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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की सुरक्षा में चूक:हेलिकॉप्टर के पास से उड़ी कमर्शियल फ्लाइट, , FAA ने जांच शुरू की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ले जा रहे मरीन वन हेलिकॉप्टर की उड़ान के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तय नियम के मुताबिक रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों को नहीं रोका, जिससे एक यात्री विमान और मरीन वन के बीच तय सुरक्षा दूरी कम हो गई। हालांकि, व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा कभी खतरे में नहीं थी। व्हाइट हाउस से उड़ान भरते ही हुई चूक वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार दोपहर मरीन वन व्हाइट हाउस से नियमित उड़ान पर रवाना हुआ। इसी दौरान रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानों को रोका नहीं गया, जबकि राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर की उड़ान के समय ऐसा करना अनिवार्य है। एक साथ उड़े दोनों विमान कमर्शियल उड़ानों पर रोक नहीं लगने के कारण एक यात्री विमान भी लगभग उसी समय उड़ान भर गया। इससे दोनों विमानों के बीच एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तय न्यूनतम सुरक्षा दूरी (स्टैंडर्ड सेपरेशन) नहीं रह सकी। व्हाइट हाउस बोला- राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित थे व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, "मरीन वन दुनिया के सबसे अनुभवी पायलट उड़ाते हैं। उड़ान के दौरान किसी भी समय राष्ट्रपति की सुरक्षा खतरे में नहीं थी।" संघीय विमानन प्रशासन (FAA) इस प्रक्रियात्मक चूक की जांच कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों विमान टक्कर की सीधी स्थिति में नहीं थे, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होने की वजह से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है। क्या कहते हैं नियम?

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पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगा​न तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट... बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा... खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर...यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में TTP के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही TTP ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब TTP काबिज है। आए दिन TTP के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ... हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में TTP के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल TTP फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि TTP और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।

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IND vs SL: प्रैक्टिस मैच में पराक्रम दिखाया तो टीम इंडिया को क्या मिलेगा? 3 दिन में सुलझेंगी ये 3 गुत्थियां

India Test Warm Up Match: भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के खिलाफ 2 मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले एक प्रैक्टिस मैच खेलने वाली है. इस मुकाबले में भारतीय टीम 3 बड़े सवालों के जवाब ढूंढने उतरेगी. Fri, 07 Aug 2026 09:12:06 +0530

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