पाचन को मजबूत कर दिल की सेहत सुधारता है फालसा, गर्मियों में वरदान से कम नहीं
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सबसे बड़ी चुनौती एनर्जी पाने की होती है। ऐसे में बाजारों में कई ऐसे फल नजर आने लगते हैं, जो शरीर को ठंडक और एनर्जी देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाव में भी मददगार हैं। इनमें से खास और खट्ठा-मिठा फल है फालसा।
गर्मियों में फालसा का सेवन न सिर्फ लू और गर्मी से बचाता है, बल्कि पाचन, डायबिटीज, दिल की सेहत और इम्युनिटी को भी मजबूत बनाता है। फालसा का वैज्ञानिक नाम ग्रेविया एशियाटिका है। यह भारत के शुष्क और अर्द्धशुष्क इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस के अनुसार, फालसा में विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होते हैं। मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम और प्रोटीन भी मौजूद रहते हैं। ये सभी तत्व मिलकर फालसा को एक शक्तिशाली इम्युनिटी बूस्टर बनाते हैं।
गर्मियों में फालसा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है, लू लगने से बचाता है और पसीने के कारण होने वाली कमजोरी को दूर करता है। इसका रस एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है। इसका शरबत पीने से एनर्जी भी मिलती है।
आयुर्वेद के अनुसार, खून की कमी या एनीमिया में पके फालसे का सेवन लाभकारी है। त्वचा की जलन, पेट में जलन, पित्त विकार, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पाचन संबंधी समस्याओं में भी यह रामबाण साबित होता है। फालसा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, कब्ज और दस्त दोनों को नियंत्रित करता है। यह तन मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह कई गंभीर रोगों से बचाव में भी सहायक होता है।
खास बात है कि फालसा को ताजा खाया जा सकता है, इसका जूस बनाया जा सकता है या चाट-सलाद में भी डाला जा सकता है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है, इसलिए कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में खाने से एलर्जी या पेट की हल्की परेशानी हो सकती है। इसलिए पहले थोड़ी मात्रा में आजमाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें।
--आईएएनएस
एमटी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अदाणी समूह बना यूनेस्को के विश्व इंजीनियरिंग दिवस 2026 का आधिकारिक भागीदार
अहमदाबाद, 6 मार्च (आईएएनएस)। अदाणी समूह को सतत विकास के लिए विश्व इंजीनियरिंग दिवस (डब्ल्यूईडी) 2026 का आधिकारिक भागीदार नामित किया गया है। यह दिवस यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) द्वारा घोषित एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जिसे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशंस (डब्ल्यूएफईओ) द्वारा आयोजित किया जाता है।
यह पहली बार है, जब विश्व इंजीनियरिंग दिवस पर इंजीनियरों के प्रयासों को सम्मानित करने के लिए डब्ल्यूएफईओ द्वारा किसी भारतीय संगठन को चुना गया है।
भारत की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट, यूटिलिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर कंपनी ने कहा कि यह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अदाणी समूह के नेतृत्व और बड़े पैमाने पर स्वच्छ, विश्वसनीय और किफायती बिजली आपूर्ति करने की उसकी क्षमता का प्रमाण है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों (सतत विकास लक्ष्य 7) में योगदान देता है।
अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा, “हम यह दिखा रहे हैं कि स्वच्छ ऊर्जा बड़े पैमाने पर होने के साथ-साथ किफायती भी हो सकती है, यह शक्तिशाली होने के साथ-साथ समावेशी भी है। यह दुनिया के लिए भारत का योगदान है और एक ऐसा मॉडल जहां प्रगति और सततता साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। हमारा खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र भारत की जलवायु कार्रवाई का प्रतीक है। यह अदाणी ग्रीन एनर्जी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज की की सामूहिक ताकत को दर्शाता है, जो एकीकृत नवीकरणीय भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।”
‘डब्ल्यूईडी 2026’ का विषय “नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सतत भविष्य के लिए स्मार्ट इंजीनियरिंग है।
नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और बड़े पैमाने पर परिवहन एवं उपयोगिता प्रणालियों के क्षेत्र में अदाणी समूह का कार्य इस दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिससे पता चलता है कि प्रौद्योगिकी-आधारित इंजीनियरिंग वास्तविक परिस्थितियों में सतत विकास को कैसे संभव बना सकती है।
गुजरात में खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना की योजनाबद्ध क्षमता 2029 तक 30 गीगावाट है, जिसे विश्व इंजीनियरिंग संगठन (डब्ल्यूएफईओ) ने अपने विश्व इंजीनियरिंग दिवस 2026 कार्यक्रम के तहत भारत के हरित परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उजागर किया है और इसके विशाल आकार, महत्वाकांक्षा और प्रभाव को दर्शाने वाली एक शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की है।
538 वर्ग किलोमीटर में निर्मित यह परियोजना पेरिस से पांच गुना और लगभग मुंबई शहर के बराबर है। पूर्ण होने पर, यह सभी ऊर्जा स्रोतों में दुनिया का सबसे बड़ा विद्युत संयंत्र होगा।
एजीईएल ने अब तक खावड़ा में 7 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की संचयी क्षमता को परिचालन में ला दिया है और 2029 तक पूरी 30 गीगावाट क्षमता प्रदान करेगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
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