भू-राजनीतिक तनाव और कंपनियों के Q2 नतीजों से तय होगी Share Market की चाल
नयी दिल्ली, एक नवंबर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से संघर्ष की आशंका बढ़ने सहित भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। इसके अलावा, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों और व्यापक आर्थिक आंकड़ों की घोषणाओं पर भी बाजार के निवेशकों की नजर रहेगी।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘इस सप्ताह बाजार का ध्यान सितंबर तिमाही के नतीजों, प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगा। निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन का आकलन करेंगे और यह देखेंगे कि क्या उनकी आय में लगातार वृद्धि, लाभ मार्जिन में मजबूती और मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि बैंकों के नतीजों से ऋण वृद्धि, जमा जुटाने और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता का पता चलेगा, जबकि वाहन, उपभोक्ता और औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों के नतीजे घरेलू मांग की स्थिति का व्यापक आकलन करने में मदद करेंगे। मिश्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।
इससे आयातित महंगाई, रुपये की विनिमय दर और कंपनियों के लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल, विदेशी संस्थागत निवेशकों का निवेश और मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव भी निकट भविष्य में बाजार की धारणा तथा हालिया तेजी के बने रहने को प्रभावित करेंगे। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘इस सप्ताह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के साथ अमेरिका और भारत के खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) के आंकड़ों पर भी नजर रहेगी।
कंपनियों के तिमाही नतीजों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, आईटीसी, डाबर, अपोलो हॉस्पिटल्स, बीएसई, कमिंस इंडिया और हिंडाल्को प्रमुख रहेंगी।’’ इस सप्ताह ल्यूपिन, एनएसई, भारतीय स्टेट बैंक, अपोलो टायर्स, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), ओएनजीसी और टाइटन सहित कई अन्य कंपनियां भी अपने तिमाही नतीजे घोषित करने वाली हैं। इस बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर पर सोमवार को निवेशकों की नजर रहेगी। कंपनी ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 29,550 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो बीते वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही के मुकाबले 33.8 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी के तेल से रसायन कारोबार को वैश्विक स्तर पर ईंधन के बढ़े हुए मार्जिन का फायदा मिला, जबकि दूरसंचार कारोबार की वृद्धि ने खुदरा कारोबार के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन की भरपाई की। जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को बताया कि सितंबर, 2026 तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 13.7 प्रतिशत बढ़कर 8,389 करोड़ रुपये रहा। यह वृद्धि ग्राहकों की संख्या बढ़ने, प्रति ग्राहक औसत आय में सुधार और डिजिटल सेवाओं में अच्छी वृद्धि के कारण हुई।
पिछले सप्ताह की शुरुआत में शानदार सूचीबद्धता के बाद सितंबर तिमाही के नतीजे कंपनी का पहला तिमाही प्रदर्शन हैं। ऑनलाइन कारोबार और संपत्ति प्रौद्योगिकी कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया के घटनाक्रम प्रमुख बाहरी बने रहेंगे।’’ उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों का रुख वैश्विक महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदों को भी प्रभावित करेगा। इसका असर अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल, डॉलर और उभरते बाजारों में पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,335.7 अंक यानी 1.82 प्रतिशत चढ़ा, जबकि एनएसई का निफ्टी 453.1 अंक यानी दो प्रतिशत के लाभ में रहा।
अक्टूबर में GST Collection 23 प्रतिशत उछलकर 2.31 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
नयी दिल्ली, एक नवंबर देश का कुल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अक्टूबर में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। घरेलू गतिविधियों और आयात से होने वाले राजस्व में मजबूत वृद्धि के चलते जीएसटी संग्रह में यह उछाल दर्ज किया गया है। सरकार की ओर से रविवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
अक्टूबर लगातार दूसरा महीना है, जब सकल जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। यह जीएसटी संग्रह का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इससे पहले अप्रैल में रिकॉर्ड करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था।
चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर के दौरान कुल जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस वित्त वर्ष में अबतक की सबसे तेज वृद्धि दर है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में घरेलू बिक्री से जीएसटी संग्रह 16 प्रतिशत बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं, आयात से प्राप्त राजस्व में 42 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया।
अक्टूबर के कुल जीएसटी संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) का योगदान 42,935 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) का 51,340 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का योगदान 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस दौरान जीएसटी रिफंड भी सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड के समायोजन के बाद अक्टूबर में शुद्ध जीएसटी संग्रह 26 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 13.2 प्रतिशत बढ़कर 14.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं, इस अवधि में शुद्ध जीएसटी संग्रह 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार एवं कर विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा ने कहा कि अक्टूबर के जीएसटी आंकड़े त्योहारी सीजन में मांग में आई तेजी को दर्शाते हैं।
इस दौरान आमतौर पर उपभोक्ताओं का खर्च, खुदरा गतिविधियां और विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं की आवाजाही बढ़ती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में भी संग्रह का बेहतर प्रदर्शन प्रमुख आर्थिक केंद्रों में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाता है। मिश्रा ने कहा, ‘‘अब ध्यान घरेलू राजस्व वृद्धि को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए कि जीएसटी 2.0 के लाभ से कर अनुपालन बेहतर हो, इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया सुगम बने और कारोबारियों को रिफंड जल्द मिले।’’ ईवाई इंडिया के कर भागीदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि अक्टूबर, 2026 का जीएसटी संग्रह वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
राजस्व में मासिक आधार पर लगातार वृद्धि से खपत की मजबूत स्थिति और कर अनुपालन में सुधार का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा, ‘‘आगे त्योहारी सीजन के कारण मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है और अगले महीने भी जीएसटी संग्रह अच्छा रह सकता है। कारोबारियों को इस दौरान अपने कर अनुपालन और लेखा मिलान की प्रक्रियाओं को मजबूत बनाए रखना चाहिए, ताकि इस वृद्धि का लाभ आगे भी मिलता रहे।’’ डेलॉयट के भागीदार (अप्रत्यक्ष कर) महेश जयसिंह ने कहा कि पिछले साल के मध्य में कर दरों में बड़ी कटौती के बावजूद राजस्व संग्रह में लगातार मजबूती से जीएसटी परिषद को सुधारों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा और गुंजाइश मिल रही है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की हालिया 57वीं बैठक इस सुधार प्रक्रिया की गति को दर्शाती है। सुधारों का जोर अब कर प्रणाली को सरल बनाने, रिफंड में तेजी लाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया सुगम करने और करदाताओं की मुश्किलें कम करने पर है।
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