UP Panchayat Election में देरी पर Allahabad High Court चिंतित, 2 साल पहले तैयारी का सुझाव
लखनऊ, पांच अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने में विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को संविधान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में निर्वाचित स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पूर्व चुनाव की तैयारियां शुरू करनी चाहिए। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने संजय कुमार शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि काफी पहले से तैयारियां शुरू करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि पंचायत चुनाव पांच साल के भीतर पूरे हो जाएं।
पीठ ने कहा कि यद्यपि राज्य सरकार ने मई, 2025 में प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन 26 मई, 2026 को पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव नहीं कराए जा सके। राज्य सरकार के रिकॉर्ड तलब करते हुए अदालत ने कहा कि वह विलंब के कारणों की समीक्षा करेगी और यह देखेगी कि क्या ये सरकार के नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों के कारण हुआ या अधिकारियों की लापरवाही से हुआ। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त निर्धारित की है।
Karnataka में असंतुष्ट विधायकों को मनाने पहुंचे DK Shivakumar और सुरजेवाला
(तस्वीरों के साथ) बेंगलुरु, पांच अगस्त कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जारी नाराजगी के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को असंतुष्ट विधायकों से मुलाकात की। माना जा रहा है कि जिन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली उनके समर्थकों के विरोध के बाद पार्टी ने यह कदम उठाया। असंतुष्ट विधायकों को मनाने के लिए कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद और कुछ अन्य मंत्रियों ने भी इसी तरह की कोशिशें की थीं।
प्रयास जारी रहने के बीच सोमवार को हुए कैबिनेट विस्तार (जिसमें 19 मंत्रियों को शामिल किया गया था) में जगह न पाने वाले कुछ वरिष्ठ और एक जैसी सोच रखने वाले विधायकों ने अपने भविष्य के कदम पर चर्चा करने के लिए जल्द ही मिलने का फैसला किया। इस पहल का कुछ असर होता दिखा, क्योंकि इंडी के विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने सोमवार को विधायक पद से दिया गया इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने बुधवार को विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री और कुछ मंत्रियों के मनाने के बाद पाटिल ने ऐसा करने का फैसला किया। मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने के बाद कांग्रेस के और भी नाराज विधायकों की ओर से इस्तीफा दिए जाने की धमकी के बीच शिवकुमार ने मंगलवार को चेतावनी दी कि पार्टी कुछ ही मिनटों में उनके इस्तीफे स्वीकार कर लेगी। उन्होंने नाराज विधायकों से धैर्य बनाए रखने को कहा और बताया कि राज्य सरकार के बोर्ड और निगमों में जल्द ही पद भरे जाएंगे।
गुब्बी के विधायक एस.आर. श्रीनिवास (जिन्होंने मंगलवार को मंत्री न बनाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई थी) बुधवार को शिवकुमार से मुलाकात के बाद सुलह के मूड में दिखे। हालांकि उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच.डी. कुमारस्वामी की भी तारीफ की, जिन्होंने पूर्व में श्रीनिवास को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया था। मंत्रियों के एक समूह ने वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री टी.बी. जयचंद्र तथा बेंगलुरु के विधायक एम. कृष्णप्पा और उनके बेटे प्रिय कृष्णा से मुलाकात की, ताकि उन्हें मनाया जा सके।
बाद में, शाम को मुख्यमंत्री और सुरजेवाला ने कृष्णप्पा के घर जाकर पिता-पुत्र की जोड़ी से बातचीत की। हरिप्रसाद ने वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल तथा पूर्व मंत्रियों दिनेश गुंडू राव और टी.बी. जयचंद्र के घरों का दौरा किया। पत्रकारों से बात करते हुए जयचंद्र ने कहा, ‘‘मतभेद तो हैं, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए।
मुझे उम्मीद है कि आलाकमान और मुख्यमंत्री इस पर ध्यान देंगे।’’ पत्रकारों से बात करते हुए केपीसीसी प्रमुख हरिप्रसाद ने भरोसा जताया कि पार्टी में जारी नाराजगी दूर हो जाएगी। कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 सदस्य हो सकते हैं। सोमवार को हुए विस्तार के बाद भी एक पद खाली है।
सूत्रों के मुताबिक, सुरजेवाला की सिद्धरमैया से मुलाकात की भी संभावना है। पार्टी हलकों में इस बात की काफी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री इस बात से नाराज हैं कि कैबिनेट विस्तार के दौरान आलाकमान ने उनकी सिफारिशों को नहीं माना। जानकारी के मुताबिक, ब्यादगी के विधायक बसवराज शिवन्ननवर (जो कुरुबा समुदाय से हैं) को कैबिनेट में शामिल न किए जाने से सिद्धरमैया नाराज हैं, जबकि उसी समुदाय की विधान परिषद सदस्य गायत्री शांतेगौड़ा का नाम आलाकमान की ओर से भेजी गई सूची में शामिल था पर उनका शपथग्रहण आखिरी समय पर रद्द कर दिया गया।
विधान परिषद सदस्य उमाश्री को कैबिनेट में जगह न देकर उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने से भी वह (सिद्धरमैया) नाराज बताए जा रहे हैं।
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