जेन-जी प्रदर्शन के बाद नेपाल में पहली बार संसदीय चुनाव, 23 हजार केंद्रों पर वोटिंग शुरू
काठमांडू, 5 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में गुरुवार को संसदीय चुनाव के लिए गुरुवार को सुबह सात बजे से 77 जिलों में 23 हजार केंद्रों पर वोटिंग शुरू हो गई है, जो शाम 5 बजे तक चलेगी। यह पिछले साल सितंबर में जेन-जी विद्रोह के बाद पहला संसदीय चुनाव है।
इस चुनाव में 18,903,689 रजिस्टर्ड वोटर हैं, जिनमें 9,663,358 पुरुष, 9,240,131 महिलाएं और 200 अन्य शामिल हैं। इलेक्शन कमीशन ने बताया है कि 186,142 तत्कालीन वोटर रजिस्टर्ड हुए हैं।
मतदाता निचले सदन के 275 सदस्यों का चुनाव करेंगे। कुल सीटों में से 165 सांसद ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत चुने जाएंगे, जबकि शेष 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाएंगी।
कमीशन ने कहा कि एफपीटीपी सिस्टम के तहत कुल 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
8-9 सितंबर 2025 को हुए जेन जी आंदोलन में 77 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली ने इस्तीफा दे दिया था। इस आंदोलन के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्ति को 84 अरब नेपाली रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
विरोध प्रदर्शनों के तुरंत बाद देश की राजनीतिक दिशा पर अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था। हालांकि, प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने राजनीतिक स्थिरता बहाल करने के लिए कदम उठाया और नए चुनावों की घोषणा की।
कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने नागरिकों से बिना किसी डर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अपील की है। वोटरों को दिए एक मैसेज में चुनाव आयुक्त भंडारी ने कहा कि चुनाव कराने और उन्हें मैनेज करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने वोटरों को अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
भंडारी ने कहा, क्योंकि चुनाव शासन के एक रिप्रजेंटेटिव सिस्टम की नींव हैं और लोगों को अपनी पसंद के रिप्रजेंटेटिव के जरिए शासन करने के अधिकार को वैधता और भरोसा देते हैं, इसलिए मैं सभी वोटरों से ईमानदारी से गुजारिश करता हूं कि वे गुरुवार को अपने-अपने पोलिंग सेंटर पर आएं और पूरे भरोसे के साथ अपना वोट डालें।
उन्होंने आगे कहा कि कमीशन यह पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है कि चुनाव साफ, स्वतंत्र, निष्पक्ष और डर मुक्त माहौल में हों।
इसमें यह भी कहा गया है कि पोलिंग बूथ का सेटअप और मैनेजमेंट, पहुंच सुनिश्चित करने के उपाय, महिला-पुरुष और दिव्यांगों के लिए सही सुविधाएं, और चुनाव कर्मचारियों की तैनाती जैसे इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की नई एआई ऊर्जा पहल, टेक कंपनियां खुद बनाएंगी बिजली
वाशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में तेजी और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमतों में कटौती के उद्देश्य से नई पहल का ऐलान किया है। इसके लिए दुनिया की कुछ सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को एक साथ लाया गया है, जिसे व्हाइट हाउस ने रेटपेयर प्रोटेक्शन प्लेज नाम दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक राउंडटेबल बैठक में कहा कि यह समझौते बड़े एआई डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को मौजूदा पावर ग्रिड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बिजली खुद बनाने या उसके लिए भुगतान करने की इजाजत देगा। ट्रंप ने कहा कि ये बेहद उत्साहजनक समय हैं।
इस पहल के तहत गूगल, मेटा, अमेजन वेब सर्विसेज, ओपन एआई और ओरेकल जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अपने बढ़ते एआई ऑपरेशन के लिए जरूरी ऊर्जा उत्पादन को फंड करने का वादा किया है। ट्रंप ने कहा, इस नए समझौते के तहत बड़ी टेक कंपनियां एआई डेटा सेंटर के लिए जरूरी अतिरिक्त बिजली प्रोडक्शन की लागत को पूरी तरह से कवर करने का वादा कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से आम अमेरिकियों के लिए बिजली की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, इसका मतलब है कि टेक कंपनियों और डेटा सेंटर्स को अपनी जरूरत की बिजली मिल पाएगी और इसके बावजूद उपभोक्ताओं के बिजली बिल नहीं बढ़ेंगे।
ट्रंप ने कहा कि कंपनियां अपने प्रोजेक्ट्स के लिए नई ऊर्जा क्षमता का निर्माण करेंगी। उन्होंने कहा, अपना खुद का पावर प्लांट बनाइए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह नीति सुनिश्चित करेगी कि उभरती तकनीकों में अमेरिका की बढ़त बनी रहे। उन्होंने कहा, अमेरिका एआई की दुनिया में बहुत आगे है। हम चीन से आगे हैं।
दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ने से डेटा सेंटर की मांग में भी तेजी आई है, जिन्हें एडवांस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम को पावर देने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। दुनिया भर की सरकारें तेजी से इस बात पर विचार कर रही हैं कि उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमतें बढ़ाए बिना एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को समर्थन देने के लिए बिजली उत्पादन और ग्रिड क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि यह नीति अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, जो देश एआई में नेतृत्व करेगा, वही सैन्य महाशक्ति बनेगा।
गूगल की प्रेसिडेंट रूथ पोराट ने कहा कि कंपनी अपने डेटा सेंटर निवेश के साथ-साथ बिजली उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, अकेले टेक्सास में ही हमने ग्रिड में 7800 मेगावाट से अधिक नई ऊर्जा उत्पादन क्षमता जोड़ने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किए हैं।
मेटा एग्जीक्यूटिव डिना पॉवेल मैककॉर्मिक ने कहा कि कंपनी अपने डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा की पूरी लागत खुद वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि हमारे डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा की पूरी लागत हम ही कवर करें।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के निवेश से कुछ समुदायों में ऊर्जा लागत कम करने में मदद मिली है।
--आईएएनएस
डीसीएच
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