दिल्ली से वाराणसी सिर्फ 3.5 घंटे में, यूपी-बिहार से गुजरेगी बुलेट ट्रेन; फ्लाइट से भी कम होगा किराया?
उत्तर प्रदेश और बिहार के रेल यात्रियों के लिए आने वाले वर्षों में सफर का तरीका बदल सकता है. दिल्ली से लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, वाराणसी और पटना तक की यात्रा अब घंटों के बजाय कुछ ही समय में पूरी करने की योजना है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को लेकर जानकारी दी. प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और पटना होते हुए गुवाहाटी तक जाएगा.
रेल मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ना है. खास बात यह है कि सरकार की योजना बुलेट ट्रेन का किराया हवाई यात्रा से कम रखने की है, ताकि मध्यमवर्गीय परिवारों और आम यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सके.
क्या है बुलेट ट्रेन का नॉर्दर्न कॉरिडोर?
नॉर्दर्न कॉरिडोर एक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है, जो देश की राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश, बिहार और असम के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा. इसके रूट में दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, पटना और गुवाहाटी जैसे शहर शामिल होंगे.
इस कॉरिडोर के बनने से धार्मिक, औद्योगिक, शैक्षणिक और व्यापारिक महत्व वाले शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है. अभी इन शहरों के बीच यात्रा में कई घंटे लगते हैं. बुलेट ट्रेन शुरू होने पर यह समय काफी कम हो सकता है.
हालांकि, अभी इसे प्रस्तावित परियोजना के रूप में समझना चाहिए. इसके निर्माण की समयसीमा, स्टेशन, विस्तृत रूट और किराये जैसी जानकारियों के लिए आगे की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा.
दिल्ली से आगरा 59 मिनट, कानपुर 1 घंटे 45 मिनट में
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कॉरिडोर के जरिए अलग-अलग शहरों के बीच यात्रा में लगने वाले संभावित समय का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक:
दिल्ली से आगरा: 59 मिनट
दिल्ली से कानपुर: 1 घंटा 45 मिनट
दिल्ली से लखनऊ: 2 घंटे 12 मिनट
काशी से लखनऊ: 1 घंटा 21 मिनट
काशी से पटना: करीब 1 घंटा
दिल्ली से वाराणसी: 3 घंटे 33 मिनट
ये समय प्रस्तावित नेटवर्क को लेकर रेल मंत्री की ओर से बताए गए अनुमान हैं. वास्तविक यात्रा का समय ट्रेन की रफ्तार, स्टॉपेज और अंतिम परिचालन योजना पर निर्भर करेगा.
'दिल्ली में काम करें, कानपुर में खाएं ठग्गू के लड्डू'
रेल मंत्री ने बुलेट ट्रेन के फायदे को समझाने के लिए कानपुर के मशहूर ठग्गू के लड्डू का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली से कानपुर जाने में केवल 1 घंटा 45 मिनट लगेंगे. ऐसे में कोई व्यक्ति दिल्ली से कानपुर जाकर वहां के मशहूर लड्डू खा सकता है और वापस दिल्ली लौटकर अपना काम शुरू कर सकता है.
इस उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि हाई-स्पीड रेल से शहरों के बीच की दूरी का अर्थ बदल जाएगा. नौकरी, कारोबार या निजी काम के लिए दूसरे शहर जाने वाले लोगों को वहां रुकने या लंबी यात्रा की योजना बनाने की जरूरत कम पड़ सकती है.
अयोध्या, काशी और लखनऊ को मिलेगा बड़ा फायदा
इस कॉरिडोर का धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी खास महत्व हो सकता है. अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों को एक हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ने की योजना है.
इससे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा में समय बचाने का अवसर मिलेगा. इसके अलावा पूर्वांचल के लोगों को भी फायदा हो सकता है. रेल मंत्री के मुताबिक, काशी से लखनऊ की दूरी बुलेट ट्रेन से करीब 1 घंटे 21 मिनट में पूरी की जा सकेगी.
#WATCH | Varanasi, UP: Union Railway Minister Ashwini Vaishnaw says, "The Northern Corridor for the bullet train, approved by our Prime Minister, will provide benefits to the nation for decades, and indeed, for up to a century. With the bullet train, travel times will be… pic.twitter.com/owXA0NjKrg
— ANI (@ANI) October 31, 2026
बिहार और गुवाहाटी तक भी पहुंचेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
नॉर्दर्न कॉरिडोर का दायरा उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा. प्रस्तावित रूट में वाराणसी के बाद पटना और फिर गुवाहाटी को भी शामिल किया गया है. इससे बिहार और पूर्वोत्तर भारत के लिए तेज रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है.
रेल मंत्री के अनुसार, काशी से पटना की यात्रा करीब एक घंटे में पूरी हो सकेगी. इससे दोनों शहरों के बीच पढ़ाई, इलाज, कारोबार और रोजगार के लिए आने-जाने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है. गुवाहाटी तक नेटवर्क पहुंचने से पूर्वोत्तर क्षेत्र को भी बड़े शहरों से जोड़ने की योजना को गति मिलेगी.
क्या बुलेट ट्रेन का किराया फ्लाइट से कम होगा?
इस परियोजना को लेकर सबसे अहम बात किराये से जुड़ी है. रेल मंत्री ने कहा है कि बुलेट ट्रेन का किराया फ्लाइट से भी कम रखा जाएगा. इसका मकसद इसे केवल अमीर या उच्च आय वाले यात्रियों तक सीमित न रखना है.
अगर किराया वाकई हवाई यात्रा से कम रहता है, तो नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, छोटे कारोबारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह आकर्षक विकल्प बन सकता है. हालांकि, अभी टिकट की कीमतों का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है. इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अलग-अलग दूरी के लिए यात्रियों को कितना भुगतान करना होगा.
क्या बदल जाएगी उत्तर भारत की परिवहन व्यवस्था?
नॉर्दर्न कॉरिडोर के निर्माण से उत्तर भारत में यात्रा, पर्यटन और कारोबार को नई गति मिल सकती है. तेज कनेक्टिविटी से बड़े शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने, रोजगार के नए अवसर बनने और छोटे शहरों को विकास से जोड़ने में मदद मिल सकती है.
लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती भी होगी. इसके लिए जमीन अधिग्रहण, निर्माण, तकनीकी व्यवस्था और भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी. साथ ही यात्रियों की सुरक्षा और किराये को सुलभ बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा.
फिलहाल नॉर्दर्न कॉरिडोर की घोषणा ने उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के यात्रियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि परियोजना का विस्तृत खाका कब सामने आता है और निर्माण कार्य कब शुरू होता है.
यह भी पढ़ें - यूपी के लिए शुरू होगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, टाइम टेबल जारी; दिल्ली से वाराणसी का सफर होगा आसान
कॉलेज के सामने मिली युवती की लाश, इलाके में मचा हड़कंप, पुलिस कर रही मामले की जांच
Indore Girl Death News: इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में सुगनी देवी कॉलेज के सामने बंद दुकानों के पास युवती का शव मिला।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
IBC24











