नेपाल चुनाव: प्रचंड रुकुम ईस्ट-1 से भारी जीत के साथ हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में लौटे
काठमांडू, 6 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनावों में जीत हासिल करने वाले पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के कुछ टॉप नेताओं में से एक बन गए। उन्हें रुकुम ईस्ट-1 से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुना गया है। उन्होंने चुनाव में 10,240 वोटों से जीत हासिल की। उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) (सीपीएन-यूएमएल) के लीलामणि गौतम को 3,462 वोट मिले।
नेपाल चुनाव आयोग के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के विलय के बाद बनी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के प्रचंड समन्वयक थे, जिसने चुनाव जीत लिया। वहीं, उनकी पार्टी नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल जैसी दूसरी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों ने चुनावों में खराब प्रदर्शन किया।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेन शाह और अमरेश कुमार सिंह के पीछे चल रहे हैं। हालांकि, प्रचंड ने पूर्व माओवादी विद्रोहियों के गढ़ से जीत हासिल की।
कई आलोचक उन पर गोरखा-2 को छोड़ने का आरोप लगाते हैं, जहां से वे 2022 के चुनाव में चुने गए थे, कथित तौर पर सीट खोने के डर से और इसके बजाय रुकुम ईस्ट-1 से चुनाव लड़ा, जिसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता था।
2006 में सशस्त्र विद्रोह छोड़कर व्यापक शांति समझौते के माध्यम से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करने के बाद प्रचंड पहली बार 2008 के संविधान सभा चुनाव में काठमांडू-10 और रोल्पा-2 से चुने गए। उन्होंने बाद में 2013 के दूसरे संविधान सभा चुनाव में सिराहा-5 से जीत हासिल की। 2017 में नए संविधान के लागू होने के बाद आयोजित पहले संसदीय चुनाव में चितवन-3 से जीत हासिल की। 2022 में वे गोरखा-2 से चुने गए।
राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र वे 1996–2006 की सशस्त्र संघर्ष अवधि के दौरान रहे। यहां तक कि जब उनकी पार्टी ने मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया, उनका एजेंडा नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कारक बन गया।
हालांकि, 2008 के चुनावों के बाद उनकी पार्टी की ताकत लगातार कम हुई है, प्रचंड राष्ट्रीय राजनीति में एक अपरिहार्य व्यक्तित्व बने रहे और हाल के वर्षों में कई बार प्रधानमंत्री बने, चाहे वह समर्थन नेपाली कांग्रेस से मिला हो या सीपीएन-यूएमएल से।
--आईएएनएस
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दिल्ली विधानसभा में ‘फांसी घर’ को लेकर बहस तेज, समिति के सामने पेश हुए अरविंद केजरीवाल
Delhi News: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए. यह पेशी विधानसभा परिसर में बने एक पुराने कमरे को लेकर चल रही चर्चा के संदर्भ में हुई. केजरीवाल ने समिति के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह स्थान ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा बताया जाता है और इसे लेकर पहले भी अध्ययन और जांच की गई थी.
फांसी घर के बारे में क्या बोले केजरीवाल
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की इमारत काफी पुरानी और ऐतिहासिक है. उनके अनुसार यह इमारत उस समय बनाई गई थी जब ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाई गई थी. उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उस समय के विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल के प्रयासों से इस इमारत के एक हिस्से के बारे में जानकारी सामने आई थी. उस दौरान यह कहा गया था कि इमारत के एक कोने में एक ऐसा कमरा है जिसे पहले फांसी घर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.
पर्यटकों के लिए खोला गया पुराना कमरा
केजरीवाल के अनुसार उस समय इस विषय पर दस्तावेजों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर जानकारी एकत्र की गई थी. इसके बाद यह तय किया गया कि इस स्थान को लोगों और पर्यटकों के लिए खोला जाए, ताकि देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बारे में जागरूकता बढ़ सके. उन्होंने बताया कि उसी आधार पर उस स्थान को सार्वजनिक रूप से दिखाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी.
समझाई पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
विशेषाधिकार समिति के सामने पेशी के दौरान केजरीवाल ने कहा कि उस समय उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर ही निर्णय लिया गया था. उन्होंने समिति को बताया कि यह पूरा काम उस समय के विधानसभा नेतृत्व और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ था. केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने समिति के सामने अपने पास उपलब्ध जानकारी साझा की और पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि समझाई.
विकास के मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए
पेशी के बाद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की समस्याओं के समाधान और विकास के मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजधानी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अनुभव और सुझाव साझा करना हमेशा जरूरी होता है. उन्होंने यह भी कहा कि वह लंबे समय तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं और अगर विकास से जुड़े किसी विषय पर सुझाव मांगे जाते हैं तो वह अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार रहते हैं.
सुरक्षा व्यवस्था पर AAP ने उठाए सवाल
इस दौरान एक और मुद्दा सुरक्षा से जुड़ा भी सामने आया. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि विधानसभा परिसर में पेशी के दौरान केजरीवाल की सुरक्षा व्यवस्था में कुछ दिक्कतें हुईं. पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केजरीवाल को पहले से उच्च स्तर की सुरक्षा मिली हुई है और ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी सावधानी बरतनी चाहिए.
आगे क्या बोले सौरभ भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज के अनुसार विधानसभा पहुंचने पर केजरीवाल के साथ मौजूद सुरक्षा कर्मियों को परिसर के बाहर ही रोक दिया गया था, जिसके कारण कुछ समय के लिए स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाना जरूरी है. फिलहाल यह मामला विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के विचाराधीन है. समिति इस पूरे मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट के बाद इस विषय पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.
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