गर्मियों के मौसम में ना लें बिजली के बिल की टेंशन, मोदी सरकार की इस योजना का ऐसे उठाएं लाभ
PM Surya Ghar Yojana: उत्तर भारत में गर्मी की शुरुआत होने लगी है. गर्मी से राहत पाने के लिए लोग पंखा चलाने लगे हैं. मार्च के आखिर तक कूलर और एसी भी चलना शुरू हो जाएंगे. ऐसे में ज्यादातर लोगों को बिजली के बिल की टेंशन होने लगती है. अगर आप भी गर्मियों में आने वाले भारी भरकम बिजली के बिल के चलते टेंशन में हैं तो मोदी सरकार ने आपको इसका एक उपाय भी दे दिया है.
दरअसल, हम बात कर रहे हैं पीएम सूर्य घर योजना के बारे में. जिसके तहत आप अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवा सकते हैं. जिसमें मोदी सरकार आपको सीधी सब्सिडी भी दे रही है. घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने से आपके बिजली के बिल की टेंशन खत्म होने के साथ आपको बिजली की समस्या से भी निजात मिलेगी.
बिजली के अलावा मिलेगा ये फायदा
बता दें कि इस योजना के तहत मोदी सरकार एक करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ना चाहती है. दरअसल, सरकार चाहती है कि परिवार अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा करें. इसके साथ ही ग्रिड से जोड़कर सोलर पैनल से पैदा हुए एक्सट्रा यूनिट का फायदा भी होता है. इस योजना में सरकार की ओर से सब्सिडी भी जाती है है.
कितनी मिलती है सब्सिडी
अगर आप पहले 2 किलोवाट का सोलर पैनल अपनी घर की छत पर लगवाते हैं तो आपको सरकार 30,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से सहायता मिलती है. वहीं अगर आप 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाते हैं तो आपको तीसरे किलोवाट पर 18,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी. यानी आपको कुल मिलाकर अधिकतम 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी जो सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगी.
वहीं अगर कोई परिवार 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाता है तो पहले 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये और अतिरिक्त 1 किलोवाट पर 18,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी. यानी आपको कुल 78,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी. जिससे शुरुआती लागत काफी हद तक कम हो जाएगी.
ऐसे करें आवेदन, ये हैं शर्तें
इस योजना के लिए आप मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के आधिकारिक पोर्टल https://consumer.pmsuryaghar.gov.in/consumer/#/login पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इस योजना के तहत कुछ शर्ते भी रखी गई हैं. जिसके तहत सोलर सिस्टम सिर्फ रिहायशी इमारत यानी जिस घर में आप रहते हैं उसी पर ही लगवा सकते हैं. इसमें ग्रिड कनेक्टेड या हाइब्रिड मॉडल ही पात्र हैं. ये सोलर पैनल भारत में बने डीसीआर मॉड्यूल होने चाहिए. साथ ही इसका इंस्टॉलेशन रजिस्टर्ड वेंडर द्वारा ही कराया जाना चाहिए. बता दें कि इस योजना के तहत एक घर को सिर्फ एक बार ही सब्सिडी मिलेगी.
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अमेरिका-इजरायल-ईरान जंग के बीच अमित शाह ने कश्मीर को लेकर लिया बड़ा फैसला, जानें अब क्या काम नहीं कर पाएंगे लोग
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं. युद्ध के ऐसे हालातों में मिडिल ईस्ट के साथ-साथ पश्चिमी एशिया के कई देश भी अलर्ट मोड पर हैं. इसी कड़ी में भारत ने भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इस बीच एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. ये खबर कश्मीर से जुड़ी है. जी हां जंग के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से कश्मीर को लेकर बहुत बड़ा फैसला लिया गया है. इसके तहत अब कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. जी हां कश्मीर में फिलहाल लोग इंटरनेट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. यानी उन्हें युद्ध से जुड़ी जानकारियां सीधी इंटरनेट के माध्यम से नहीं मिल सकेंगी.
ये भी है गृहमंत्रालय का निर्देश
यही नहीं भारत सरकार ने संभावित घरेलू प्रभावों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है. केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर सांप्रदायिक तनाव की आशंका के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाने को कहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय ने हालिया सैन्य घटनाक्रम के संदर्भ में आगाह किया है कि विदेशी घटनाओं का असर देश के भीतर भी दिख सकता है, विशेषकर धार्मिक सभाओं, जुलूसों या सार्वजनिक बैठकों के दौरान. राज्यों को संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखने और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड में रखने के निर्देश दिए गए हैं.
भड़काऊ भाषण और अफवाहों पर सख्ती
एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसे व्यक्तियों और समूहों पर नजर रखी जाए जो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का हवाला देकर लोगों की भावनाएं भड़काने की कोशिश कर सकते हैं. विशेष रूप से कट्टरपंथी भाषण देने वाले उपदेशकों और सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है.
मंत्रालय ने राज्यों से इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित विवाद पर तुरंत हस्तक्षेप करने पर जोर दिया है. सरकार का मानना है कि समय रहते उठाए गए कदम कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोक सकते हैं.
कश्मीर में एहतियाती कदम
जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में पहले ही एहतियाती कार्रवाई की गई है. श्रीनगर समेत घाटी के कई क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट की गति अस्थायी रूप से कम कर दी गई है. यह कदम संभावित विरोध प्रदर्शनों और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया.
श्रीनगर के लाल चौक क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि बड़ी भीड़ इकट्ठा न हो सके. अधिकारियों के मुताबिक, कुछ इलाकों से विरोध प्रदर्शन और शोक सभाओं की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई.
खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. विदेश और गृह मंत्रालय मिलकर जियोपॉलिटिकल हालात के साथ-साथ उनके घरेलू प्रभावों का आकलन कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर देश के सामाजिक ताने-बाने पर न पड़े और शांति व सद्भाव बनाए रखा जा सके.
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