9000mAh बैटरी में सस्ता हुआ Redmi Note 17 Pro स्मार्टफोन
भारत में Redmi Note 17 Pro के बेस वेरिएंट (8GB रैम और 128GB स्टोरेज) की कीमत 36,999 रुपये से शुरू होती है। वहीं, इसके 8GB+256GB रैम और स्टोरेज वाले टॉप वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये है। कंपनी SBI, Axis Bank और IDFC First Bank के कार्ड्स पर 3,000 रुपये तक का इंस्टेंट डिस्काउंट या HDB ...
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‘यूपी में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई तो DM की तय होगी जवाबदेही’, CEO नवदीप रिणवा ने दिया सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है. अब वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, आवेदनों के निस्तारण में देरी या निगरानी में लापरवाही मिलने पर केवल निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि जिला निर्वाचन अधिकारियों (DM/DEO) की जवाबदेही भी तय की जाएगी. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलों के अधिकारियों को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं.
नए निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रतिदिन ECI-NET पोर्टल पर अपने लॉगिन से प्रवेश कर मतदाता सूची से संबंधित कामकाज की निगरानी करनी होगी. इसका उद्देश्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, लंबित आवेदनों का समय पर निस्तारण करना और मतदाता सूची में गलतियों को रोकना है.
फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 पर बढ़ेगी निगरानी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि फॉर्म-6, फॉर्म-6A, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से जुड़े सभी आवेदनों की नियमित समीक्षा की जाए. इन फॉर्मों के जरिए नए मतदाताओं का पंजीकरण, प्रवासी मतदाताओं से संबंधित आवेदन, मतदाता सूची से नाम हटाने और विवरण में संशोधन जैसे कार्य किए जाते हैं.
यदि किसी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाता है या गलत अधिकारी के पास भेजा जाता है, तो उसे तत्काल सही अधिकारी को सौंपकर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि ECI-NET पर दर्ज कर्मचारियों की प्रोफाइल, मोबाइल नंबर, पदनाम और अंतिम लॉगिन की स्थिति की जांच करें.
लॉगिन आईडी, पासवर्ड और OTP साझा करने पर रोक
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए चुनाव अधिकारियों को अपने लॉगिन क्रेडेंशियल सुरक्षित रखने की हिदायत दी गई है. किसी भी अधिकारी को अपनी यूजर आईडी, पासवर्ड या OTP किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना होगा.
इससे पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कंप्यूटर सहायकों द्वारा भौतिक रूप से प्राप्त मतदाता आवेदन फॉर्म की फीडिंग पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए थे. ऐसे फॉर्म बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा BLO ऐप के माध्यम से डिजिटाइज किए जाने हैं. 10 अप्रैल 2026 के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फॉर्मों की जांच के निर्देश भी दिए गए थे.
BLO की कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे में पूरी करनी होगी
मतदाताओं की सुविधा के लिए ECI-NET ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध 'Book a Call with BLO' सुविधा को लेकर भी सख्ती की गई है. इसके तहत नागरिकों की कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए. यदि कोई BLO मतदाता से संपर्क किए बिना ही पोर्टल पर 'Contacted' या 'Unavailable' विकल्प चुनता है अथवा कॉल रिक्वेस्ट का समय पर जवाब नहीं देता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
पीलीभीत की गड़बड़ी के बाद बढ़ी सख्ती
पीलीभीत में मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के बाद चुनाव आयोग ने प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाई थी. इस मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर सहायक के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी. अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मतदाता सूची से जुड़े प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए.
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम कदम
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों का पंजीकरण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. चुनाव आयोग का जोर इस बात पर है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटे नहीं और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से शामिल न हो.
नवदीप रिणवा के निर्देशों से साफ है कि मतदाता सूची तैयार करने और अपडेट करने की प्रक्रिया में अब जिला स्तर पर भी जवाबदेही बढ़ाई जा रही है. इससे प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
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