युद्ध में दुश्मन की सबसे बड़ी ताकत मिसाइलें, रडार नहीं उसका इंजन और साथ ही साथ कड़वा सच तो यह भी है कि भारत ने परमाणु बम बनाए तो जरूर। चांद पर तिरंगा भी लहराया। लेकिन जब बात फाइटर जेट इंजन की आई तो हम दशकों तक दुनिया के सामने हाथ फैलाए खड़े थे। लेकिन रूस ने आंखें दिखाई। अमेरिका ने पाबंदियां लगाई और फ्रांस ने भी जेब खाली कर दी थी। लेकिन कैलेंडर पर 15 अगस्त 2026 की तारीख मार्क कर लीजिए क्योंकि इसी दिन भारत अपनी वायु सेना की आजादी का नया घोषणा पत्र लिखने जा रहा है। आपको बता दें कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी कि सीसीएस की मेज़ पर आज वह गुप्त फाइल है जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा चार मुल्कों की लिस्ट में शामिल कर देगी जो अपना इंजन खुद बनाते हैं। सैफरन और साथ ही साथ जीटीआरई का 120 किल न्यूटन का यह महा इंजन जो है वो सिर्फ और सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि यह भारत की संप्रभुता की नई क्रांति है। आलोचकों ने यह कहा था कि इंजन बनाना रॉकेट साइंस से भी मुश्किल है। लेकिन पिछले एक साल में बता दें कि भारत ने पूरा गेम यहां पर पलट कर रख दिया है। अब हम सिर्फ सरकारी फाइल्स और HL के ऊपर भरोसा और निर्भर नहीं है। साथ ही साथ आपको बता दें कि Tata, LNT और BS जैसी जो प्राइवेट कंपनियां हैं अब इस रेस में वो भी कूद चुकी हैं। और ध्यान देने वाली बात यहां पर यह है कि इस डील का सबसे शॉकिंग सच क्या है? आज तक हमने जो भी विदेशी इंजन लिए उनकी चाबी कभी हमारे पास नहीं थी।
आज सफरान डील में भारत 100% इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी कि आईपी का मालिक होगा। यानी कि इंजन का ब्लूप्रिंट, सोर्स कोड सब कुछ भारत का भारत के हाथों में होने वाला है और साथ ही साथ इसमें कोई भी बदलाव करना हो या फिर किसी भी और देश का यहां पर इसको बेचना हो तो हमें फ्रांस से भी एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसे मांगनी नहीं पड़ेगी। और सबसे खौफनाक टेक्नोलॉजी उसके बारे में बात कर लेते हैं। हॉट सेक्शन टेक्नोलॉजी फाइटर जेट इंजन के अंदर का तापमान 2100 केल्विन तक पहुंच जाता है। जहां पर लोहे का पानी बन जाता है। और आपको बता दें कि भारत अब वो सिंगल क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड्स में बनाने जा रहा है जो इस भयंकर आग में भी चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। यह वही आपको बता दें कि टेक है जिसे अमेरिका ने अपनी सबसे करीबी दोस्तों को देने से भी साफ-साफ मना कर दिया था। तो अब सवाल यह है कि यह राक्षसी ताकत जाएगी कहां? तो बता दें कि यह जो ताकत है वो जाएगी हमारे सपनों के विमान एमका में यानी कि एएमसीए में और भारत का पहला फिफ्थ जनरेशन स्टिल्थ फाइटर जेट। एक ऐसा विमान जो दुश्मन के रडार पर एक मच्छर से ज्यादा कुछ नहीं दिखेगा।
आपको बता दें कि सैफरान का यह 120 किलो न्यूटन इंजन ना सिर्फ बेमिसाल ताकत रखता है बल्कि साथ ही साथ इसके लो इंफ्रारेड सिग्नेचर्स दुश्मन की गर्मी खोजने वाली मिसाइलों को भी अंधा बना देगा। योजना यहां पर बिल्कुल साफ है। मतलब प्लान बिल्कुल साफ है। पहले नौ प्रोडक्ट टाइप बनाए जाएंगे और उसके बाद फिर से अपग्रेड कर कर 140 किटन तक इसे लिया जाएगा जो आगे चलकर हमारे सिक्स्थ जनरेशन विमानों की रीड बनेगा। अब आप यहां पर कहेंगे कि हमें इतनी ज्यादा जल्दी क्यों हो रही है? तो जवाब है क्योंकि सीमा पार चीन बैठा है और चीन के पास जे 20 स्टील फाइटर हैं जिसमें से उसका जो 180 किलो वाला न्यूटन वाला WS15 इंजन लगा है। चीन ने रूस से टेक्नोलॉजी चुरा ली है। रिवर्स इंजीनियरिंग की है और साथ ही साथ आज लद्दाख बॉर्डर पर तैनात भी हैं। ईरान इजराइल युद्ध ने भी पूरी दुनिया को यहां पर साबित कर दिया है कि जंग में वही हथियार काम आते हैं जिनका सीधा-सीधा रिमोट कंट्रोल आपके खुद के हाथों में होता है। कावेरी प्रोजेक्ट की पुरानी नाकामियों से सीखकर अब भारत ने भी रिएक्टिव नहीं बल्कि साथ ही साथ प्रोएक्टिव तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। 15 अगस्त 2026 की वो सुबह जब सीसीएस इस फाइल पर दस्तखत करेगी तो फिर वो सिर्फ और सिर्फ एक इंजन को मंजूरी नहीं दे रही होगी।
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