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ईरान-चीन के दुष्प्रचार का मुकाबला करने को कूटनीति व संदेशों का इस्तेमाल कर रहा अमेरिका

वाशिंगटन, 6 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश उप सचिव सारा रोजर्स ने एक संसदीय सुनवाई के दौरान सांसदों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान और चीन जैसे देशों के दुष्प्रचार और प्रभाव अभियानों का मुकाबला करने के लिए अपने सार्वजनिक कूटनीति प्रयासों को मजबूत कर रहा है। साथ ही, वैश्विक दर्शकों को वाशिंगटन की विदेश नीति की व्याख्या भी कर रहा है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने रोजर्स ने कहा कि सार्वजनिक कूटनीति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक प्रमुख साधन बनी हुई है, खासकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी हैं।

रोजर्स ने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, अमेरिका ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान में सैन्य अभियान चला रहा है ताकि ईरानी शासन से अमेरिका, हमारी सेनाओं और हमारे साझेदारों को होने वाले खतरों को खत्म किया जा सके।”

उन्होंने सांसदों को बताया कि स्टेट डिपार्टमेंट की तत्काल प्राथमिकता इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों और एक्सचेंज प्रोग्राम के प्रतिभागियों की सुरक्षा है।

उन्होंने कहा, “हमारे वैश्विक सार्वजनिक मामलों के संचारक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सोशल मीडिया और स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम के माध्यम से सभी अमेरिकी नागरिकों तक समय पर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश पहुंचे।”

रोजर्स ने कहा कि संघर्ष बढ़ने के बाद से विभाग पहले ही हजारों अमेरिकियों को क्षेत्र से बाहर निकलने में मदद कर चुका है।

उन्होंने कहा, “28 फरवरी से अब तक विभाग ने मध्य पूर्व से 17,500 से अधिक अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है।”

तत्काल संकट से आगे बढ़ते हुए, रोजर्स ने कहा कि प्रशासन कूटनीति और रणनीतिक संचार का उपयोग करके दुष्प्रचार का मुकाबला करने और दुनिया में अमेरिका की सकारात्मक छवि को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अमेरिका की सबसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता है और हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

रोजर्स ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सक्रिय रूप से वकालत कर रहा है और ऐसे सेंसरशिप प्रयासों का विरोध कर रहा है जो अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को प्रभावित कर सकते हैं। वाशिंगटन अपने विरोधियों के प्रचार का मुकाबला करने की क्षमता भी मजबूत कर रहा है।

उन्होंने समिति से कहा, “हम अमेरिका के संकल्प की स्पष्टता बढ़ा रहे हैं, अमेरिका विरोधी प्रचार का मुकाबला कर रहे हैं और विदेशी प्रभाव अभियानों को चुनौती दे रहे हैं।” रोजर्स ने अमेरिका की सार्वजनिक कूटनीति के दो मुख्य स्तंभों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “पहला स्तंभ शैक्षिक और सांस्कृतिक मामलों के ब्यूरो के माध्यम से दीर्घकालिक संबंध बनाना है।” हम एक्सचेंज प्रोग्राम, अंग्रेज़ी भाषा पहलों और सांस्कृतिक साझेदारियों के वैश्विक नेटवर्क को बनाए रखते हैं, जो हमें लाखों उभरते नेताओं से जोड़ते हैं।

उन्होंने बताया कि फुलब्राइट, गिलमैन और इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों ने भविष्य के विदेशी नेताओं के साथ संबंध विकसित करने में मदद की है। दूसरा स्तंभ वैश्विक संदेश और संचार से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, “ग्लोबल पब्लिक अफेयर्स का ब्यूरो हर डिजिटल माध्यम का उपयोग करके वैश्विक मीडिया नैरेटिव को आकार देता है और अपने प्रमुख दर्शकों तक पहुंचता है।” हम उभरते रुझानों की पहचान करने और प्रभावशीलता को मापने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत एनालिटिक्स का उपयोग कर रहे हैं।

रोजर्स ने कहा कि विभाग ने एकीकृत ब्रांडिंग दिशानिर्देश लागू किए हैं ताकि विदेशों में चल रहे अमेरिकी वित्तपोषित कार्यक्रमों को स्पष्ट रूप से अमेरिकी नेतृत्व से जोड़ा जा सके। हमने अमेरिकी झंडे पर केंद्रित एक नई एकीकृत ब्रांडिंग गाइडलाइन लागू की है।

सार्वजनिक कूटनीति का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विदेश नीति लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पश्चिमी गोलार्ध में हम अवैध आप्रवासन को समाप्त करने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को बाधित करने में योगदान दे रहे हैं।”

“इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हम अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व को उजागर कर रहे हैं, और मध्य पूर्व तथा अफ्रीका में हम शांति और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने वाली साझेदारियां बना रहे हैं।”

उन्होंने खेल कूटनीति को भी वैश्विक स्तर पर अमेरिकी जुड़ाव को बढ़ावा देने का एक उभरता हुआ माध्यम बताया। रोजर्स ने कहा, “हम वर्ल्ड एक्सपो में यूएसए पवेलियन और एनएफएल के साथ साझेदारी के माध्यम से खेल कूटनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका में होने वाले बड़े वैश्विक खेल आयोजन भी इस outreach को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। फीफा विश्व कप और लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों से पहले का यह खेलों का दशक हमारे प्रभाव को बढ़ाने के लिए एक अनूठा अवसर है।

“हम इस अवसर का उपयोग वैश्विक मंच पर अमेरिकी उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए कर रहे हैं।”

--आईएएनएस

एलकेजे/आरएस/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ट्रंप ने दिए क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में बदलाव के संकेत

वाशिंगटन, 6 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ प्रगति हो रही है और विदेश नीति से जुड़े मौजूदा मुद्दों से निपटने के बाद क्यूबा को लेकर नई पहल की जा सकती है।

व्हाइट हाउस में मेजर लीग सॉकर की चैंपियन टीम इंटर मियामी के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने यह बात कही। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की तारीफ भी की और क्यूबा का जिक्र किया।

ट्रंप ने कहा, “मार्को, आप शानदार काम कर रहे हैं। और क्यूबा नाम की जगह पर भी आपने बहुत अच्छा काम किया है।”

उन्होंने संकेत दिया कि क्यूबा से जुड़ी कुछ नई बातें जल्द सामने आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिकी प्रशासन दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान दे रहा है। इस समय अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान में शामिल हैं।

ट्रंप ने कहा कि पहले इस मुद्दे को पूरा करना जरूरी है, लेकिन इसके बाद क्यूबा को लेकर भी कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ समय की बात है, जब कई लोग क्यूबा की ओर फिर से जा सकते हैं।

हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि उनकी सरकार क्यूबा को लेकर कौन से ठोस कदम उठा सकती है। लेकिन उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला कि वाशिंगटन की नीति में कुछ बदलाव संभव है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका में रहने वाले कई लोगों का क्यूबा से अभी भी गहरा संबंध है और भविष्य में दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर अलग से जश्न मनाया जाएगा और इसके लिए प्रशासन कुछ हफ्तों का इंतजार करना चाहता है।

यह कमेंट तब आया जब ट्रंप एक ग्रुप को एड्रेस कर रहे थे जिसमें इंटर मियामी के को-ओनर जॉर्ज मास भी शामिल थे, जिनका परिवार क्यूबा से यूनाइटेड स्टेट्स आ गया था।

कार्यक्रम के दौरान जॉर्ज मास ने अपने परिवार की कहानी और अमेरिका में क्यूबा से आए लोगों के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता आजादी की तलाश में क्यूबा छोड़कर अमेरिका आए थे।

मास ने कहा कि इसी सोच ने उनके परिवार को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि इंटर मियामी परियोजना भी उन प्रवासी परिवारों के सपनों और मूल्यों से प्रेरित है, जो बेहतर अवसर की तलाश में अमेरिका आए थे।

ट्रंप ने यह भी कहा कि कई लोग जो दशकों पहले क्यूबा छोड़कर चले गए थे, वे भविष्य में वहां वापस जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उम्मीद है कि वे वहां बसने के लिए नहीं जाएंगे।

राष्ट्रपति ने क्यूबा से जुड़े संभावित फैसलों की समयसीमा या प्रकृति के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।

अमेरिका और क्यूबा के संबंध पिछले कई दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1959 में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में हुई क्यूबा की क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने क्यूबा पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनमें से कई आज भी लागू हैं।

--आईएएनएस

एएस/

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