ईरान युद्ध के बीच भारत के पास तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार: सरकार
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंकाओं के बीच भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही, तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के बाहर के देशों से भी आयात बढ़ाकर आपूर्ति में आई कमी को पूरा कर रही हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिलहाल भारत ऊर्जा आपूर्ति के मामले में आरामदायक स्थिति में है। उन्होंने बताया कि हमारे पास होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में फंसे भंडार से कहीं अधिक ऊर्जा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि देश के पास कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर आपूर्ति की कमी पूरी की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत थी। लेकिन अब इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा। फरवरी में रूस से भारत ने करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन) कच्चा तेल आयात किया।
सरकारी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एमआरपीएल रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और एलपीजी बनाने वाली सभी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, इसलिए उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अधिकारी ने बताया कि सरकार जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों का इस्तेमाल भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए करेगी, ताकि किसी भी तरह की कमी न हो।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें।
इसके तहत रिफाइनरियों से कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में किया जाए, ताकि घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की कमी न हो।
मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर असर पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का अहम मार्ग) से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
इस युद्ध के चलते दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक कतर से भी गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी
मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। ईरान में जन्मीं और भारतीय सिनेमा में अपना नाम बना रही अभिनेत्री मंदाना करीमी ने हाल ही में ईरान की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने ईरान के हालात को लेकर गहरा दुख जताया।
अभिनेत्री ने ईरान की महिलाओं और लोगों पर हो रहे अत्याचारों की गहरी पीड़ा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैंने ये बातें सिर्फ सुनी नहीं हैं, बल्कि अपनी जिंदगी में जी हैं। मेरा जन्म ईरान में हुआ था और मैं 18 साल की उम्र तक वहीं रही हूं। करीब चार साल पहले तक मेरे पास ईरान का पासपोर्ट भी था। इसलिए ये मेरे अपने अनुभव है, कोई सुनी-सुनाई कहानी नहीं।
मंदाना करीमी ने कहा, जब मैं ईरान छोड़कर बाहर आई, तब मुझे वहां की असल स्थिति का पता चला। मेरे कई दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ लोगों को तो फांसी तक दे दी गई है। 8 जनवरी को हुई सामूहिक हत्याएं बेहद दर्दनाक थीं। मैं चाहती हूं कि आप इसे हमारे नजरिए से भी देखें। एक ईरानी महिला के तौर पर, जिसने वो जिंदगी जी है, मुझे पता है कि ये शासन कितना क्रूर हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले 48 साल से पूरा ईरान इस शासन से आजादी की कोशिश कर रहा है। 8 और 9 जनवरी को लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन शासन ने एक ही दिन में कई लोगों को मार दिया। उन्होंने कहा, वहां के लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी और कुछ लोगों को मदद भी मिली।
अभिनेत्री मंदाना करीमी ने कहा, इसलिए मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि इसे इस नजर से भी देखिए। सिर्फ यह मत पूछिए कि लोग युद्ध क्यों चाहते हैं, बल्कि यह समझने की कोशिश कीजिए कि वे इस समय क्या महसूस कर रहे हैं। लोग यह क्यों कहते हैं कि इजराइल और अमेरिका ईरान पर हमला करे या देश को तबाह कर दे।
उन्होंने आगे कहा, ईरान की महिलाओं ने जो दर्द सहा है, वह कल्पना से भी परे है। मंदाना ने अपनी खुशकिस्मती बताई कि वे 18 साल की उम्र में वहां से निकल आईं। वे कहती हैं, हर दिन जब मैं अपने दोस्तों और परिवार से वहां की तस्वीरें और खबरें देखती हूं, तो मुझे लगता है कि मैं कितनी खुशकिस्मत थी कि 18 साल की उम्र में वहां से निकल आई, क्योंकि मैं भी महसा अमीनी में से एक हो सकती थी, जो 8 जनवरी को सड़कों पर निकले थे और फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौटे और इतना ही नहीं, उनके माता-पिता को तो यह भी नहीं पता कि उनके बच्चों की लाश कहां है।
महसा अमीनी ईरान की एक 22 वर्षीय कुर्द मूल की महिला थीं, जिनकी 2022 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। अभिनेत्री ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि कई महिलाएं मुझसे सवाल पूछती हैं, तुम कैसी महिला हो? तुम्हें उन बच्चों की परवाह नहीं जो स्कूल पर हुए हमले में मारे गए?
तो मैं उनसे पूछती हूं, जब मैं जनवरी, फरवरी और मार्च में सड़कों पर लोगों से अपील कर रही थी कि ईरान की आवाज बनो, तब आप कहां थीं? तब आप सब चुप थीं और अब अचानक सबकी राय बन गई है। इसलिए नहीं, धन्यवाद।
--आईएएनएस
एनएस/वीसी
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