पश्चिम एशिया में इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है और इसका प्रभाव पूरे विश्व पर दिखाई देने लगा है। युद्ध के सातवें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। इस संघर्ष में अब कई देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर संकट की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच, इजराइल की सेना ने आज एक वीडियो जारी किया जिसमें तेहरान में स्थित एक भूमिगत सैन्य बंकर पर किए गए हवाई हमले को दिखाया गया है। इजराइली रक्षा बलों के अनुसार 50 लड़ाकू विमानों ने मिलकर उस गुप्त बंकर को ध्वस्त कर दिया जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मौजूद थे। सेना का कहना है कि यह बंकर तेहरान में ईरानी शासन के नेतृत्व परिसर के नीचे बनाया गया था और इसे आपात स्थिति में सैन्य संचालन करने के लिए तैयार किया गया था। इजराइल ने बताया कि इस अभियान के दौरान बंकर को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया ताकि उसका उपयोग युद्ध संचालन के लिए न किया जा सके। हालांकि खामेनेई की हत्या के बाद भी यह परिसर ईरानी शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक प्रमुख आधार के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
इस बीच, इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में कई और ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। शुक्रवार तड़के शहर के आसमान में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजराइली सेना का कहना है कि वह ईरान के शासन से जुड़ी सैन्य संरचनाओं को निशाना बना रही है, विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली से जुड़े भंडारण स्थलों को। सेना के अनुसार कई भूमिगत और जमीन के ऊपर बने मिसाइल भंडार नष्ट कर दिए गए हैं।
युद्ध के कारण तेहरान में सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इंटरनेट निगरानी समूहों के अनुसार शहर में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग एक प्रतिशत तक गिर गई है जिससे जानकारी का प्रवाह लगभग रुक गया है। आमतौर पर भीड़भाड़ से भरी रहने वाली सड़कों पर अब सन्नाटा है, जबकि सुरक्षा बलों ने पूरे शहर में कड़ी निगरानी कर रखी है।
उधर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल पर मिसाइलें दागी हैं। शुक्रवार को तेल अवीव के ऊपर कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजराइली सेना ने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए उसकी रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी गई है।
दूसरी ओर, युद्ध का दायरा अब लेबनान तक फैल गया है। ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में इजराइल पर रॉकेट हमले किए हैं। इसके जवाब में इजराइल ने लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं। राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिया क्षेत्र में हुए हमलों में कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं। इस क्षेत्र में संघर्षविराम के बाद यह सबसे भीषण हमला माना जा रहा है।
लगातार हमलों के कारण लेबनान में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। बेरूत के कई हिस्सों में विस्थापित लोग सड़कों पर रात बिताने के लिए मजबूर हैं। इजराइल ने पहले ही नागरिकों को उत्तरी क्षेत्रों की ओर सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया।
इस बीच, संघर्ष के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई देश अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने लगे हैं। इंडोनेशिया ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया गया है कि वहां करीब तीन सौ से अधिक इंडोनेशियाई नागरिक मौजूद हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं। इसी तरह अजरबैजान ने भी तेहरान स्थित अपने दूतावास और तबरीज के वाणिज्य दूतावास से राजनयिक कर्मचारियों को निकालने का निर्णय लिया है।
उधर, इस युद्ध का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष जारी रहा तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं गंभीर संकट में आ सकती हैं। उनका कहना है कि खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातक देशों को उत्पादन रोकना पड़ सकता है और कच्चे तेल की कीमतें डेढ़ सौ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। कतर की एक प्रमुख गैस सुविधा पर ड्रोन हमले के बाद वहां से आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो चुकी है।
उधर, अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरान के कई मोबाइल मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार इन हमलों के बाद ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में काफी कमी आई है।
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है जिसमें इजराइल ईरान के गहरे भूमिगत मिसाइल बंकरों को निशाना बना रहा है। इस संघर्ष में ईरान के पास मौजूद मिसाइलों की वास्तविक संख्या और उनकी क्षमता युद्ध की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध तेजी से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलता जा रहा है। कई देशों की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और विश्व के नेता इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे विश्व के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
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