रूस में तैनात हुआ उत्तर कोरियाई मिसाइल सिस्टम, यूक्रेनी खुफिया विभाग का दावा- पुतिन के समर्थन में खुलकर उतरा किम जोंग
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को चार साल से अधिक वक्त बीत गया है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर रुक-रुककर हमले कर रहे हैं. इस बीच, यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी ने बड़ा दावा कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि एक मिसाइल यूनिट की पश्चिमी रूस में तैनाती शुरू हो चुकी है. ये यूनिट लगभग 120 बैलिस्टिक मिसाइलों और छह लॉन्चरों से लैस हो सकती है. एजेंसी को आशंका है कि रूस इस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमलों के लिए करेगा.
जानें यूक्रेनी खुफिया एजेंसी ने क्या कहा?
यूक्रेन की मुख्य खुफिया निदेशालय, एंड्री चेरन्याक की मानें इस मिसाइल यूनिट में 90 उत्तर कोरियाई सैनिक भी शामिल है. रूस की प्लानिंग है कि वह पश्चिमी इलाके के वोरोनेज क्षेत्र में तैनात अपनी 112वीं मिसाइल ब्रिगेड में इन्हें शामिल करें. बता दें, उत्तर कोरिया पहले भी 40 केएन-23 और केएन 24 मिसाइलों और कर्मचारियों का नया बैच रूस भेज चुका है. रूस को उम्मीद है कि 120 उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलें और छह लॉन्चर तैनाती में शामिल हो सकते हैं.
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यूक्रेन के पास इस तकनीक की कमी
यूक्रेन के पास हाई-एंड एयर डिफेंस सिस्टम की भारी कमी है. रूस बैलिस्टिक मिसाइलों का अधिक इस्तेमाल करके इस कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि इन्हें गिराना मुश्किल है. साल 2023 के अंत से रूस ने दर्जनों उत्तर कोरियाई मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ किया है. रूस में उत्तर कोरियाई मिसाइलों का तैनात होना दोनों देशों के सैन्य सहयोग का विस्तार मानी जा रही है.
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पिछले सप्ताह भी कोरियाई मिसाइल से रूस ने किया था हमला
पिछले सप्ताह ही रूस ने दो उत्तर कोरियाई मिसाइलों की मदद से यूक्रेन पर अटैक किया था.इस हमले में रादुशने गांव का एक घर नष्ट हो गया था. इस हमले में एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत हो गई थी. एक्सपर्ट्स के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस यूक्रेन की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है. इन मिसाइलों की संख्या बढ़ने से खतरा और बढ़ेगा. एक्सपर्ट्स को आशंका है कि सर्दियों के वक्त रूस यूक्रेन के पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है.
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रूस का एक और बड़ा हमला, 17 की मौत
इस बीच, रूस ने बुधवार को यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों में बड़ा हमला किया, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई. वहीं, 44 लोग घायल हुए हैं. कई बड़ी कंपनियों के गोदाम और व्यापारिक केंद्र रूसी मिसाइलों का निशाना बने हैं. इस पर रूस की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. रूस का कहना है कि जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है, उनका यूक्रेन की सेना से संबंध है.
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एक भी मिसाइल नहीं रोक पाई यूक्रेनी वायुसेना
बता दें, बुधवार को रूस ने 24 बैलिस्टिक मिसाइलों, चार जिरकान क्रूज मिसाइलों और 115 ड्रोनों से अटैक किया था. यूक्रेनी वायुसेना का कहना है कि उन्होंने 90 प्रतिशत ड्रोनों को मार गिराया है. हालांकि, वायुसेना ने कहा कि वे एक भी मिसाइल को रोकने में नाकाम हुए. रूस के हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने फिर से सहयोगी देशों से इंटरसेप्ट मिसाइलों की मांग की है.
ईरान को मिली अब तक की सबसे बड़ी छूट! डील में होर्मुज पर हो गया फैसला, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
US Iran Peace Deal: युद्ध थमने के बाद अमेरिका और ईरान में शांति समझौते के लिए फिर बैठकों का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका और ईरानी अधिकारी कतर की मध्यस्थ्ता में बातचीत कर रहे हैं. इसी बीच एक रिपोर्ट में सामने आया है कि आखिर समझौते में होर्मुज पर किसका कंट्रोल होगा. यह ईरान के लिए अब तक की सबसे बड़ी छूट बताई जा रही है. आइए विस्तार से समझते हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित होर्मुज समझौते से ईरान को आने-जाने वाले यातायात पर नियंत्रण मिल जाएगा. ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित एक समझौते के तहत ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पांच महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी. इस समझौते के तहत तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर नियंत्रण मिल जाएगा. एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र और दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने बुधवार को रॉयटर्स को यह जानकारी दी, जो ईरान को दी गई अब तक की सबसे बड़ी रियायतों में से एक है.
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ईरान को मिलेगा ट्रैफिक पर नियंत्रण
अगर यह समझौता लागू होता है, तो ईरान को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर बड़ा अधिकार मिल जाएगा. इसका मतलब होगा कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध के बाद इस इलाके में ताकत का संतुलन ईरान के पक्ष में काफी बदल गया है. युद्ध से पहले इस जलडमरूमध्य से सभी जहाज बिना किसी शुल्क और रोक-टोक के गुजरते थे.
इधर, क्षेत्र में कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हैं. ईरान और ओमान अपने-अपने नियंत्रण वाले जलमार्गों को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं. ईरान का कहना है कि इन वार्ताओं में अच्छी प्रगति हुई है और प्रस्ताव के तहत जलडमरूमध्य से आने-जाने वाले सभी जहाज ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे.
क्यों है सबसे बड़ी छूट?
अमेरिका ईरान के बीच जब से शांति समझौते की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करना और होर्मुज को बिना शर्त खोलना प्रमुख शर्ते रही हैं. हालांकि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने पर सहमति दे दी थी लेकिन होर्मुज पर फीस वसुलने और नियंत्रण की शर्त पर अड़ा रहा. वहीं अमेरिका का लगातार कहना था कि होर्मुज पर किसी का नियंत्रण नहीं है. होर्मजु सबसे लिए वो भी बिना कोई फीस के खुलने चाहिए. अब रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका होर्मुज पर ईरान को नियंत्रण देने के लिए तैयार हो गया है. यह ईरान के लिए बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है.
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