Responsive Scrollable Menu

Vishwakhabram: China में 9 जनरलों का पत्ता साफ, Jinping ने करीबी सैन्य अधिकारी Zhang Shengmin को सत्ता की चाबी देकर पूरी दुनिया को चौंकाया

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष नेतृत्व में लगातार हो रही बर्खास्तगियों, भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और सैन्य अधिकारियों की छंटनी के बीच राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष जनरल झांग शेंगमिन को कम्युनिस्ट पार्टी के शक्तिशाली पोलित ब्यूरो में शामिल कर लिया है। बीजिंग में संपन्न हुई कम्युनिस्ट पार्टी की चार दिवसीय पांचवीं पूर्ण बैठक (Fifth Plenum) में लिया गया यह फैसला चीन की सैन्य व्यवस्था में जारी असाधारण उथल-पुथल और जिनपिंग की सत्ता को और अधिक केंद्रीकृत करने की रणनीति का स्पष्ट संकेत है। यह नियुक्ति इसलिए भी असाधारण है क्योंकि 1994 के बाद पहली बार किसी नेता को पार्टी कांग्रेस के बीच के कार्यकाल में पोलित ब्यूरो में जगह दी गई है। यानी चीन का नेतृत्व सामान्य राजनीतिक प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर ऐसे फैसले ले रहा है, जिनकी आवश्यकता उसे मौजूदा परिस्थितियों में महसूस हो रही है।

जिनपिंग का सबसे भरोसेमंद सैन्य अधिकारी बना सत्ता के शीर्ष घेरे का हिस्सा

देखा जाये तो जनरल झांग शेंगमिन की नियुक्ति को महज एक सैन्य अधिकारी का राजनीतिक प्रमोशन समझना बड़ी भूल होगी। झांग लंबे समय से चीनी सेना में अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। वर्ष 2017 में वह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शामिल हुए थे और 2018 से जुलाई 2026 तक पीएलए में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रमुख चेहरों में रहे। पिछले वर्ष अक्टूबर में उन्हें सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का उपाध्यक्ष बनाया गया था। अब पोलित ब्यूरो में उनकी एंट्री ने उन्हें चीन के राजनीतिक और सैन्य सत्ता प्रतिष्ठान के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल कर दिया है।

इसे भी पढ़ें: मोदी को हराने की तारीख बताने वाला 19 दिन बाद खुद ही निपट गया, जानें क्या हुआ?

इस नियुक्ति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि झांग अब पोलित ब्यूरो में चीन की सेना का एकमात्र प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी हैं। इससे पहले सैन्य प्रतिनिधियों को हटाए जाने के कारण पोलित ब्यूरो में सेना की मौजूदगी समाप्त हो गई थी। जिनपिंग ने अब झांग को उस रिक्तता को भरने के लिए आगे किया है।

PLA में सफाई अभियान या सैन्य नेतृत्व पर जिनपिंग का शिकंजा?

हम आपको बता दें कि चीन की सेना में पिछले कुछ समय से जिस पैमाने पर शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उसने पूरी सैन्य व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। नौ जनरलों को कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर किए जाने और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि ने यह साफ कर दिया है कि जिनपिंग किसी भी स्तर पर असंतोष, भ्रष्टाचार अथवा अपनी सत्ता के प्रति संदिग्ध निष्ठा को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

इन बर्खास्त अधिकारियों में आठ ऐसे थे जो केंद्रीय समिति के सदस्य थे। कई अधिकारी चीन के पूर्व नानजिंग सैन्य क्षेत्र में सेवाएं दे चुके थे। यह क्षेत्र ताइवान के सामने चीन के पूर्वी तट के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों को कवर करता था। कुछ अधिकारियों का संबंध पूर्व 31वीं ग्रुप आर्मी से भी रहा है, जिसका ताइवान से जुड़े सैन्य अभियानों के संदर्भ में विशेष महत्व रहा है।

देखा जाये तो यही वह बिंदु है जहां इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ताइवान को लेकर चीन की सैन्य रणनीति पहले से ही अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है। ऐसे में ताइवान से संबंधित सैन्य संरचनाओं में काम कर चुके अधिकारियों का बड़े पैमाने पर बाहर होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या चीन की सैन्य कमान में वास्तविक पेशेवर क्षमता से अधिक राजनीतिक विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जा रही है?

माओ युग के बाद सबसे कम उपस्थिति, चीन की सत्ता के भीतर कितनी बेचैनी?

साथ ही पांचवीं पूर्ण बैठक में सामने आए आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं। केंद्रीय समिति के 205 पूर्ण सदस्यों में से केवल 162 सदस्य बैठक में उपस्थित हुए। वहीं 171 वैकल्पिक सदस्यों में से 117 ने हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 376 सदस्यों में से 279 की उपस्थिति दर्ज हुई, जो लगभग 74 प्रतिशत है।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह उपस्थिति माओत्से तुंग के दौर के बाद सबसे निचले स्तरों में से एक है। बैठक में 10 वैकल्पिक सदस्यों को पूर्ण सदस्यता भी दी गई, ताकि अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण पैदा हुई रिक्तियों को भरा जा सके। पार्टी ने 33 नेताओं के निष्कासन की भी पुष्टि की।

यह आंकड़ा चीन की राजनीतिक व्यवस्था के भीतर चल रही असाधारण हलचल की ओर इशारा करता है। जिनपिंग भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर एक तरफ सैन्य नेतृत्व को बदल रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर अपने नियंत्रण को मजबूत कर रहे हैं। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई का दूसरा पहलू यह भी है कि सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के बीच भय तथा अनिश्चितता का माहौल पैदा हो सकता है।

ताइवान, अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए क्या हैं इसके मायने?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रश्न चीन की युद्धक क्षमता और सैन्य निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा है। चीन लगातार अपनी नौसेना, मिसाइल क्षमता, वायुसेना और अत्याधुनिक युद्ध तकनीक का विस्तार कर रहा है। अमेरिका के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा अब केवल व्यापार और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रभाव और रणनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी बन चुकी है।

ऐसे में PLA के शीर्ष नेतृत्व में बार-बार बदलाव के दो संभावित परिणाम हो सकते हैं। पहला, जिनपिंग के प्रति पूर्ण निष्ठावान नेतृत्व के माध्यम से चीन सैन्य कमान पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर सकता है। दूसरा, अनुभवी सैन्य अधिकारियों की लगातार विदाई से निर्णय लेने की प्रक्रिया, संस्थागत अनुभव और युद्धक तैयारी प्रभावित हो सकती है।

विशेष रूप से ताइवान के संदर्भ में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। ताइवान जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य संकट के दौरान कमान की एकजुटता, त्वरित निर्णय और जमीनी सैन्य अनुभव निर्णायक होंगे। इसलिए चीन की सेना में चल रही यह राजनीतिक सफाई उसकी सैन्य क्षमता को मजबूत करेगी या उसकी पेशेवर संरचना को कमजोर करेगी, यह आने वाले समय का बड़ा सवाल है।

उधर, भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सक्रियता और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को देखते हुए बीजिंग के सैन्य नेतृत्व में होने वाले बदलावों पर भारतीय रणनीतिक प्रतिष्ठान को करीबी नजर रखनी होगी। चीन की सैन्य नीति में किसी भी बदलाव का असर भारत की सुरक्षा चुनौतियों पर पड़ सकता है।

2027 की पार्टी कांग्रेस से पहले जिनपिंग का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन

साथ ही पांचवीं पूर्ण बैठक का एक और महत्वपूर्ण फैसला यह है कि चीन की अगली 21वीं राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस 2027 की दूसरी छमाही में आयोजित होगी। इसी कांग्रेस में अगले पांच वर्षों के लिए देश का राजनीतिक नेतृत्व तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग चौथी बार पार्टी महासचिव का कार्यकाल हासिल करने की कोशिश करेंगे। हम आपको यह भी बता दें कि बैठक में तकनीकी आत्मनिर्भरता और अमेरिका के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच चीन की आर्थिक रणनीति पर भी जोर दिया गया। साथ ही पार्टी अधिकारियों की निगरानी, अनुशासन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया।

दरअसल, जिनपिंग के सामने अब दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ अमेरिकी चुनौती के मुकाबले चीन की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ानी है, तो दूसरी तरफ 2027 की सत्ता पुनर्संरचना से पहले पार्टी और सेना के भीतर किसी भी संभावित शक्ति केंद्र को समाप्त करना है।

बहरहाल, स्पष्ट है कि झांग शेंगमिन का पोलित ब्यूरो में प्रवेश केवल एक जनरल का प्रमोशन नहीं, बल्कि जिनपिंग की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें चीन की सेना, पार्टी और सत्ता के प्रत्येक महत्वपूर्ण संस्थान पर राष्ट्रपति का सीधा नियंत्रण सुनिश्चित किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वफादारी के आधार पर तैयार की गई सैन्य व्यवस्था अमेरिका और ताइवान जैसी जटिल सामरिक चुनौतियों का सामना उतनी ही प्रभावशीलता से कर पाएगी? चीन ने अपनी सत्ता की सुरक्षा के लिए बड़ा दांव खेला है, मगर इस दांव की असली परीक्षा युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों और 2027 के सत्ता परिवर्तन में ही होगी।

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

ट्रंप की नाक के नीचे से हथियार निकाल रहा ईरान, यूरोप तक से मंगवा लिया 'मौत का सामान'

अमेरिका ने ईरान के ऊपर कई बड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसके अलावा होर्मुज पर भी नाकेबंदी जारी है। लेकिन हाल में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने इसके बाद भी अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाया है। वह लगातार हथियारों के पुर्जों को मंगवा रहा है।

Continue reading on the app

  Sports

IND vs NZ: टीम इंडिया हार गई लेकिन अक्षर पटेल ने रच दिया इतिहास

टीम इंडिया के ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने ऑकलैंड टी20 के दौरान एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. पहली बार किसी भारतीय क्रिकेटर ने ऐसा कमाल किया है. Fri, 30 Oct 2026 18:14:27 +0530

  Videos
See all

Rashtravad: 'कोरा कागज..', BJP प्रवक्ता ने कांग्रेस का एजेंडा किया एक्सपोज! #shorts #ytshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-30T12:40:06+00:00

Iran America War Update : शर्त नहीं मानी तो ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी बम! | Trump | Top News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-30T12:45:11+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers