इंडिया प्राइड अवॉर्ड के पांचवें सीजन का आयोजन:दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के दिग्गजों को सम्मानित किया
5 मार्च को दिल्ली में इंडिया प्राइड अवॉर्ड के पांचवें सीजन का आयोजन हुआ। इस दौरान दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के उन दिग्गजों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपने मेहनत और उत्कृष्ट कार्यों से देश के विकास को एक नई दिशा दी है। इंडिया प्राइड अवॉर्ड के तहत दैनिक भास्कर समूह देश के हर कोने से ऐसे लोगों को ढूंढता है, जो अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण और अतुलनीय काम कर रहे हैं। इस अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया थे। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने कार्यक्रम में मनसुख मांडविया का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद मांडविया ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक सेवा, नवाचार या उद्यम से जुड़े लोगों को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर दैनिक भास्कर के नेशनल पॉलिटिकल एडिटर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया भी मौजूद थे। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि उन वास्तविक नायकों को पहचान देने का राष्ट्रीय मंच है, जिन्होंने अपने संकल्प, परिश्रम और समर्पण से भारत की प्रगति को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा- इस अवॉर्ड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देश के हर कोने से ऐसे व्यक्तित्वों को सामने लाता है, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के, चुपचाप अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दे रहे हैं। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्थान, नवाचार या उद्यमिता, यह मंच उन सभी को सम्मानित करता है, जो प्रेरणा की सच्ची मिसाल हैं। पवन अग्रवाल ने आगे कहा कि दैनिक भास्कर का सदैव यह प्रयास रहा है कि ऐसे मंचों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तियों को प्रकाश में लाया जाए और उनके कार्यों को राष्ट्रीय पहचान मिले। उन्होंने चीफ गेस्ट मनसुख मांडविया का आभार जताते हुए कहा कि उनका इस मंच पर आना न केवल इस आयोजन की प्रतिष्ठा को बढ़ाता है, बल्कि देशभर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्यरत व्यक्तियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। वहीं, कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस अवॉर्ड समारोह के लिए दैनिक भास्कर समूह का धन्यवाद किया। आपका चयन तब हुआ होगा, जब आपने अपने क्षेत्र में कुछ अलग किया होगा। मुझे भी बचपन में सम्मान मिला था, उसी से मेरा भरोसा हुआ कि मंच पर बोल सकता हूं। उन्होंने कहा- सम्मान का महत्व होता है, जब आपमें कुछ करने का जज्बा है, तब आप सफल होंगे। आपकी सफलता समाज का कल्याण करेगी ही, लेकिन ये सफलता, आपकी विशेषता, आपका अनुभव राष्ट्र निर्माण में भी भूमिका निभाएगी। मांडविया ने अवार्डियों से आगे कहा कि विकसित भारत के लिए उन्हें सारथी बनना होगा। उन्होंने कहा- हमारे निर्णय लेने में राष्ट्र सबसे पहले होना चाहिए। प्रधानमंत्री का सपना है कि 2047 तक हमें विकसित राष्ट्र बनना है। ये 25 साल का समय अहम है। जब देश विकसित राष्ट्र बनेगा, तब उसे आज का युवा ही जिएगा। इस दिशा में आज आपको यहां इकट्ठा करके दैनिक भास्कर ने महत्वपूर्ण काम किया है। टैलेंट का सम्मान करने से किसी व्यक्ति का हौसला बढ़ता है।
ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला:कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार
अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रु. तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा गणना करने को कहा। ट्रम्प ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट-1977 के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अमेरिकी कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द करते हुए कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है राष्ट्रपति के पास नहीं। तब रिफंड पर स्पष्टता नहीं थी। टेनेसी की एटमस फिल्ट्रेशन की याचिका पर जज ने रिफंड का आदेश दिया है। क्लिंटन ने की थी ईटन की नियुक्ति, टैरिफ रिफंड के केस भी वही सुनेंगे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1999 में जज ईटन की नियुक्ति की थी। ईटन ने कहा कि टैरिफ रिफंड की सुनवाई वही करेंगे, ताकि रिफंड प्रक्रिया उलझे नहीं। ट्रम्प सरकार के पास अब ये 3 विकल्प 1. अपील: सरकार ऊपरी कोर्ट में चुनौती दे। 2. स्टे: सरकार अस्थायी रोक मांग सकती है। 3. देरी: कस्टम्स में लिक्विडेशन (अंतिम हिसाब) के बाद आयातक को दावा/चुनौती के लिए 180 दिन मिलते हैं। इससे सरकार भी रिफंड 6 माह तक टाल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प को लगाई थी फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। ट्रम्प ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया था सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज होकर ट्रंप ने अगले ही दिन ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया था। ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर नया टैरिफ लगा दिया था। यह 15% टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो गया है। इससे पहले उन्होंने कल टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा था- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून के इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं। ------------------- ट्रम्प के टैरिफ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद:समझौते से पीछे हटने वाले देशों को ट्रम्प की धमकी, कहा- गेम मत खेलो, ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें…
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