हर मौसम में कैसे रखें सेहत का ध्यान? आयुर्वेद से जानिए ऋतुचर्या के नियम
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ रहने का सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका है मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खानपान को बदलना। इसे ही ऋतुचर्या कहा जाता है। भारतीय कैलेंडर को सूरज की चाल की दिशा के आधार पर साल को छह ऋतुओं में बांटा गया है और हर ऋतु का शरीर पर अलग असर पड़ता है। अगर हम मौसम के हिसाब से अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव कर लें, तो कई बीमारियों से आसानी से बच सकते हैं।
सर्दियों यानी हेमंत (मिड नवंबर से मिड जनवरी तक) और शिशिर (मिड जनवरी से मिड मार्च तक) ऋतु में पाचन शक्ति मजबूत रहती है, इसलिए इस समय पौष्टिक और थोड़ा भारी भोजन लिया जा सकता है। घी, दूध, गुड़, तिल, बाजरा, गेहूं और गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर को ताकत देते हैं। इस मौसम में शरीर की अच्छे से तेल मालिश करना, गुनगुने पानी से नहाना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद रहता है। लेकिन बहुत ठंडी, सूखी और हल्की चीजें खाने से बचना चाहिए।
जब वसंत ऋतु (मिड मार्च से मिड मई तक) आती है, तो शरीर में जमा कफ बढ़ने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस समय हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। जौ, पुराना चावल, मूंग दाल, शहद, और हल्का गर्म पानी अच्छा रहता है। तला-भुना, ज्यादा मीठा और भारी भोजन कम करें। रोज थोड़ा व्यायाम, सूखी मालिश और गुनगुने पानी से स्नान लाभकारी होता है।
ग्रीष्म ऋतु (मिड मई से मिड जुलाई तक) में शरीर की ताकत कम होने लगती है और पानी की कमी जल्दी होती है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ जैसे छाछ, नारियल पानी, फलों का रस और सादा पानी पिएं। हल्का, मीठा और ठंडक देने वाला भोजन लें। बहुत मसालेदार, तला-भुना खाना और ज्यादा मेहनत से बचें। ढीले-ढाले कपड़े पहनें और धूप से बचाव करें।
वर्षा ऋतु (मिड जुलाई से मिड सितंबर) के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस समय बासी, तला-भुना और भारी भोजन से बचना चाहिए। उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना बेहतर है। खट्टा और नमकीन स्वाद थोड़ा लिया जा सकता है, लेकिन संयम जरूरी है। बारिश में भीगने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
शरद ऋतु (मिड सितंबर से मिड नवंबर तक) में पित्त बढ़ता है, जिससे त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इस समय मीठा, कड़वा और ठंडक देने वाला भोजन लेना अच्छा रहता है। ज्यादा तेल-मसाले और धूप से बचना चाहिए।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इजरायल-ईरान युद्ध: लगातार तीसरे दिन विमान परिचालन में रुकावट के चलते एयरलाइन स्टॉक्स फिसले
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल-ईरान युद्ध के कारण लगातार तीसरे दिन खाड़ी के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने के चलते सोमवार को एयरलाइन से जुड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
एशिया प्रशांत क्षेत्र में कारोबार करने वाली ज्यादातर एयरलाइन के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) के शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई है।
वहीं, सिंगापुर एयरलाइंस के शेयर में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। जापान की एएनए और जेएएल के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया की क्वांटास का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक फिसल गया।
दोनों देशों के बीच संघर्ष के कारण दुबई, दोहा और अबू धाबी सहित प्रमुख ट्रांजिट केंद्र करीब तीन दिनों से बंद हैं, जिसके चलते एयरलाइंस को तेल अवीव, दुबई, बेरूत, तेहरान, रियाद और अन्य क्षेत्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें स्थगित, मार्ग परिवर्तन या रद्द करनी पड़ी हैं।
भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुई हैं और गैर-पश्चिम एशियाई एयरलाइंस में इंडिगो ने सबसे अधिक उड़ानें रद्द कीं।
रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली हवाई अड्डे पर 28 फरवरी को भारतीय एयरलाइंस की 410 उड़ानें रद्द हुईं, 1 मार्च को लगभग 350 उड़ानें रद्द हुईं और 2 मार्च को कम से कम 300 उड़ानों के प्रभावित होने की आशंका थी।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पहले सूचित किया था कि वह एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है और फंसे हुए यात्रियों की सहायता के लिए एक यात्री सहायता नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिया है।
एयर इंडिया ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजरायल और कतर से आने-जाने वाली सभी उड़ानों का निलंबन 2 मार्च को रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया है। ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, एयर इंडिया ने कहा कि वह ओमान, दक्षिणी सऊदी अरब और मिस्र के रास्ते का उपयोग कर रही है, जिससे यूरोप जाने वाली उड़ानों में लगभग 30-40 मिनट का अतिरिक्त समय लग रहा है और परिचालन लागत बढ़ रही है।
जिन एयरलाइंस ने उड़ानें निलंबित या मार्ग परिवर्तन की घोषणा की है, उनमें एयर फ्रांस, केएलएम, ब्रिटिश एयरवेज, कैथे पैसिफिक, सिंगापुर एयरलाइंस, तुर्की एयरलाइंस, लुफ्थांसा, आईटीए एयरवेज, मलेशिया एयरलाइंस, जापान एयरलाइंस, एजियन, लॉट पोलिश और नॉर्वेजियन एयर शामिल हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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