत्पादित बेंचमार्क मार्स सॉर क्रूड, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की तुलना में 11 डॉलर अधिक पर कारोबार कर रहा था, जो अप्रैल 2020 के बाद का उच्चतम स्तर है। विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रवाह में व्यवधान और कुछ खाड़ी उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण रिफाइनर वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश करने के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे अमेरिकी भारी कच्चे तेल की मांग बढ़ गई है।
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पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार ने दोनों ईंधनों के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद देश में पेट्रोल की नई कीमत लगभग 321.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत लगभग 335.86 रुपये प्रति लीटर हो गयी है।
पाकिस्तान सरकार के इस फैसले की घोषणा इस्लामाबाद में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान की गयी। इस अवसर पर पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अचानक आयी तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण लिया गया है।
उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने बताया कि पिछले 48 घंटों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अधिक गंभीर हो गयी है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गयी। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह बनी रहती हैं तो आगे भी स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
पत्रकार वार्ता में पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने भी माना कि यह फैसला सरकार के लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार जनता पर बोझ डालना नहीं चाहती, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह कदम उठाना पड़ा है। मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात खर्च में भारी वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
इस प्रकार की भी रिपोर्टें हैं कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी पाकिस्तान से पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ाने का आग्रह किया था। पाकिस्तानी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता के दौरान यह मांग उठाई गई थी। हम आपको बता दें कि आर्थिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत पाकिस्तान पर ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और वास्तविक बाजार कीमतों को लागू करने का दबाव लगातार बना हुआ है।
उधर, कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में लोगों में घबराहट देखी गयी। शुक्रवार को लाहौर, कराची और अन्य शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गयीं। बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में तेल की कमी हो सकती है।
लाहौर के एक पेट्रोल पंप पर कतार में खड़े लोगों ने मीडिया को बताया कि वह किसी संभावित कमी से पहले अपने वाहन में ईंधन भरवा लेना चाहते हैं। लोगों ने कहा कि वह करीब 70 मिनट से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों पर असर पड़ेगा।
उधर, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि से देश में महंगाई और तेज हो सकती है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति और बड़ी संख्या में गरीब आबादी के लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि कोई पेट्रोल पंप कृत्रिम कमी पैदा करने या जमाखोरी करने में शामिल पाया जाता है तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाए, उसका अनुमति पत्र रद्द किया जाए और उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम मंत्री को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रांतों का दौरा कर वहां की सरकारों के साथ मिलकर पेट्रोलियम उत्पादों की बचत और सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना तैयार करें। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य यह है कि मौजूदा संकट के दौरान देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि फिलहाल देश के पास पेट्रोल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन भंडारों को सावधानी से उपयोग करने की योजना बना रही है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि पश्चिम एशिया का संकट कब तक चलेगा।
हम आपको बता दें कि पाकिस्तान अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आयात करता है। यह तेल होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते पाकिस्तान पहुंचता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस मार्ग और क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गयी है। पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिया है कि तेल की कीमतों की समीक्षा हर सप्ताह की जाएगी ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार आवश्यक निर्णय लिए जा सकें। फिलहाल पाकिस्तान की जनता महंगे ईंधन और संभावित महंगाई के दोहरे दबाव को लेकर चिंतित नजर आ रही है।
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