विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा व कल्याण नयी दिल्ली के लिए “सर्वोच्च प्राथमिकता” है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच, ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने सैकड़ों भारतीय छात्रों को तेहरान से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया।
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया, “पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इस पर सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक संपर्क किया जा सकता है।”
अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए थे जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई। इसके बाद ईरान ने इजराइल के साथ ही कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और ‘‘उनकी सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। हम ऐसे किसी भी घटनाक्रम के प्रति उदासीन नहीं रह सकते जो उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करे।’’
इसने कहा कि नयी दिल्ली स्थिति पर लगातार नजर रखेगी और राष्ट्रीय हित में आवश्यक निर्णय लेगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह क्षेत्र की सरकारों और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के संपर्क में है।
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भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजर ने ईरान पर हाल में किए गए हमलों के समय और परिस्थितियों को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान तय नहीं की गई थी। उनके अनुसार उस समय ऐसी किसी कार्रवाई की स्पष्ट योजना नहीं थी और यह कदम बाद में परिस्थितियों के आधार पर उठाया गया।
एक साक्षात्कार में राजदूत ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय हालात, सुरक्षा सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि ईरान के खिलाफ जिस सैन्य कार्रवाई की बाद में खबर सामने आई, उसके बारे में उस समय कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयां अक्सर तत्काल उपलब्ध अवसरों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर तय की जाती हैं।
राजदूत के अनुसार जब प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा पूरी कर भारत लौट चुके थे, तभी इजराइल को एक ऐसा सैन्य अवसर दिखाई दिया, जिसे उपयुक्त मानते हुए कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों की योजना कई बार बहुत कम समय में बनाई जाती है और यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान ही ईरान पर हमले का निर्णय ले लिया गया था।
हम आपको याद दिला दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इजराइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, तकनीक, कृषि, नवाचार और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते भी हुए, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करना है।
मोदी की यात्रा के कुछ ही समय बाद पश्चिम एशिया में तनाव अचानक बढ़ गया। इजराइल और अमेरिका से जुड़ी सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के खिलाफ हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया और कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई।
रुवेन अजर ने कहा कि ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण इजराइल लगातार अपनी सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करता रहा है। ईरान की गतिविधियों और उसकी रणनीतियों को समझने के लिए इजराइल ने अपनी खुफिया प्रणाली को काफी उन्नत बनाया है। इसके साथ ही आधुनिक हथियार प्रणालियों और सुरक्षा तकनीकों में भी भारी निवेश किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अब केवल पारंपरिक हथियारों से ही नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक, उन्नत रक्षा प्रणालियों और नई वैज्ञानिक क्षमताओं के माध्यम से भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। मिसाइल रक्षा प्रणाली और लेजर आधारित सुरक्षा तकनीक जैसे उपायों के जरिये हमलों को रोकने की क्षमता विकसित की जा रही है।
राजदूत ने बताया कि इजराइल ने अपने मित्र देशों के साथ सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को साझा किया है। भारत के साथ भी इस विषय पर संवाद जारी है। उनके अनुसार इजराइल मानता है कि ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती हैं, इसलिए इस विषय पर सतर्क रहना जरूरी है।
बहरहाल, ईरान पर हमले और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद पैदा हुई परिस्थितियों ने पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि इजराइल के राजदूत ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से जुड़ी कोई पूर्व निर्धारित योजना नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय था।
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