सफर को आसान बनाने के लिए कई लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह अपनी कार से ट्रैवल करना पसंद करते हैं। ऐसे में कई बार लंबी ड्राइविंग के बाद पीठ और टेल बोन में दर्द या गर्दन में अकड़न की समस्या महसूस होती है। ड्राइव करते समय एक ही पोजिशन में लंबे समय तक बैठे रहने या झटके लगने की वजह से यह समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको भी यह समस्या होती है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप इस समस्या से कैसे बच सकते हैं।
ड्राइविंग पीठ को क्यों पहुंचाती है नुकसान
लगातार बैठे रहना
घंटों तक एक ही जगह पर बैठने से रीढ़ की डिस्क पर दबाव पड़ता है।
गलत पोस्चर
झुककर बैठने से गर्दन और कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
झटके लगना
ऊबड़-खाबड़ सड़कें औऱ गाड़ी की कंपन से रीढ़ की स्पाइन में चोट आ सकती है।
गतिहीनता होना
जब लंबे समय तक मूवमेंट नहीं होता है, तो ब्लड सर्कुलेशन रुकता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
बरतें ये सावधानियां
सही पोस्चर है जरूरी
बैठने से पहले पीछे की जेब से फोन या वॉलेट जैसी चीजों को निकाल दें। स्टेयरिंग व्हील से सही दूरी पर बैठें और सीट को थोड़ा सा पीछे झुकाकर रखें। वहीं जरूरत पड़े तो लम्बर सपोर्ट पिलो का इस्तेमाल करें।
ब्रेक लें
लगातार गाड़ी न चलाएं। हर 1.5 से 2 घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें। गाड़ी से बाहर निकलें, स्ट्रेचिंग करें औऱ थोड़ा सा टहलें। ऐसा करने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है और साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।
रखरखाव और आराम
आपको ऐसी कार चुननी चाहिए, जिसकी सीटें कंफर्टेबल हों। गाड़ी के शॉक एब्जॉर्बर और टायरों को दुरुस्त रखें। जिससे झटके कम लगें। वहीं गाड़ी चलाते समय अचानक ब्रेक लगाने से बचना चाहिए और पैरों को पैडल पर कंफर्टेबल रखें।
ऐसे करें ड्राइविंग
ड्राइविंग के दौरान पूरी तरह से जकड़ कर न बैठें। हर 15-20 मिनट में बैठने की स्थिति को थोड़ा सा बदलें। वहीं अगर हो सके तो लंबी ड्राइविंग की जिम्मेदारी को आपस में बांट लें।
पहले से दर्द है तो क्या करें
अगर आप पहले से साइटिका या स्लिप डिस्क जैसी समस्या से परेशान हैं, तो तो आपको ये टिप्स अपनाने चाहिए।
हीट और कोल्ड थेरेपी
ब्रेक के दौरान ठंडी या गर्म सिकाई करें। सर्दियों में हीटेड सीट के इस्तेमाल से आपको राहत मिल सकती है।
सपोर्टिक एक्सेसरीज
टेल बोन के दर्द से राहत पाने के लिए आप कॉक्सिक्स कुशन या कमर के लिए सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
दवा
आप डॉक्टर की सलाह पर पेन रिलीफ दवा ले सकते हैं।
कब लें डॉक्टर से सलाह
बता दें कि दर्द को नजरअंदाज करने की गलती करने से स्थिति गंभीर बन सकती है। अगर आपको ड्राइविंग के बाद कुछ लक्षण दिखते हैं, तो आपको फौरन स्पाइन एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।
हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना।
दर्द कुछ दिनों से ज्यादा समय तक बना रहे।
सीधे खड़े होने या चलने में परेशानी होना।
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आज पूरे देशभर में होली का पर्व मनाया जा रहा है। हर जगह रंगों की बौछार और खुशियों के साथ जश्न मनाया जा रहा है। त्योहार के दिन हवा में रंगों के साथ मुंह में मीठे और तीखे पकवानों की मिठास भी घुलने लगती है। होली के मौके पर करीब सभी घरों में गुजिया मठरी, दही-भल्ले और भी कई पकवान खाए जाते हैं। इस दौरान लोगों का हाजमा जरुर बिगड़ जाता है। कई लोगों को ज्यादा या मसालेदार खाना खाने के बाद गैस, अपच या पेट में सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में स्वादिष्ट लेकिन भारी भोजन के साथ कुछ पौष्टिक पेय पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद रहता है। आगे हम आपको ऐसी ही कुछ हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
छाछ
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, होली की मिठाई, तले-भुने खाने और ठंडाई के बीच ब्लोटिंग, एसिडिटी और अपच को दूर करने के लिए गट हेल्थ को बेहतर रखने वाले ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करें। छाछ एक हल्का और फायदेमंद पेय विकल्प है, जिसे भोजन के साथ लिया जा सकता है। इसमें पुदीना, काला नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर इसका स्वाद और गुण दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। चाहें तो इसमें थोड़ी सी अदरक या कुछ करी पत्ते भी डाल सकती हैं। यह मिश्रण पाचन प्रक्रिया को सुधारने में मदद करता है और शरीर द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।
जीरे का पानी
एक गिलास पानी में एक टीस्पून जीरा डालकर उबालें। इसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाएं और इसे गुनगुना ही पिएं। यह डाइजेशन को बेहतरीन बनाता है और गैस को दूर करता है और पेट का एसिड बैलेंस होता है।
आंवला जूस
आंवले का जूस सेहत के लिए तो अच्छा होता ही है। आप आंवले के जूस को शहद और नींबू के साथ लेने से भी पाचन बेहतर करता है। ये विटामिन-सी और फाइबर से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।
नारियल पानी
नारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसका सेवन शरीर को तुरंत तरावट और पर्याप्त हाइड्रेशन देता है, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया भी सहज हो सकती है। यह पाचन तंत्र को संतुलित रखने में सहायक है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में भी मदद करता है।
सौंफ का पानी
एसिडिटी की समस्या के लिए सबसे फायदेमंद हैं सौंफ का पानी। यह ब्लोटिंग और सांसों की दुर्गंध दूर करता है। गुनगुने पानी में 1 टीस्पून सौंफ के बीज उबालकर पिएं। इससे आपको आराम मिलेगा और गैस भी नहीं बनेगी।
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