भारत के 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 17 प्रतिशत योगदान देने की उम्मीद: आईएमएफ
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि में 17 प्रतिशत योगदान देने की उम्मीद है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
आईएमएफ की शीर्ष 10 देशों की सूची में अन्य देशों की बात करें तो अमेरिका से वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके बाद इंडोनेशिया 3.8 प्रतिशत, तुर्किए 2.2 प्रतिशत, सऊदी अरब 1.7 प्रतिशत और वियतनाम 1.6 प्रतिशत योगदान दे सकते हैं। वहीं नाइजीरिया और ब्राजील दोनों का योगदान लगभग 1.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
इस लिस्ट में जर्मनी 10वें स्थान पर है और उससे वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 0.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके अलावा यूरोप के अन्य देश आईएमएफ की शीर्ष 10 सूची में शामिल नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की 2025 की आर्थिक विकास दर का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में आईएमएफ ने कहा कि यह संशोधन चालू वित्त वर्ष, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त होगा, की चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए किया गया है।
आईएमएफ के अनुसार, अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि इसमें थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विकास का प्रमुख इंजन बना रहेगा।
आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है। इसके पीछे व्यापार तनाव में कमी, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), से जुड़े निवेश में तेजी जैसे कारक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आईएमएफ के अनुसार, भारत में महंगाई दर 2025 में गिरावट के बाद फिर से लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी बताया गया है, जिससे घरेलू मांग को भी मजबूती मिल सकती है।
हालांकि आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि एआई से उत्पादकता में तेजी आने के कारण निवेश में कुछ कमी आ सकती है और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो सकती हैं। इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
फोनपे का मर्चेंट नेटवर्क 47 मिलियन बिजनेस तक पहुंचा, डीआरएचपी में मिली डायवर्सिफाइड मॉनेटाइजेशन की जानकारी
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। फोनपे लिमिटेड अपने प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की तैयारी कर रही है, उसके अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में मर्चेंट इकोसिस्टम के विशाल पैमाने और मॉनेटाइजेशन के बारे में जानकारी दी गई है।
फोनपे कोई मुफ्त सेवा नहीं है, बल्कि इसका मर्चेंट इंफ्रास्ट्रक्चर 47 मिलियन व्यवसायों और लाखों फिजिकल पेमेंट डिवाइसों द्वारा संचालित एक अरबों रुपए के रेवेन्यू इंजन में विकसित हो चुका है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास जमा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि फोनपे ने लगभग पूरे भारतीय बाजार में अपनी पहुंच बना ली है।
30 सितंबर, 2025 तक, फोनपे के पंजीकृत व्यापारियों की संख्या 47.19 मिलियन तक पहुंच गई, जो भारत के सभी पिन कोडों के 98.61 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं। 31 मार्च, 2025 तक, यह आधार भारत की कुल ट्रेड और सर्विसेज मर्चेंट आबादी का 77 प्रतिशत से 80 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
मार्च 2025 में मंथली एक्टिव मर्चेंट्स की संख्या 11.31 मिलियन थी, जो देश के सभी एक्टिव यूपीआई मर्चेंट्स का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा था।
मार्च 2023 में डेली एक्टिव मर्चेंट इंगेजमेंट 44.18 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2025 तक 60.77 प्रतिशत हो गई।
फोनपे का फिजिकल फुटप्रिंट इसकी सदस्यता से होने वाली आय का एक प्रमुख कारण है। वर्तमान में तैनात 9.19 मिलियन डिवाइस केवल भुगतान उपकरण से कहीं अधिक कार्य करते हैं; स्मार्टस्पीकर एक संचार माध्यम के रूप में काम करता है, जो व्यापारियों को व्यावसायिक अपडेट और अलर्ट प्रदान करता है। इस हार्डवेयर नेटवर्क का रखरखाव 25,657 टीम सदस्यों और 31,000 से अधिक नियुक्त एजेंटों की एक विशाल टीम द्वारा किया जाता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार पर केंद्रित हैं।
डीआरएचपी में सबसे तेजी से विकास करने वाला क्षेत्र शायद मर्चेंट लेंडिंग है। आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, फोनपे अपने 47 मिलियन व्यापारियों के लेनदेन डेटा का लाभ उठाकर साझेदार ऋणदाताओं को बिना किसी गारंटी के ऋण प्रदान करता है।
ऋण वितरण वित्त वर्ष 2023 में 0.11 बिलियन रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 45.07 बिलियन रुपए हो गया। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही ऋण आय 2,880.87 मिलियन रुपए तक पहुंच गई है, जो पिछले पूरे वर्ष की आय का लगभग 88 प्रतिशत है।
अकेले मर्चेंट पेमेंट्स सेगमेंट ने वित्त वर्ष 2025 में 19,910.36 मिलियन रुपए की आय अर्जित की, जो फोनपे के कुल परिचालन आय का लगभग 28 प्रतिशत है। मर्चेंट टोटल पेमेंट वैल्यू (टीपीवी) सालाना 15 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचने के साथ, कंपनी ने अपने विशाल भुगतान नेटवर्क को सफलतापूर्वक एक उच्च-मूल्य वाले वित्तीय सेवा मंच में परिवर्तित कर दिया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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