डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार के कृषि बजट 2026 की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट किसानों की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहा और इसके बजाय इसका इस्तेमाल मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्ताधारी सरकार की तारीफ़ करने के लिए किया गया। एक्स पर एक पोस्ट में स्टालिन ने आरोप लगाया कि बजट में सूखे और कुरुवई खेती के मौसम के दौरान किसानों को हुए फसल के नुकसान जैसे अहम मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया गया। स्टालिन ने कहा सूखे की समस्या को हल करने के बजाय, तमिलनाडु कृषि बजट 2026 का इस्तेमाल सिर्फ़ मुख्यमंत्री की तारीफ़ करने और उनकी चापलूसी करने के लिए किया गया।
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के लिए सार्थक कदम उठाने के बजाय सरकार ने सिर्फ़ मौजूदा योजनाओं का नाम बदला है। उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ़ नाम बदलने वाली सरकार बनकर रह गई है। क्या इस सरकार को लगता है कि अपनी योजनाओं पर 'विक्ट्री' (जीत) का लेबल लगाकर उसका काम पूरा हो गया? स्टालिन ने आगे आरोप लगाया कि बजट डेल्टा के उन किसानों को राहत देने में नाकाम रहा है, जिनकी फसलें कुरुवई सीज़न के दौरान बर्बाद हो गई थीं। उन्होंने कहा यह कृषि बजट एक खोखला बजट साबित हुआ है। इसमें डेल्टा के उन किसानों के लिए कुछ भी नहीं है, जिनकी फसलें कुरुवई खेती के सीज़न में बर्बाद हो गईं और जो सरकार से मदद का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
डीएमके प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा में किसानों की चिंताएं उठाती रहेगी। स्टालिन ने कहा विधानसभा के इस पूरे सत्र के दौरान, हमारी पार्टी के सदस्य हमारे महान किसानों की मांगों को ज़ोर-शोर से उठाएंगे। तमिलनाडु के कृषि मंत्री विनोद ने गुरुवार को विधानसभा में कृषि बजट 2026-27 पेश किया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई का विस्तार करने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और फसल बीमा को मज़बूत करने के लिए कई उपायों की घोषणा की, साथ ही 600 करोड़ रुपये के नए 'तमिलनाडु मृदा संरक्षण मिशन' का भी ऐलान किया।
बजट पेश करते हुए विनोद ने कहा कि सिंचाई के विस्तार, मशीनीकरण, सटीक खेती (प्रिसिजन फार्मिंग), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित गवर्नेंस के ज़रिए तमिलनाडु की खेती गुज़ारे लायक खेती से बदलकर एक आधुनिक, तकनीक-संचालित और बाज़ार-उन्मुख क्षेत्र बन गई है। मंत्री ने कहा कि यह बजट सलेम, तंजावुर, वेल्लोर, तिरुनेलवेली, चेन्नई और आस-पास के ज़िलों के किसानों, किसान संगठनों, एग्री-बिज़नेस लीडर्स, उद्यमियों और निर्यातकों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया है। उन्होंने कहा यह कृषि बजट उन बातचीत के दौरान दिए गए सुझावों, विचारों और मांगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
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