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Iran News | Israel Iran War | America Iran News | Ali Khamenei Death | US Iran War | Donald Trump

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जस्टिस नागरत्ना बोलीं-जज फैसला देते वक्त करियर की न सोचें:अलोकप्रिय फैसलों से न डरें, पद की शपथ-न्यायिक धर्म का पालन करें

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि न्यायाधीशों को अपने फैसले देते समय करियर पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता नहीं करनी चाहिए। भले ही अलोकप्रिय निर्णय पदोन्नति या कार्यकाल विस्तार को प्रभावित करें, फिर भी उन्हें अपने पद की शपथ और न्यायिक धर्म का पालन करना चाहिए। मंगलवार को केरल हाई कोर्ट में जस्टिस टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर स्मृति व्याख्यान में उन्होंने ‘परिवर्तनकारी संवैधानिकता’ और ‘मूल संरचना सिद्धांत’ के संदर्भ में न्यायिक समीक्षा के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सामूहिक हित के नाम पर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मूल संरचना सिद्धांत संविधान की न्यूनतम सीमाएं तय करता है, जबकि परिवर्तनकारी संवैधानिकता उसे आगे बढ़ने की दिशा देती है। इन सीमाओं की निगरानी न्यायपालिका द्वारा न्यायिक समीक्षा के जरिए ही संभव है। जस्टिस नागरत्ना के संबोधन की बड़ी बातें… असहमति वाले फैसले भी न्यायिक स्वतंत्रता का हिस्सा उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को अपने सहकर्मियों से अलग राय रखने और उसे स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अलग या असहमति वाले फैसले न्यायिक बौद्धिक स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। न्यायिक राय किसी समझौते का दस्तावेज नहीं, बल्कि संवैधानिक विश्वास की स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है। अपने संबोधन में जस्टिस नागरत्ना ने जस्टिस टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर को न्याय और समानता के प्रति समर्पित न्यायाधीश बताया। उन्होंने कहा कि उनकी विनम्रता, संवेदनशीलता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। ………………. यह खबर भी पढ़ें… जस्टिस नागरत्ना बोलीं- सरकारी संस्थाएं बेकार केस लड़ रहीं: देश का पैसा और कोर्ट का वक्त बर्बाद हो रहा, इससे बेहतर मध्यस्थता का रास्ता अपनाएं जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सरकारी संस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि वे ऐसे मुकदमे लड़ रही हैं, जिनमें जीत की कोई संभावना नहीं होती। इससे देश के संसाधनों की बर्बादी हो रही है और अदालतों का कीमती समय भी खराब हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की जज 27-28 सितंबर को भुवनेश्वर में हुए राष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन 2025 में शामिल हुई थी। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

सेमीफाइनल से पहले पिच क्यूरेटर पर भड़के कोच गौतम गंभीर, जानें क्या है पूरा मामला ?

गुरुवार, 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप का दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा। वहीं इस मुकाबले से पहले वानखेड़े की पिच चर्चा में है जिससे विवाद शुरू हो गया है। 

दरअसल, मुंबई के वानखेड़े की पिच पर हरी घास नजर आ रही है। पिच को देखकर साफ लग रहा है कि तेज गेंदबाजों को इससे काफी फायदा मिलेगा। अगर इसी पिच पर भारत और इंग्लैंड का सेमीफाइनल खेला जाता है तो गेंदबाज यहां हावी रह सकते हैं। सोशल मीडिया पर जो तस्वीर वायरल है उसमें टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर पिच क्यूरेटर से नाखुश नजर आ रहे हैं। 

टीम इंडिया लगातार वानखेड़े में लगातार अभ्यास कर रही है। वहीं 3 मार्च को भी टीम ने अभ्यास किया इस दौरान हेड कोच गौतम गंभीर भी टीम के साथ मौजूद थे। गंभीर ने इस दौरान पिच क्यूरेटर से मुलाकात की। इसमें दिलचस्प बात ये है कि वह काफी नाखुश दिखे। माना जा रहा है कि इसका कारण वानखेड़े की पिच ही है। 

बता दें कि, इस मुकाबले में इंग्लैंड की टीम भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। वानखेड़े की पिच वैसे तो बल्लेबाजों के लिए मुफीद होती है लेकिन अगर पिच पर हरी घास रहती है तो इस बात तेज गेंदबाजों को यहां मदद मिल सकती है। इंग्लैंड की टीम में कई दमदार खिलाड़ी हैं और आईपीएल में वे यहां लंबे समय से खेल रहे हैं। ऐसे में कंडीशंस को अच्छे से जानते हैं। यही कारण है कि इंग्लैंड की टीम भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। 
Wed, 04 Mar 2026 16:31:28 +0530

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