गृह मंत्री अमित शाह कल लोकसभा में पेश कर सकते हैं FCRA बिल, ये होगा नए विधेयक से बदलाव
FCRA Amendment Bill: संसद का मानसून सत्र जारी है. गुरुवार (6 अगस्त) को इस सत्र का 14वां दिन है. इस सत्र में सरकार लोकसभा में 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026' (FCRA Bill) पेश कर सकती है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को लोकसभा में इस विधेयक को पेश कर सकते हैं. इसके साथ ही पता चला है कि संसद के मानसून सत्र के आगे बढ़ने की संभावना नहीं है साथ ही परिसीमन बिल के लिए विशेष सत्र बुलाने की सरकार की कोई योजना नहीं है.
मानसून सत्र में पारिस हो सकता है विदेशी योगदान संशोधन बिल
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सरकार इस सत्र के दौरान 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026' को पारित कराने की कोशिश कर सकती है. बता दें कि FCRA संशोधन बिल का मकसद 'विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010' में संशोधन करना है, जो भारत में व्यक्तियों, संगठनों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान लेने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. यह बिल 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था. सूत्रों की मानें तो अगर बिल पर चर्चा होती है, तो गृह मंत्री अमित शाह बहस का जवाब दे सकते हैं या चर्चा में हस्तक्षेप कर सकते हैं.
मानसून सत्र बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं- किरेन रिजिजू
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि संसद सत्र की तारीखें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही 16 से 18 अगस्त के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन बिलों पर किसी विशेष सत्र की योजना है.
FCRA बिल से क्या होगा बदलाव?
बता दें कि FCRA संशोधन बिल का एक अहम प्रावधान एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) बनाना है, जो उन संगठनों के विदेशी योगदान और संपत्ति की देखरेख करेगा जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है, जिन्होंने इसे सरेंडर कर दिया है या जिनका रजिस्ट्रेशन अब मान्य नहीं है.
- प्रस्तावित ढांचे के तहत, जब किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, तो उसके विदेशी योगदान और संपत्ति शुरू में अस्थायी रूप से 'निर्धारित प्राधिकरण' के पास चली जाएगी.
- अगर संगठन तय समय के अंदर अपना रजिस्ट्रेशन बहाल या रिन्यू करवा लेता है, तो संपत्ति और बिना इस्तेमाल किए गए विदेशी फंड वापस कर दिए जाएंगे. अगर तय समय के अंदर रजिस्ट्रेशन बहाल नहीं होता है, तो संपत्ति स्थायी रूप से 'निर्धारित प्राधिकरण' के पास जा सकती हैं.
- यह बिल FCRA सर्टिफिकेट की समय-सीमा खत्म होने, रिन्यू न होने या रिन्यूअल से इनकार किए जाने पर उसे रद्द करने का प्रावधान भी लाता है. इसका मकसद उन मामलों में संपत्ति और विदेशी योगदान के निपटारे से जुड़ी स्थिति को स्पष्ट करना है, जहां कोई संगठन बंद हो जाता है या उसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है.
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इंदौर एयरपोर्ट पर 1.28 करोड़ का विदेशी सोना जब्त, एयर इंडिया एक्सप्रेस कर्मचारी समेत 5 लोगों को किया गया गिरफ्तार
इंदौर एयरपोर्ट पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने विदेशी सोने की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। दरअसल कार्रवाई के दौरान करीब 1.28 करोड़ रुपये कीमत का 1000.20 ग्राम विदेशी सोना जब्त किया गया है। वहीं इस मामले में एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक कर्मचारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क और इसके पीछे मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
दरअसल इंदौर जोनल यूनिट की शुरुआती जांच के मुताबिक तस्करी की पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से बनाई गई थी। अबूधाबी से आने वाली फ्लाइट के जरिए सोना भारत लाया गया और उसे इस तरह तैयार किया गया कि वह सामान्य धातु की चूड़ियों जैसा दिखाई दे। आरोप है कि एयरपोर्ट के अंदर मौजूद एक कर्मचारी की मदद से इसे कस्टम जांच से पहले बाहर निकालने की तैयारी थी। हालांकि DRI को पहले ही इसकी सूचना मिल गई और टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरी साजिश को नाकाम कर दिया।
जांच में सामने आई पूरी साजिश
वहीं जांच एजेंसी के अनुसार गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों की जिम्मेदारियां पहले से तय थीं। संजय मुंजे को पूरे नेटवर्क का मुख्य समन्वयक माना जा रहा है, जबकि गोविंद पोरवाल अबूधाबी से सोना लेकर भारत पहुंचा। एयर इंडिया एक्सप्रेस में कार्यरत वासुदेव बरनाले पर आरोप है कि उसे एयरोब्रिज पर सोना लेकर कस्टम जांच से पहले सुरक्षित बाहर निकालना था। वहीं अमन गहलोत और अजय कुमार सेन पर सोने की डिलीवरी और अलग-अलग लोगों के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होने का आरोप है। DRI के अनुसार सभी आरोपियों को विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क ने पहले भी इसी तरह की तस्करी को अंजाम दिया था या नहीं। जांच में वित्तीय लेन-देन, विदेश यात्रा और संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
एयरपोर्ट कर्मचारी पर भी गंभीर आरोप
दरअसल पूछताछ के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि तस्करी से जुड़े लोगों को एयरपोर्ट की निगरानी और जांच व्यवस्था की जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जाती थी। जांच में यह बात भी सामने आई है कि हर सफल खेप के बदले संबंधित व्यक्ति को लगभग 10 हजार रुपये दिए जाते थे। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित था या इसके तार दूसरे शहरों और विदेशों से भी जुड़े हैं। DRI ने जब्त किए गए विदेशी सोने को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कब्जे में ले लिया है और आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
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