Kitchen Vastu Tips: किचन में भूलकर भी नहीं लेकर जाना चाहिए जूते-चप्पल, वरना घर में आती है नकारात्मक ऊर्जा
Kitchen Vastu Tips: आपने अक्सर देखा होगा जल्दबाजी में हम जूते-चप्पल पहनकर किचन में चले जाते हैं, लेकिन ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है. ये भले ही आपको सुनने में छोटी बात लगती हो लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे एक बड़ी गलती के रूप में देखा जाता है. इस गलती की वजह से आपके घर की सुख-समृद्धि पर प्रभाव पड़ता है. वास्तु और धर्मशास्त्र के अनुसार, रसोई की पवित्रता का सीध असर आपके परिवार की सेहत और बैंक बैलेंस पर पड़ता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है. जूते-चप्पल घर में नकारात्मक ऊर्जा को साथ लेकर आते हैं. इन्हें किचन में ले जाना मां अन्नपूर्णा की पवित्रता को खंडित करने जैसा है. चलिए जानते हैं क्या कहता है वास्तु शास्त्र.
किचन में जूते-चप्पल ले जाने से क्या होता है?
नकारात्मक ऊर्जा आती है
वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब आप किचन में जूते पहनकर रसोई में जाते हैं तो आपके साथ नकारात्मक ऊर्जा साथ आती है. इससे घर में अशांति बढ़ती है. आपसी रिश्तों में कड़वाहट आती है. वास्तु के जानकारों का मानना है कि जो रसोई साफ और शुद्ध नहीं होता वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
परिवार की तरक्की में आती है रुकावट
वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि किचन में अग्नि तत्व मौजूद होती है जबकि जूते पृथ्वी और बाहरी भारी ऊर्जा का प्रतीक हैं. इन दोनों का गलत मेल घर में वास्तु दोष पैदा करता है. यह असंतुलन परिवार की तरक्की में रुकावट डालता है. इससे बिना वजह के खर्चे बढ़ते हैं.
स्वास्थ्य पर असर
वैज्ञानिक नजरिए से भी किचन में जूते पहनना अशुभ माना जाता है. बाहर की गंदगी और बैक्टीरिया जूतों के जरिए सीधे किचन के फर्श पर पहुंचते हैं. जहां हम खाना बनाते हैं वहां इन कीटाणुओं का होना फूड पॉइजनिंग और बीमारियों को दावत देता है. रसोई का फर्श हमेशा साफ रहना चाहिए.
कैसे करें बचाव?
वास्तु के अनुसार, अगर आप बाहर से आ रहे हैं और किचन में जा रहे हैं तो उसे पहले बाहर ही जूतों को उतारकर अलग जगह पर रख दें. यदि फर्श ठंडा है तो किचन के लिए अलग से साफ जूते-चप्पल रखें जिन्हें आप घर के अंदर भी किचन में पहनकर जा सकते हैं. रोजाना रात को किचन का फर्श पोंछकर सोएं, यह लक्ष्मी को अपनी ओर आकर्षक करता है जिससे घर में धन की कमी नहीं होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र के नियमों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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ईरान में सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिक भेजने पर विचार कर रहे ट्रंप
वॉशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती में रुचि दिखाई है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में दी गई है।
वॉशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने के विचार पर गंभीर रुचि दिखाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस विषय पर अपने सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ चर्चा की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह योजना किसी बड़े पैमाने पर आक्रमण की नहीं है बल्कि विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए सीमित संख्या में सैनिकों को तैनात करने पर केंद्रित है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने युद्ध के बाद के ईरान के लिए एक संभावित योजना भी बताई है। इसमें ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और एक नई ईरानी सरकार के साथ तेल उत्पादन में सहयोग करना शामिल हो सकता है, जो मौजूदा अमेरिका-वेनेजुएला तेल व्यवस्था के समान होगा।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि यह खबर अनाम स्रोतों के अनुमानों पर आधारित है और वे राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का हिस्सा नहीं हैं। ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं और यह कहना गलत है कि वे किसी एक विकल्प का समर्थन कर रहे हैं।
इस सप्ताह ट्रंप ने न्यूयार्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जहां अन्य राष्ट्रपतियों ने जमीन पर सैनिक भेजने से इनकार किया है, वहीं उनका मानना है कि “शायद इसकी जरूरत न पड़े, लेकिन अगर जरूरत हुई तो यह विकल्प हो सकता है।”
इस बीच यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद से अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर 3,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं और 43 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया है।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हमले शुरू किए थे, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए मिसाइल व ड्रोन हमले जारी रखे हैं।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम की मांग नहीं कर रहा और उसे वॉशिंगटन के साथ बातचीत का कोई कारण नहीं दिखता।
--आईएएनएस
आईएनटी/आरएस/पीयूष
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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