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सड़क हादसे में घायल को मिलेगा डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, जानिए क्या है पीएम राहत योजना

आज हम जिस योजना की बात कर रहे हैं, वह सीधे तौर पर इंसान की जिंदगी बचाने से जुड़ी है. अक्सर सड़क पर होने वाले हादसों में मौत का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि घायल को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता. लोग डरते हैं कि अस्पताल वाले पहले पैसे मांगेंगे और अगर उनके पास पैसे नहीं हुए, तो क्या होगा? इसी डर को दूर करने के लिए सरकार ने 'पीएम राहत योजना' की शुरुआत की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि पैसों की कमी की वजह से किसी भी एक्सीडेंट के शिकार व्यक्ति की जान न जाए. अब आप बिना अपनी जेब की फिक्र किए किसी भी घायल की जान बचा सकते हैं.

इलाज के लिए मिलेंगे डेढ़ लाख रुपये

अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि इस योजना के तहत कितनी मदद मिलती है? तो आपको बता दें कि पीएम राहत योजना के जरिए सड़क हादसे में घायल इंसान को डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. सरकार ने तय किया है कि हादसे के बाद के जो शुरुआती 7 दिन होते हैं, उनमें जो भी खर्च आएगा, उसे सरकार खुद वहन करेगी. चाहे वह दवाइयों का खर्च हो, डॉक्टर की फीस हो या फिर जरूरी जांचें, डेढ़ लाख रुपये तक की सीमा में आपको कुछ भी देने की जरूरत नहीं है. यह नियम इसलिए बनाया गया है क्योंकि एक्सीडेंट के शुरुआती कुछ दिन ही सबसे ज्यादा नाजुक होते हैं और उसी समय सबसे ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है.

बिना पैसे दिए होगा काम

इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से 'कैशलेस' है. यानी आपको अस्पताल में भर्ती होते समय अपनी जेब से एक पैसा भी निकालने की जरूरत नहीं है. अक्सर हम देखते हैं कि प्राइवेट अस्पताल वाले कहते हैं कि "पहले इतने पैसे जमा करो, तभी हम इलाज शुरू करेंगे." लेकिन इस योजना के तहत अस्पताल आपसे पहले पैसे नहीं मांग सकता. आपको बस घायल को वहां पहुंचाना है और अस्पताल को बताना है कि यह केस पीएम राहत योजना के तहत आता है. इसके बाद अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह तुरंत इलाज शुरू करे. पैसों के लेन-देन की जो भी प्रक्रिया होगी, वह सरकार और अस्पताल के बीच होगी, आपको इसमें बीच में पड़ने की जरूरत नहीं है.

इमरजेंसी में तुरंत इलाज शुरू करना होगा

एक्सीडेंट के मामलों में हर एक सेकंड कीमती होता है. इसी को समझते हुए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं. अगर किसी व्यक्ति की हालत बहुत ज्यादा खराब है और उसकी जान खतरे में है, तो अस्पताल को पहले 48 घंटों के भीतर उसे स्टेबल (हालत स्थिर) करने के लिए तुरंत काम शुरू करना होगा. डॉक्टर यह बहाना नहीं बना सकते कि अभी कागज तैयार नहीं हैं या पुलिस नहीं आई है. वहीं, अगर चोट थोड़ी कम है, तो भी 24 घंटे के अंदर पूरा इलाज मिलना तय है. यह नियम इसलिए है ताकि अस्पताल कागजी कार्रवाई के नाम पर कीमती समय बर्बाद न करें.

हादसा होने पर तुरंत करें ये काम

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर सड़क पर हादसा देख लें, तो मदद की शुरुआत कैसे करें? इसके लिए कोई बहुत बड़ा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करें और जानकारी दें. इसके बाद घायल को पास के किसी भी सरकारी अस्पताल या उस प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं जो सरकार की लिस्ट में शामिल हो. वहां पहुंचते ही अस्पताल के कर्मचारी खुद ही अपने कंप्यूटर पोर्टल पर मरीज का नाम और हादसे की जगह जैसी जानकारियां भर देंगे. बस इतना ही काम आपको करना है, बाकी सारा काम अस्पताल और सरकार का सिस्टम संभाल लेगा.

नहीं रुकेगा इलाज

एक और बड़ा डर लोगों के मन में रहता है कि अगर हमारे पास उस समय आधार कार्ड या कोई पहचान पत्र नहीं हुआ, तो क्या इलाज मिलेगा? सरकार ने इस पर बहुत साफ और सख्त निर्देश दिए हैं. अगर आपके पास कोई कागज है, तो अच्छी बात है, उसे दे दें. लेकिन अगर कोई भी पहचान पत्र नहीं है, तो भी अस्पताल इलाज करने से मना बिल्कुल नहीं कर सकता. जान बचाना सबसे पहला और सबसे जरूरी काम है। पहचान की कागजी कार्रवाई बाद में भी आराम से की जा सकती है. इसलिए अगर आपके पास कागज नहीं हैं, तो भी बिना डरे मदद के लिए आगे आएं.

जानिए कहां से आता है इस मुफ्त इलाज के लिए पैसा

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि सरकार इतने लोगों का मुफ्त इलाज आखिर कैसे कर पाएगी? इसके लिए सरकार ने एक अलग फंड बनाया है, जिसे 'मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड' (MVAF) कहते हैं. हम जब भी अपनी गाड़ी का बीमा (Insurance) करवाते हैं या सड़क का टैक्स देते हैं, उसका एक छोटा सा हिस्सा इस फंड में जमा होता है. इसी फंड से सरकार अस्पतालों को पैसे देती है. अगर जिस गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ है उसका बीमा है, तो बीमा कंपनी भी इसमें अपना हिस्सा देती है. यह सारा काम ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होता है ताकि किसी भी तरह की धांधली न हो सके और पैसा सीधे सही जगह पहुंच सके.

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'कागज पर सुझाव' के ठोस नीति में बदलने का तरीका

बीजिंग, 6 मार्च (आईएएनएस)। चीन की राजधानी पेइचिंग में हर साल मार्च में आयोजित एनपीसी (चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा) और सीपीपीसीसी (चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन) के वार्षिक सम्मेलनों को दो सत्र कहा जाता है। यह न सिर्फ़ चीन में अहम राजनीतिक घटना है, बल्कि विदेशी लोगों के लिए चीनी शैली के लोकतंत्र को समझने की खिड़की भी है। विदेशी दोस्तों के लिए चीन में लोकतंत्र कुछ हद तक अमूर्त हो सकता है। वास्तव में दो सत्र केवल गंभीर सम्मेलन स्थल और गरमागरम चर्चा ही नहीं, यह एक उत्कृष्ट तंत्र है, जिससे जनमत को राष्ट्रीय नीति में बदला जा सकता है।

चीनी शैली का लोकतंत्र कोई रस्मी लोकतंत्र नहीं है, जहां लोग मतदान के दौरान जागते हैं और उसके बाद सो जाते हैं। चीनी शैली का लोकतंत्र पूरी श्रृंखला, पूरी प्रक्रिया और सभी पहलुओं में जन लोकतंत्र है। एनपीसी के प्रतिनिधि और सीपीपीसीसी के सदस्य जीवन के सभी क्षेत्रों से आते हैं। वे खुद ही जनता की राय के सेंसर हैं। उनके जरिए जनमत को खेतों से जन वृहद भवन तक पहुंचाया जाता है।

उदाहरण के लिए एनपीसी के प्रतिनिधि, आनह्वेई प्रांत के किसान श्यू चोंगश्यांग अपना जीवन खेतों को समर्पित करते हैं। उन्होंने पाया कि जीवन स्तर के उन्नत होने के चलते ऑर्गेनिक अनाज और तेल की मांग तेज़ी से बढ़ी, लेकिन बाज़ार में जाने-माने ब्रांड की कमी है। इसलिए पिछले साल के दो सत्र के दौरान उन्होंने ऑर्गेनिक उत्पाद के क्षेत्र में सार्वजनिक ब्रांड बनाने का सुझाव प्रस्तुत किया। यह सुझाव श्यू चोंगश्यांग के आस-पास लाखों किसानों की उम्मीदों से भरा है। उन्हें आशा है कि “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़” सचमुच “अमूल्य संपत्ति” में बदल सकेंगे।

इससे भी ज्यादा प्रभावशाली है कि लोकतंत्र के बीज हाई स्कूल में भी बोए जा चुके हैं। शैनशी प्रांत के शीआन के ओशिन नंबर वन हाई स्कूल में मॉडल सीपीपीसीसी क्लब के छात्रों ने कई महीनों के शोध के बाद दो मसौदा प्रस्ताव पूरे किए। एक डिजिटल पठन की साक्षरता में सुधार पर ध्यान देता है, जबकि दूसरा बोलियों के विरासत और संरक्षण पर फोकस करता है। उक्त दो सुझाव सीपीपीसीसी के सदस्यों के जरिए आयोजित हो रहे दो सत्र में पहुंचाए गए। इससे युवाओं की आवाज लोकतांत्रिक माध्यम से सुनाई जा सकेगी। यह लगातार 11वां साल है जब शीआन के ओशिन नंबर वन हाई स्कूल के छात्रों के मसौदा प्रस्ताव को दो सत्र में लाया गया है।

इन कहानियों से चीनी शैली के लोकतंत्र का अंदरूनी स्वभाव दिखता है। यानीकि सुझाव और प्रस्ताव बंद कमरे में हुई बातचीत का नतीजा नहीं होता, बल्कि एनपीसी के प्रतिनिधियों और सीपीपीसीसी के सदस्यों द्वारा लोगों की आवाज़ सुनने का परिणाम है। आंकड़ों के अनुसार 14वीं एनपीसी के तीसरे पूर्णाधिवेशन के दौरान प्रतिनिधियों ने कुल 9,160 सुझाव पेश किए। हर मुद्दे के पीछे नागरिकों की रोजी-रोटी से जुड़ी खास मांग होती है।

सुझाव देना तो बस पहला कदम है। चीनी शैली के लोकतंत्र की ताकत इस बात में है कि इन कागज़ पर लिखी आवाज़ को ठोस नीति में कैसे बदला जाता है। बताया जाता है कि पिछले दो सत्र में प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सभी 9,160 सुझावों को सुलझाने की ज़िम्मेदारी 211 विभागों ने ली। अब सभी का निपटारा हो चुका है और प्रतिनिधियों को जबाव दिया गया है।

जैसा कि पिछले साल के दो सत्र के दौरान क्वांगतोंग, शांगहाई और स्छ्वान से आए कई प्रतिनिधियों ने विनिर्माण उद्योग के विकास में एआई की भूमिका बढ़ाने पर सुझाव पेश किए। उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन सुझावों को अपनाकर एआई प्लस विनिर्माण की विशेष कार्रवाई की कार्यान्वयन संबंधी राय जारी की। इसमें 74 नीतिगत कदम और 177 ठोस राय शामिल हैं। प्रतिनिधियों का विचार विनिर्माण उद्योग का उच्च गुणवत्ता वाला विकास बढ़ाने की राष्ट्रीय नीति में बदला गया।

वहीं, आम लोगों के लिए लोकतंत्र सिर्फ़ प्रक्रिया के बारे में नहीं है, बल्कि नतीजों के बारे में भी है। चीनी शैली के लोकतंत्र का असर आखिर में लोगों की परेशानी को हल करने में दिखना चाहिए।

इसके लिए कृषि और ग्रामीण मामला मंत्रालय ने प्रतिनिधियों के सुझाव को अपनाकर कृषि मेला और उपभोग का प्रोत्साहन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। इससे कृषि उत्पादों की बिक्री 30 अरब युआन से ज़्यादा हो गई। तमाम प्रतिनिधियों ने हनान प्रांत के ह्वाईह नदी में सुधार करने का सुझाव प्रस्तुत किया। इससे 10 अरब युआन से अधिक निवेश वाली परियोजना का निर्माण नवंबर 2025 में शुरू हुआ।

इस साल के दो सत्र की ओर देखें। 15वीं पंचवर्षीय योजना की मसौदा रूपरेखा की समीक्षा मुख्य एजेंडा है। अगले पांच सालों में चीन में विकास की योजना प्रतिनिधियों और सदस्यों की चर्चा और सुझाव से धीरे-धीरे साफ़ होती जा रही है। दो सत्र में दिखाया गया है कि लोकतंत्र एक चलने वाली और गहरी होती प्रक्रिया है, जो जनता से आती है और जनता के पास वापस जाती है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

डीकेपी/

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